Silver से सबक लें — 1980 के स्कैम के बाद अब विजय केडिया की समझदारी बचा सकती है आपका निवेश!

ज़रा सोचिए… अगर कल सुबह आप उठें और पता चले कि जिस चीज़ में आपने अपनी मेहनत की पूरी कमाई लगा दी — उसकी कीमत रातों-रात 80% गिर गई है। वो सपना, जो आपको अमीर बना सकता था, अब एक बुरे ख्वाब में बदल चुका है। ऐसा ही हुआ था 1980 में — जब दुनिया भर के Investor अपनी ज़िंदगी की सबसे बड़ी गलती कर बैठे थे।

Silver की कीमतें आसमान छू रही थीं, और हर कोई “जल्दी अमीर बनने” की दौड़ में पागल हो चुका था। लेकिन फिर आई एक ऐसी गुरुवार सुबह — जिसे इतिहास ने नाम दिया “Silver Thursday”। उस दिन अरबपति मिट्टी में मिल गए, बैंक डूब गए, और करोड़ों लोग बर्बाद हो गए। और अब, चार दशक बाद, मार्केट के दिग्गज विजय केडिया ने फिर चेतावनी दी है — “इतिहास खुद को दोहरा सकता है…”

विजय केडिया — ये नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं। एक ऐसा इन्वेस्टर जिसने महज़ 17 साल की उम्र में शेयर मार्केट में कदम रखा, और अपनी समझ से करोड़ों नहीं, अरबों बनाए। लेकिन आज वही केडिया, जिनकी नज़रे बाजार की हर चाल को पढ़ लेती हैं, कह रहे हैं — “Silver और सोने में अब लालच मत करो।” क्यों? क्योंकि वो जानते हैं कि हर बुल मार्केट के नीचे छिपा होता है एक साइलेंट स्कैम।

उन्होंने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा, “लोग भूल जाते हैं… भूल जाते हैं कि 1980 में क्या हुआ था।” उन्होंने साफ़ कहा कि उन्हें खुद चांदी के ETF और गोल्ड बॉन्ड्स में हिस्सेदारी है, लेकिन वो मौजूदा प्राइस पर एक रुपये का भी नया Investment नहीं करना चाहते। क्यों? क्योंकि उन्हें मार्केट में वही फोमो दिख रहा है, वही ‘Fear of Missing Out’, जो चार दशक पहले तब दिखा था जब Hunt Brothers ने दुनिया की एक तिहाई Silver खरीद ली थी।

विजय केडिया ने कहा, “बुलियन मार्केट में भी अब लोग शेयर मार्केट वाला पागलपन लेकर आ गए हैं। सबको डर है कि कहीं मौका छूट न जाए।” लेकिन वो चेतावनी देते हैं — जब सब खरीद रहे हों, तब थोड़ा ठहर जाना ही असली समझदारी होती है। अब चलिए, लौटते हैं उस कहानी पर जिसे खुद केडिया ने याद दिलाया — 1980 का सिल्वर स्कैम।

70 का दशक था, जब अमेरिका में डॉलर की कीमत गिर रही थी। तेल के अरबपति भाई — नेल्सन बंकर हंट और विलियम हंट — को डर था कि डॉलर अब भरोसेमंद नहीं रहा। उन्होंने सोचा कि अगर कागज़ का पैसा बेकार हो जाएगा, तो असली पैसा होगा — Silver। उन्होंने बैंक से कर्ज़ लिया, साथियों को जोड़ा, और दुनिया भर से चांदी खरीदनी शुरू कर दी। हालत ये हो गई कि दुनिया की एक-तिहाई सिल्वर सिर्फ दो लोगों के पास थी। मार्केट में Silver का तूफान आया, और कीमत 1.5 dollar प्रति औंस से बढ़कर 1980 में 50 dollar प्रति औंस हो गई। हर कोई यही सोच रहा था कि जो अभी नहीं खरीदेगा, वो जिंदगी भर पछताएगा।

लेकिन फिर — 27 मार्च 1980। एक तारीख जो वॉल स्ट्रीट के इतिहास में खून से लिखी गई। सरकार ने जब देखा कि मार्केट अनियंत्रित हो गया है, तो “Sell Only Rule” लागू कर दिया — मतलब अब सिर्फ बेचना है, खरीद नहीं। बैंक ने हंट ब्रदर्स से लोन वापस मांगे, लेकिन उनके पास पैसे नहीं थे। और फिर वो हुआ जो आज केडिया याद दिला रहे हैं — Silver 50 dollar से गिरकर 10 dollar पर आ गई। सिर्फ कुछ हफ्तों में 80% गिरावट।

वो लोग जो रातों में अपने ETF की कीमतें देखकर मुस्कुरा रहे थे, अगले ही दिन कर्ज़ में डूब गए। विजय केडिया कहते हैं — “लोग ये समझते हैं कि सोना और Silver एक ही चीज़ हैं, लेकिन ये सबसे बड़ी भूल है।”

उन्होंने बताया कि जहाँ सोना पिछले 40 सालों में रुपये के हिसाब से 10 गुना तक बढ़ा है, वहीं Silver आज भी 1980 के लेवल को पूरी तरह नहीं पकड़ पाई। सोचिए, चार दशक — और अब जाकर वो फिर उसी कीमत के आसपास पहुंची है। यानी जिन्होंने 1980 में टॉप पर खरीदा था, उनका पैसा अब जाकर बराबर हुआ है। अब सवाल है — क्या फिर से वैसा कुछ हो सकता है?केडिया कहते हैं, “हाँ, बिल्कुल हो सकता है, अगर लोग लालच में आँखें बंद कर दें।”

आज सोशल मीडिया, न्यूज चैनल्स, यूट्यूब — हर जगह Silver का हाइप चल रहा है। लोग कह रहे हैं कि सिल्वर इंडस्ट्रियल यूज़ में बढ़ेगी, इलेक्ट्रिक कारों और सोलर पैनल्स में इसकी मांग बढ़ेगी। ये सब सही है, लेकिन केडिया कहते हैं — “सही बातें भी तब खतरनाक हो जाती हैं, जब वो अंधी उम्मीद बन जाएं।”

वो मानते हैं कि सोना और Silver दोनों की अपनी जगह है — लेकिन Investment में समझदारी सिर्फ ये नहीं कि कौन-सा मेटल खरीदा जाए, बल्कि कब खरीदा जाए, कितना खरीदा जाए, और किसलिए खरीदा जाए।क्योंकि हर बुल रन का एक अंत होता है। हर हाइप एक दिन फुस्स हो जाता है।और हर चमकती चीज़ सोना नहीं होती।

विजय केडिया खुद मानते हैं कि शेयर मार्केट में उनका रिटर्न पिछले एक साल से स्थिर है, लेकिन वो संतुष्ट हैं। क्योंकि वो जानते हैं — स्टॉक मार्केट में सब्र ही सबसे बड़ा मुनाफ़ा देता है। उन्होंने कहा, “लोग सोचते हैं कि ETF या बुलियन में पैसा सेफ है। लेकिन सच ये है कि असली सेफ्टी उस चीज़ में है, जिसे आप समझते हैं।”केडिया का ये बयान सिर्फ एक चेतावनी नहीं, बल्कि एक सबक है — कि मार्केट कभी भी आपके हिसाब से नहीं चलता। वो उस भीड़ के हिसाब से चलता है, जो लालच और डर के बीच झूलती रहती है।

उन्होंने कहा — “अगले 5 से 6 महीने धैर्य रखिए। लार्जकैप्स में मौके बन रहे हैं, और जब अर्थव्यवस्था रफ्तार पकड़ेगी, तो मिडकैप और स्मॉलकैप फिर से उड़ान भरेंगे।” यानि, अभी फोमो में आकर अपने पोर्टफोलियो को “शाइनी ट्रैप” में मत डालिए।

अब ज़रा सोचिए — अगर आज आप 80,000 की दर पर एक किलो Silver खरीदते हैं, और कल उसकी कीमत 60,000 हो जाती है, तो क्या आप उसे होल्ड कर पाएंगे? ज़्यादातर लोग नहीं कर पाएंगे — क्योंकि लोग Investment नहीं करते, “ट्रेंड” फॉलो करते हैं। केडिया इसी ट्रेंड के खिलाफ़ बोलते हैं।

1980 में हंट ब्रदर्स ने जो किया था, वो असल में एक साइकोलॉजिकल ट्रैप था — “मिस करने का डर”। वो डर आज फिर लौट आया है — इस बार ETF के रूप में, सोशल मीडिया के वायरल पोस्ट्स के रूप में, और “गोल्ड-सिल्वर रैली” के नारे के रूप में। लेकिन फर्क ये है कि आज का मार्केट डिजिटल है, हाइप तेज़ी से फैलता है, और गिरावट उससे भी तेज़ी से आती है।एक ट्वीट, एक हेडलाइन, या एक रिपोर्ट — और Silver का चार्ट बदल सकता है।

केडिया का अनुभव यही कहता है — “बाज़ार हमेशा सही होता है, इंसान नहीं।” वो कहते हैं, “जब हर कोई खरीदने की बात कर रहा हो, तब बेचने वाला ही समझदार होता है।” अब बात करें कि हंट ब्रदर्स का वो सिल्वर स्कैम कैसे खत्म हुआ। जब उन्होंने कर्ज़ चुकाने के लिए अपनी होल्डिंग्स बेचीं, तो कीमतें और गिरीं। उनके पास 100 मिलियन औंस से ज़्यादा चांदी थी। वो अरबपति थे, लेकिन उस क्रैश ने उन्हें कर्ज़दार बना दिया।

उनका इतना नुकसान हुआ कि अमेरिका के फाइनेंशियल सिस्टम को संभालने के लिए फेडरल रिज़र्व को हस्तक्षेप करना पड़ा। कुछ बैंक तो डूबने के कगार पर आ गए। और उसके बाद से दुनिया भर के एक्सचेंजों ने पोज़िशन लिमिट्स और मार्जिन कंट्रोल्स को सख्त कर दिया — ताकि कोई भी इंसान या ग्रुप फिर से मार्केट को “कैप्चर” न कर सके।

आज, चार दशक बाद, जब हम डिजिटल युग में हैं, तो वही कहानी “डिजिटल रूप” में दोहराई जा सकती है। अब मार्केट में “इंफ्लुएंसर इन्वेस्टिंग” है — जहां यूट्यूब, ट्विटर और टेलीग्राम चैनल लोगों के भरोसे से खेलते हैं। हर कोई एक नया “सिल्वर बूम” दिखाता है, चार्ट्स और ग्राफ्स दिखाकर बताता है कि Silver 100 डॉलर जाएगी। लेकिन कोई ये नहीं बताता कि रास्ते में कितने लोग डूबेंगे।

विजय केडिया का कहना है — “मार्केट में सबसे खतरनाक चीज़ है ‘अधूरा ज्ञान’। वो आपको आत्मविश्वास देता है, लेकिन सुरक्षा नहीं।”वो खुद अपने अनुभव से जानते हैं कि मार्केट में भावनाएँ सबसे बड़ा दुश्मन होती हैं। उन्होंने कहा था, “अगर आप डर में बेचते हैं या लालच में खरीदते हैं, तो आपने पहले ही हार मान ली।”

आज के Investor को याद रखना चाहिए कि मार्केट एक मैराथन है, स्प्रिंट नहीं। Silver या सोने की कीमतें बढ़ेंगी या गिरेंगी — ये कोई नहीं जानता। लेकिन इतना तय है कि “इतिहास हमेशा उन लोगों को सज़ा देता है जो उसे भूल जाते हैं।” और यही इस कहानी की आत्मा है — विजय केडिया हमें 1980 का सबक याद दिला रहे हैं। वो कह रहे हैं — “जो गिरावट में भी शांत रह सके, वही मार्केट में जिंदा रहता है।”

उनके मुताबिक, अभी भारत की इकॉनमी अपने सबसे मजबूत दौर में है — इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, बैंकिंग, टेक्नोलॉजी — सबमें अपसाइड है। ऐसे में अगर Investor सिर्फ मेटल्स के पीछे भागेंगे, तो वो असली ग्रोथ को मिस कर देंगे। वो मानते हैं कि “इंडिया की रियल वेल्थ क्रिएशन इक्विटीज़ में होगी, न कि बुलियन में।”

अब सवाल ये भी उठता है — क्या सिल्वर ETF वाकई रिस्की हैं? ETF एक एक्सचेंज ट्रेडेड फंड होता है, जो Silver या सोने के प्राइस को ट्रैक करता है। लोग सोचते हैं कि ये सेफ है, क्योंकि इसे फिजिकल रूप में स्टोर करने की झंझट नहीं।

लेकिन जब मार्केट क्रैश करता है, तो ETF भी उसी स्पीड से गिरता है। और सबसे बड़ी बात — इसमें “इमोशनली अटैच्ड” होना आसान है, क्योंकि खरीद-बेच सिर्फ एक क्लिक पर हो जाती है। यानी, लालच भी तेज़ी से बढ़ता है, और डर भी। विजय केडिया का सुझाव साफ़ है — “जो चीज़ आप समझते नहीं, उसमें मत पड़िए। और अगर पड़ गए हैं, तो प्लान बना कर चलिए — एक्ज़िट कब करना है, ये पहले से तय कीजिए।”

उन्होंने मज़ाक में कहा था, “मार्केट में दो तरह के लोग हैं — जो सीखते हैं और जो सिखाते हैं। लेकिन दोनों का टीचर ‘मार्केट’ ही होता है।”उनका कहना है कि आज का समय भावनाओं से नहीं, बैलेंस से चलने का है। थोड़ा सोना, थोड़ा सिल्वर — लेकिन ज़्यादा भरोसा शेयरों और बिजनेस ग्रोथ पर।

अब अगर आप सोच रहे हैं कि “तो क्या सिल्वर में बिल्कुल नहीं लगाना चाहिए?” तो जवाब है — लगाइए, लेकिन उतना ही जितना खोने पर नींद न उड़े। क्योंकि मार्केट में एक पुरानी कहावत है — “Don’t put all your eggs in one basket.”

यानी अपने सारे अंडे एक ही टोकरी में मत रखिए। विजय केडिया की कहानी खुद इस फिलॉसफी की मिसाल है। उन्होंने कभी भी एक सेक्टर या एक कंपनी पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं किया। वो हमेशा डाइवर्सिफाई करते रहे, और इसलिए वो हर गिरावट से और मज़बूत होकर लौटे।

Conclusion

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