8.7 करोड़ Youth: भारत का सबसे बड़ा Hidden Crisis।


Table of Contents

1. भारत का सबसे बड़ा Hidden Crisis और NEET श्रेणी की सच्चाई

Youth
job market

8.7 करोड़ युवा: भारत का सबसे बड़ा Hidden Crisis। अब जरा सोचिए, एक घर में 22 साल का लड़का सुबह उठता है, फोन चलाता है, घरवालों की नजरों से बचता है, और दिन खत्म होने तक वही सवाल फिर खड़ा रहता है। न कॉलेज जा रहा है, न नौकरी पर जा रहा है, न कोई skill सीख रहा है। बाहर से देखने पर लोग कह देते हैं, आजकल के बच्चे मेहनत नहीं करना चाहते। लेकिन अगर यही कहानी एक घर की नहीं, 8.7 करोड़ युवाओं की हो, तो क्या इसे आलस कहेंगे या देश के system की सबसे बड़ी warning? Youth

युवा शक्ति के अंदर छिपा बड़ा खालीपन

भारत को दुनिया का सबसे युवा देश कहा जाता है, लेकिन इसी युवा ताकत के अंदर एक बड़ा खालीपन छिपा है, जिसे NITI Aayog की report ने फिर सामने ला दिया है। Report के मुताबिक 15 से 29 साल के करीब 8.7 करोड़ युवा NEET category में आते हैं। NEET यानी Not in Education, Employment or Training. मतलब ये युवा न पढ़ाई कर रहे हैं, न नौकरी में हैं, और न ही कोई ऐसी training ले रहे हैं जो उन्हें future job market के लिए तैयार करे।

क्या कर रहे हैं देश के 8.7 करोड़ युवा?

अब असली सवाल यही है। अगर ये युवा पढ़ नहीं रहे, कमा नहीं रहे, और skill भी नहीं सीख रहे, तो आखिर वे कर क्या रहे हैं? इसका जवाब simple नहीं है, क्योंकि इस कहानी में poverty भी है, education system की कमी भी है, job market का pressure भी है, और social restrictions भी हैं। वीडियो को Like कर दीजिए, क्योंकि यह सिर्फ बेरोजगारी की खबर नहीं है। यह भारत के future, परिवारों की income और युवाओं की direction की कहानी है। सबसे पहले एक बात साफ समझिए। NEET youth का मतलब यह नहीं कि सारे युवा घर पर आराम से बैठे हैं और life enjoy कर रहे हैं।


2. शिक्षा का बोझ, Practical Skills की कमी और मजबूरी का रोजगार

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income

बहुत से युवाओं के लिए पढ़ाई छोड़ना choice नहीं, मजबूरी होती है। घर की income कम होती है, fees बढ़ती रहती है, और private tuition का खर्च अलग। कई families पहले ही school, college, coaching और छोटे-मोटे कर्जों में दब चुकी होती हैं। ऐसे में graduation के बाद नया course करना luxury जैसा लगने लगता है। यहीं पहला trap शुरू होता है। Degree तो हाथ में आ जाती है, लेकिन उस degree को job में बदलने वाली practical skill missing रह जाती है।

मार्केट की मांग और सिलेबस का gap

ऊपर से देखने पर लगता है कि बच्चा graduate है, तो उसे job मिल जानी चाहिए। लेकिन market degree नहीं, usable skill मांगता है। Company को ऐसा candidate चाहिए जो software चला सके, data समझ सके, customer handle कर सके, machine operate कर सके या digital work कर सके। लेकिन हमारे बहुत से colleges अभी भी syllabus, theory और exam passing पर टिके हैं। Industry क्या मांग रही है, यह connection कमजोर रह जाता है। इसीलिए report में एक चौंकाने वाली बात सामने आती है कि graduates में बहुत छोटा हिस्सा ही अपनी qualification के हिसाब से सही work में fit बैठता है।

पारिवारिक दबाव और मजबूरी वाला रोजगार

अगर पढ़ाई और काम के बीच इतना बड़ा gap है, तो youth confused होंगे ही। उन्हें समझ नहीं आता कि गलती उनकी है या system की। अब यहां कहानी थोड़ी और गहरी हो जाती है। गरीब परिवार का युवा सिर्फ career plan नहीं बना रहा होता, वह घर की tension भी साथ लेकर चलता है। घर में पिता की income कम है, मां घर चला रही है, छोटे भाई-बहन पढ़ रहे हैं, और ऊपर से समाज पूछता है, बेटा क्या कर रहा है? ऐसे में बहुत से युवा लंबी training या unpaid internship नहीं कर पाते। उन्हें तुरंत पैसे चाहिए, भले ही कम मिलें। यहीं मजबूरी वाला रोजगार शुरू होता है। कोई delivery करने लगता है, कोई दुकान पर sales करता है, कोई informal काम पकड़ लेता है। Technically वह job में दिख सकता है, लेकिन असल में उसकी पढ़ाई, talent और long-term income potential का बहुत छोटा हिस्सा ही इस्तेमाल होता है।


3. वेटिंग मोड, लैंगिक असमानता और ग्रामीण युवाओं का संघर्ष

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unemployment

और जो young लोग ऐसे काम भी नहीं पकड़ पाते, वे धीरे-धीरे घर, coaching, uncertainty और waiting mode के बीच फंस जाते हैं। किसी को government exam की तैयारी में सालों लग जाते हैं। किसी को लगता है private job में salary बहुत कम है। कोई सही guidance के बिना भटकता रहता है। अब सवाल उठता है, क्या ये सिर्फ unemployment की problem है? नहीं। यह skill, affordability, mobility और dignity की combined problem है। क्योंकि जब youth के पास सही information नहीं होती, तो वह गलत course में पैसा लगा देता है या किसी course में पैसा लगाने से डरता रहता है। जब training center दूर होता है, तो rural youth नहीं जा पाता। जब fees ज्यादा होती है, तो गरीब youth बाहर रह जाता है। और जब course करके भी job की guarantee नहीं होती, तो परिवार सोचता है कि बेटा कोई छोटा काम कर ले, कम से कम कुछ पैसा तो आएगा।

महिलाओं की स्थिति और सामाजिक पाबंदियां

इस पूरी कहानी का सबसे sensitive हिस्सा women हैं। 8.7 करोड़ NEET youth में महिलाओं की संख्या बहुत बड़ी है। कई लड़कियां पढ़ाई पूरी कर लेती हैं, लेकिन job या training तक उनका रास्ता घर की जिम्मेदारियों, safety concerns और social expectations से रुक जाता है। ग्रामीण इलाकों में यह problem और तेज हो जाती है। वहां न अच्छे training centers होते हैं, न nearby industries, न safe transport का भरोसा। एक लड़की अगर AI, nursing, data entry या tailoring business सीखना चाहती है, तो सवाल सिर्फ course का नहीं होता। सवाल access और permission का भी होता है।

Rural Youth और Demographic Pressure

यानी talent मौजूद है, लेकिन system तक पहुंच नहीं है। Opportunity है, लेकिन doorstep तक नहीं आती। Rural boys की situation भी आसान नहीं है। कई युवा खेती में नाममात्र मदद करते हैं, लेकिन उसे full-time productive employment नहीं कहा जा सकता। कुछ साल competitive exams में निकल जाते हैं। फिर age बढ़ती है, confidence घटता है, और family pressure बढ़ता जाता है। अब यहीं एक बड़ा contradiction है। भारत दुनिया को young workforce देने की बात करता है, लेकिन अपने ही करोड़ों युवाओं को workforce में जोड़ नहीं पा रहा। अगर ये youth skilled होते, तो manufacturing, logistics, healthcare, green energy, digital services और small businesses को बड़ी ताकत मिल सकती थी। लेकिन अगर ये बाहर रह गए, तो demographic dividend धीरे-धीरे demographic pressure बन सकता है।


4. नीति आयोग के सुझाव: Skilling का नया Model और Apprenticeship

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youth

अब solution की बात करें, तो NITI Aayog ने सिर्फ problem नहीं बताई। Report का बड़ा message है कि skilling को नए तरीके से सोचना पड़ेगा। पहला बड़ा कदम है affordability। गरीब और low-income families के युवाओं के लिए skill training free या heavily subsidized होनी चाहिए। क्योंकि अगर course की fees ही barrier है, तो youth class के बाहर खड़ा रहेगा। Skill mission का gate wallet से decide नहीं होना चाहिए। दूसरा जरूरी point है financial support during training। अगर युवा तीन महीने training कर रहा है, तो वह अपने daily खर्च कैसे manage करेगा? यहीं DBT जैसी सहायता काम आ सकती है। Training के दौरान थोड़ा support मिले, तो youth मजबूरी में बीच में course छोड़ने से बच सकता है।

Local Economy के हिसाब से Course Design

तीसरी बात course design की है। Skill training सिर्फ certificate बांटने का program नहीं हो सकती। Certificate तब meaningful है, जब उसके बाद काम मिले। AI, data, green energy, logistics, healthcare support, machine repair, digital marketing और local services जैसे areas में demand बढ़ रही है। लेकिन हर जगह Silicon Valley वाली skill नहीं चाहिए। छोटे शहरों में भी local business, repair work, food processing, warehousing और digital accounting की demand है। यानी skilling का model Delhi-Mumbai जैसा ही हर गांव पर copy नहीं किया जा सकता। Local economy को देखकर local skill map बनाना पड़ेगा।

Apprenticeship और Real Work Culture

चौथा solution apprenticeship है। Youth classroom में theory पढ़े और साथ में workplace पर real काम देखे, तभी confidence बनेगा। क्योंकि बहुत से graduates पहली job में इसलिए fail नहीं होते कि वे intelligent नहीं हैं। वे इसलिए struggle करते हैं क्योंकि उन्हें real work culture कभी दिखाया ही नहीं गया। Company में कैसे बात करनी है, customer कैसे संभालना है, deadline क्या होती है, team में काम कैसे होता है, ये सब किताबों से नहीं आता।


5. Private Sector, Entrepreneurship और AI की भूमिका

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Companies

अब private sector की responsibility भी आती है। अगर companies skilled workers चाहती हैं, तो उन्हें training pipeline बनाने में हिस्सेदारी करनी पड़ेगी। सिर्फ यह कहना काफी नहीं कि employable candidates नहीं मिलते। Companies को internship, apprenticeship और entry-level training models में invest करना होगा। Government policy framework दे सकती है, subsidy दे सकती है, DBT दे सकती है, लेकिन actual jobs market से ही निकलेंगी। Educational institutions को भी अपनी सोच बदलनी पड़ेगी। College का काम सिर्फ degree देना नहीं, student को work-ready बनाना भी है। अगर syllabus outdated है, faculty industry से disconnected है और placement सिर्फ कागजों में है, तो youth का भरोसा टूटेगा।

Entrepreneurship और लोन से आगे की सोच

एक और बड़ा angle entrepreneurship है। हर youth नौकरी नहीं करेगा, और हर जगह नौकरी available भी नहीं होगी। अगर छोटे loan, mentoring और market access मिले, तो बहुत से युवा local business शुरू कर सकते हैं। लेकिन loan अकेला solution नहीं है। Business शुरू करने के लिए accounting, customer dealing, digital payment, marketing और basic compliance भी आना चाहिए। वरना loan भी नया बोझ बन सकता है।

AI Era में युवाओं के अवसर और चुनौतियां

अब AI की entry इस story को और serious बना देती है। आने वाले years में routine jobs पर pressure बढ़ सकता है। जो youth पहले से skill system से बाहर है, वह AI economy में और पीछे छूट सकता है। लेकिन सही training मिले, तो वही youth AI tools से ज्यादा productive भी बन सकता है। एक छोटा दुकानदार digital inventory सीख सकता है। एक rural student online services दे सकता है। एक लड़की घर से design, accounting या support work कर सकती है। लेकिन यह तभी होगा जब technology access, language support और practical training मिले। सिर्फ app launch कर देने से youth skilled नहीं बनता।


6. विकसित भारत 2047, व्यवस्था का बदलाव और निष्कर्ष

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population

अब विकसित भारत 2047 की बात करें। यह सपना सिर्फ highways, factories और GDP numbers से पूरा नहीं होगा। 2047 तक developed economy बनने के लिए India को productive, confident और skilled youth चाहिए। करोड़ों disconnected youth के साथ यह journey मुश्किल हो जाएगी। लेकिन इस story में hope भी है। क्योंकि 8.7 करोड़ का figure डराता जरूर है, पर यह एक hidden opportunity भी दिखाता है। अगर इन युवाओं को सही direction मिल जाए, तो यह population burden नहीं, भारत की सबसे बड़ी growth engine बन सकती है।

सर्टिफिकेट नहीं, आय और सम्मान की जरूरत

असल बात यह है कि youth को blame करने से कुछ नहीं बदलेगा। System को bridge बनाना पड़ेगा, lecture नहीं। Education, training और employment को अलग-अलग islands की तरह नहीं, एक connected road की तरह design करना होगा। School से ही vocational exposure, college में practical projects, training में financial support और industry में real entry points बनाने होंगे। सबसे जरूरी बात, skill program की success certificate count से नहीं मापी जानी चाहिए। असली सवाल होना चाहिए, training के बाद youth की income बढ़ी या नहीं? अगर कोई course पूरा करके भी घर बैठा है, तो program successful नहीं है। अगर youth को dignified work मिला है, तभी बदलाव असली है।

युवा का इंतजार और अंतिम सवाल

अब शुरुआत वाले सवाल पर लौटते हैं। 8.7 करोड़ युवा आखिर कर क्या रहे हैं? जवाब है, बहुत से youth waiting में हैं। वे opportunity का इंतजार कर रहे हैं, affordable training का इंतजार कर रहे हैं, family pressure से निकलने का इंतजार कर रहे हैं, और एक fair chance का इंतजार कर रहे हैं। भारत के लिए challenge यही है कि यह इंतजार बहुत लंबा न हो जाए। क्योंकि youth का समय लौटकर नहीं आता। अब आने वाले समय में देखने वाली बात यह होगी कि skilling policies सिर्फ announcement बनती हैं या सच में local level पर jobs और income में बदलती हैं। आपको क्या लगता है, भारत की सबसे बड़ी problem बेरोजगारी है, skill gap है, या education system का market से disconnect? Comment में अपनी राय जरूर बताइए। भारत दुनिया का सबसे युवा देश कहलाता है, लेकिन सोचिए… इसी देश में 15 से 29 साल के करीब 8.7 करोड़ युवा न पढ़ रहे हैं, न नौकरी कर रहे हैं, न कोई skill training ले रहे हैं। नीति आयोग की रिपोर्ट इन्हें NEET category कहती है। यानी Not in Education, Employment, or Training. सुनने में यह आलस जैसा लगता है, लेकिन असली कहानी कहीं ज्यादा डराने वाली है। बहुत से युवा गरीब परिवारों से आते हैं। पढ़ाई और tuition पर पहले ही पैसा खत्म हो जाता है। Graduation के बाद skill course करने की ताकत नहीं बचती। और twist यह है कि degree होने के बाद भी सिर्फ 8.25% graduates अपनी पढ़ाई के हिसाब से काम कर रहे हैं। बाकी या तो कम level jobs में फंस जाते हैं, या सिस्टम से बाहर हो जाते हैं। सबसे ज्यादा असर महिलाओं और rural youth पर दिखता है। घर की जिम्मेदारी, safety, local jobs की कमी और training centers की दूरी… और यहीं सवाल खड़ा होता है कि यह demographic dividend मौका बनेगा या crisis? पूरी सच्चाई जानने के लिए description में दिए लिंक पर क्लिक कर अभी पूरी वीडियो देखें।!

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