1. भारत के ऑफिस कल्चर का असहज सवाल और Pang Dong Lai की ‘Unhappy Leave’

काम का मन नहीं तो छुट्टी ले लो: भारत के ऑफिस कल्चर का सबसे असहज सवाल Unhappy Leave।
सुबह के 8 बजकर 45 मिनट हैं। एक employee laptop खोलकर बैठा है, coffee ठंडी हो चुकी है, और screen पर unread mails ऐसे चमक रहे हैं जैसे हर message एक छोटा सा alarm हो।
वह बीमार नहीं है। उसे fever नहीं है। कोई medical report नहीं है। लेकिन अंदर से वह खाली है, थका हुआ है, और काम शुरू करने से पहले ही हार चुका है।
अब सोचिए, इसी हालत में अगर उसे company से एक simple message मिले, “खुश नहीं हो, तो आज काम पर मत आओ।” पहली नजर में यह dream policy लगती है, लेकिन असली सवाल यहीं से शुरू होता है।
क्या कर्मचारी की खुशी कंपनी की जिम्मेदारी है?
क्योंकि एक Chinese retail company ने सच में अपने employees को ऐसी leave दी, और India में Harsh Goenka ने जब इसे share किया, तो लोगों ने एक uncomfortable सवाल पूछना शुरू कर दिया।
क्या employee की खुशी company की responsibility है, या सिर्फ employee की personal problem?
August 2026 में RPG Group के chairman Harsh Goenka ने Pang Dong Lai की “unhappy leave” policy पर discussion छेड़ा, जिसमें employees को साल में 10 paid unhappy leave मिलती हैं, जैसा कि Moneycontrol ने report किया।
लेकिन इस story का twist यह नहीं है कि leave मिलती है। Twist यह है कि employee को वजह बतानी ही नहीं पड़ती।
‘आज मेरा मन ठीक नहीं है’ – एक क्रांतिकारी लीव पॉलिसी
ना doctor certificate, ना family emergency, ना boss को emotional explanation। बस एक बात काफी है, “आज मेरा मन ठीक नहीं है।”
और इससे भी बड़ा shock यह है कि manager इस leave को reject नहीं कर सकता।
हमारे यहां office में leave मांगना भी कभी-कभी छोटा सा courtroom बन जाता है। पहले reason दो, फिर proof दो, फिर guilty feel करो, और फिर भी reply आए, “थोड़ा manage कर लो।”
यहीं से Pang Dong Lai की policy सिर्फ HR rule नहीं रहती। वह एक mirror बन जाती है, जिसमें India का workplace culture अपना चेहरा देखने लगता है।
2. Pang Dong Lai का बिजनेस मॉडल और कर्मचारियों की मानसिक स्थिति

Pang Dong Lai कोई Silicon Valley startup नहीं है। यह China के Henan province की supermarket और department store chain है, जिसकी शुरुआत Yu Donglai ने 1995 में की थी।
एक तरफ दुनिया retail business को margins, footfall और sales per square foot से देखती है। Yu Donglai ने उसी business को employees की mental state से देखना शुरू किया।
South China Morning Post के मुताबिक, 2024 के China Supermarket Week में Yu Donglai ने कहा कि, employees 10 additional leave अपने discretion पर ले सकते हैं।
एडिशनल लीव और बिजनेस लॉजिक का कनेक्शन
अब ध्यान दीजिए, “additional leave.” यानी यह normal sick leave या annual leave का replacement नहीं है। यह एक अलग emotional space है।
Company का message simple था: इंसान machine नहीं है। और अगर machine भी overheat हो जाए, तो उसे बंद करना पड़ता है।
लेकिन क्या यह सिर्फ kindness है, या इसके पीछे business logic भी छिपा है?
Pang Dong Lai की reputation सिर्फ employee policy की वजह से नहीं बनी। इसके stores customer service के लिए भी famous हैं, जहां छोटे-छोटे services customer को pampered feel कराते हैं।
कर्मचारी की वेलबीइंग और कस्टमर एक्सपीरियंस
कहानी यहां interesting हो जाती है। जो company employee को freedom देती है, वही customer को भी extra care दे पाती है।
मतलब अंदर का culture बाहर की service में दिखाई देने लगता है।
अगर employee अंदर से exhausted है, तो वह smile fake कर सकता है, लेकिन warmth fake नहीं कर सकता।
Retail में customer सिर्फ product नहीं खरीदता। वह behavior भी महसूस करता है। cashier की आवाज, staff का patience, manager का tone, सब brand का हिस्सा बन जाते हैं।
यहीं Pang Dong Lai ने एक hidden truth पकड़ा: employee wellbeing charity नहीं, customer experience का raw material है।
3. भारतीय वर्कप्लेस कल्चर, बर्नआउट और सामाजिक दबाव

लेकिन India में जैसे ही Harsh Goenka ने यह बात उठाई, debate दो हिस्सों में बंट गई।
कुछ लोगों ने कहा, यह India में बहुत जरूरी है। क्योंकि burnout real है, stress real है, और office में emotional honesty आज भी risky लगती है।
दूसरे लोगों ने कहा, India में ऐसी policy misuse होगी। लोग बिना वजह leave लेंगे, productivity down होगी, और managers के हाथ बंध जाएंगे।
वर्कप्लेस में उदासी को आलस समझने की भूल
लेकिन यह सवाल भी थोड़ा अधूरा है। अगर कोई employee एक दिन की unhappy leave misuse करता है, तो क्या यह बड़ा issue है, या वह culture बड़ा issue है जहां लोग रोज unhappy होकर आते हैं?
असल समस्या leave नहीं है। असल समस्या यह है कि हम workplace में sadness को laziness समझ लेते हैं।
कोई चुप है, तो कहा जाता है attitude है। कोई overwhelmed है, तो कहा जाता है weak है। कोई break चाहता है, तो कहा जाता है commitment नहीं है।
और यही silent pressure धीरे-धीरे burnout में बदलता है।
ग्लोबल इकोनॉमी पर मेंटल हेल्थ का असर
W H O और I L O के अनुसार depression और anxiety की वजह से हर साल दुनिया में लगभग 12 billion working days lost होते हैं, और global economy को करीब US$ 1 trillion productivity loss होता है।
यह statistic सिर्फ number नहीं है। यह उन लाखों लोगों की कहानी है जो office में present हैं, लेकिन mentally absent हो चुके हैं।
India में यह problem और layered हो जाती है। यहां नौकरी सिर्फ salary नहीं, family की उम्मीद, EMI, social status और security का symbol है।
बहुत सारे employees resign नहीं कर सकते। बहुत सारे लोग complain नहीं कर सकते। और बहुत सारे लोग break लेने से पहले ही डर जाते हैं।
4. नए जमाने के कर्मचारी और कंपनियों की वास्तविक जिम्मेदारी

क्योंकि हमारे workplace में एक invisible rule चलता है: जो सबसे ज्यादा सहता है, वही सबसे committed माना जाता है।
Late बैठना dedication है। छुट्टी लेना weakness है। silence professionalism है। और exhaustion normal है।
लेकिन क्या यह model future के workforce को संभाल पाएगा?
Gen-Z और millennials अब workplace को सिर्फ salary slip से नहीं नापते। वे पूछते हैं, क्या यहां respect है, growth है, flexibility है, और mental peace है?
क्या अनहैप्पी लीव सिर्फ एक पट्टिनुमा उपाय है?
यहीं वजह है कि “unhappy leave” जैसी policy अचानक viral लगती है। क्योंकि यह उस pain को नाम देती है, जिसे लोग लंबे समय से feel कर रहे थे।
पहले employee को कहना पड़ता था, “मुझे fever है।” अब सवाल है, क्या वह कह सकता है, “मैं emotionally ठीक नहीं हूं”?
यह छोटा सा sentence workplace culture की पूरी परीक्षा ले लेता है।
लेकिन यहां एक दूसरा trap भी है। अगर company toxic है, manager rude है, workload unrealistic है, और सिर्फ 10 unhappy leave दे दी गई, तो क्या सच में problem solve होगी?शायद नहीं।
क्योंकि unhappy leave bandage हो सकती है, surgery नहीं।
रिएक्शन बनाम रिस्पॉन्सिबिलिटी: असली बदलाव क्या है?
अगर employee हर महीने emotionally टूट रहा है, तो issue उसकी leave balance में नहीं, company के operating system में है।
यही Harsh Goenka के सवाल को powerful बनाता है। बात सिर्फ यह नहीं कि India में unhappy leave होनी चाहिए या नहीं।
बात यह है कि क्या Indian companies ऐसा environment बना सकती हैं जहां unhappy leave की जरूरत कम पड़े? यह difference बहुत बड़ा है।
एक company कह सकती है, “जब टूट जाओ, छुट्टी ले लो।” दूसरी company कह सकती है, “हम ऐसा काम का माहौल बनाएंगे कि तुम रोज टूटो नहीं।”
पहला response है। दूसरा responsibility है।
5. वर्कप्लेस में डर, भरोसे का माहौल और छिपे हुए सच

China की यह story इसलिए भी interesting है क्योंकि China खुद long working hours culture, खासकर 996 model, के लिए criticize होता रहा है।
996 यानी सुबह 9 से रात 9, हफ्ते में 6 दिन। यही वह backdrop है जिसमें Pang Dong Lai की 7-hour workday और weekends off वाली image अलग दिखती है।
The Straits Times ने report किया कि Yu Donglai की chain में employees को, sad leave के अलावा already strong leave benefits और shorter work schedule मिलते हैं।
तो unhappy leave अकेली policy नहीं है। वह एक bigger philosophy का हिस्सा है।
कागजी देखभाल बनाम वास्तविक देखभाल
अगर सिर्फ poster लगाकर company कहे, “mental health matters,” लेकिन employee रात 11 बजे तक mails का reply दे रहा हो, तो वह care नहीं, decoration है।
Real care calendar में दिखती है। Workload में दिखती है। Manager training में दिखती है। Salary fairness में दिखती है। Leave approval में दिखती है।
और सबसे ज्यादा तब दिखती है जब employee uncomfortable truth बोल सके। Unhappy Leave
सोचिए, एक employee अपने boss से कहता है, “मैं आज mentally drained हूं।” Boss के पास दो options हैं।
पहला, वह बोले, “सबको stress है, काम करो।” दूसरा, वह पूछे, “ठीक है, rest करो, फिर workload discuss करते हैं।”
पहला workplace fear बनाता है। दूसरा workplace trust बनाता है। Unhappy Leave
तीन बड़े डर और अनहैप्पी लीव की भाषा
लेकिन trust भी free में नहीं आता। Company को misuse का डर होता है। Employee को judgement का डर होता है। Manager को target miss होने का डर होता है।
यही तीन डर मिलकर Indian offices की real कहानी बनाते हैं।
Unhappy leave का सबसे बड़ा impact शायद leave days में नहीं, language में है।
यह पहली बार employee को यह permission देती है कि, वह अपनी emotional state को valid reason मान सके।
और यही बात बहुत लोगों को uncomfortable करती है।
क्योंकि अगर employee कह सकता है कि वह unhappy है, तो company को पूछना पड़ेगा, “क्यों?” और यह “क्यों” खतरनाक है।
6. भारतीय कॉर्पोरेट का भविष्य और निष्कर्ष

क्योंकि जवाब में सिर्फ personal mood नहीं आएगा। जवाब में bad manager, unclear targets, salary pressure, office politics, toxic comments, career stagnation और invisible workload भी बाहर आ सकता है।
यानी unhappy leave एक छोटी खिड़की खोलती है, लेकिन उसके पीछे पूरा workplace system दिखाई देने लगता है।
India में कई companies wellness webinars, yoga sessions और motivational talks कराती हैं। लेकिन employee कई बार उसी दिन overtime कर रहा होता है। यह contradiction employees जल्दी पकड़ लेते हैं।
उन्हें poster नहीं चाहिए। उन्हें predictable timing, respectful manager, fair leave approval और realistic target चाहिए। Unhappy Leave
‘कस्टमर इज किंग’ बनाम कर्मचारियों का सम्मान
और अगर company सच में bold है, तो उसे सिर्फ happy employees की photos नहीं, unhappy employees की आवाज भी सुननी पड़ेगी।
Pang Dong Lai की policy इसलिए viral हुई क्योंकि उसने happiness को performance का hidden input मान लिया।
हम अक्सर कहते हैं, “Customer is king.” लेकिन सवाल यह है कि unhappy employee king को serve कैसे करेगा? Unhappy Leave
एक exhausted employee customer से लड़ सकता है। एक respected employee customer को संभाल सकता है।
यहीं business insight है जिसे बहुत लोग emotional topic समझकर ignore कर देते हैं।
अब India में यह policy लागू हो सकती है या नहीं, इसका answer simple yes या no नहीं है।
Large corporate में इसे structured pilot की तरह test किया जा सकता है। Startups में इसे trust-based leave system से जोड़ा जा सकता है। Retail और factories में shift planning के साथ design करना पड़ेगा।
लेकिन छोटे businesses के लिए भी इसका मतलब यह नहीं कि 10 paid leaves तुरंत announce करो।
कभी-कभी पहला step इतना simple होता है कि manager employee से पूछे, “सब ठीक है?” और फिर सच सुनने की capacity रखे।
क्योंकि problem पूछने में नहीं, जवाब झेलने में है।
भविष्य की वर्कप्लेस नीतियां और सारांश
Social media पर Goenka की post के बाद कुछ users ने Indian bosses पर frustration निकाली। कुछ ने corporate hypocrisy पर सवाल उठाए। और कुछ ने पूछा, क्या बड़ी Indian companies खुद यह policy अपनाएंगी? Unhappy Leave
यह सवाल fair है।
क्योंकि workplace culture पर बात करना आसान है। अपने payroll, targets और manager behavior में बदलाव लाना मुश्किल है।
लेकिन हर बड़ी policy पहले एक uncomfortable conversation से शुरू होती है। Unhappy Leave
Maternity leave, paternity leave, menstrual leave, remote work, four-day week, mental health days, ये सब कभी “too much” लगते थे।
फिर धीरे-धीरे business ने समझा कि employee कोई replaceable part नहीं है। हर resignation, हर burnout, हर silent disengagement की cost होती है।
कई बार सबसे expensive employee वह नहीं होता जिसे ज्यादा salary मिलती है। सबसे expensive वह system होता है जो good people को धीरे-धीरे थका देता है।
Unhappy leave इसी cost को visible बनाती है।
यह कहती है, employee जब टूटेगा, तो काम पर असर पड़ेगा ही। फर्क सिर्फ इतना है कि company इसे officially देखना चाहती है या ignore करना चाहती है। Unhappy Leave
सोचिए, सुबह office जाने से पहले एक employee phone उठाता है, पर अंदर से बिल्कुल खाली महसूस करता है। डर यही है कि वह बीमार नहीं है, फिर भी काम करने की ताकत नहीं बची। Unhappy Leave
चीन की retail company Pang Dong Lai ने इसी feeling को policy बना दिया। वहां employees को साल में 10 दिन की paid “Unhappy Leave” मिलती है। Unhappy Leave
मतलब अगर आपका मन खराब है, stress है या burnout महसूस हो रहा है, तो आप छुट्टी ले सकते हैं। सबसे बड़ी बात, manager इस leave को reject नहीं कर सकता। Unhappy Leave
Harsh Goenka ने यही rule share करके भारत में सवाल उठा दिया कि क्या Indian workplaces को भी ऐसी leave चाहिए, या ऐसा माहौल बनाना चाहिए जहां लोग खुशी से काम पर आएं?
Social media पर debate छिड़ गई। कुछ लोगों नेइसे जरूरी बताया, कुछ ने सवाल उठाया कि क्या बड़ी companies सच में ऐसा कर पाएंगी। पूरी सच्चाई जानने के लिए discription में दिए लिंक पर क्लिक कर अभी पूरी वीडियो देखें।!
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