Shadab Jakati की प्रेरक यात्रा — बिस्कुट से बुर्ज खलीफा तक का जादुई सफर I 2025

ज़रा सोचिए… एक दिन आप सड़क पर चलते हुए एक छोटा सा वीडियो बनाते हैं। न कोई बड़ा कैमरा, न कोई टीम, न कोई स्पॉन्सर। बस आप, आपकी सच्ची मुस्कान और मोबाइल का कैमरा। और कुछ ही महीनों बाद वही वीडियो आपकी किस्मत पलट देता है — इतना कि आपको दुबई के बुर्ज खलीफा जैसी दुनिया की सबसे ऊंची इमारत में 10 करोड़ रुपये का लग्ज़री फ्लैट गिफ्ट कर दिया जाता है। यह सुनने में किसी बॉलीवुड फिल्म की कहानी लगती है, लेकिन यह एक सच्ची कहानी है — मेरठ के Shadab Jakati की। एक ऐसे आम इंसान की, जिसने किसी गॉडफादर, किसी मार्केटिंग एजेंसी, या किसी फेक शोहरत के बिना, सिर्फ अपनी सच्चाई और सादगी से दुनिया का दिल जीत लिया।

Shadab Jakati की कहानी किसी फैंटेसी या चमत्कार से कम नहीं है। आज जब हर दूसरा व्यक्ति वायरल होने के लिए ट्रेंड फॉलो कर रहा है, एडिटिंग में घंटों लगा रहा है, और सोशल मीडिया एल्गोरिद्म की गणित में उलझा है — वहीं, Shadab Jakati ने साबित किया कि कभी-कभी “रियल” ही सबसे ज्यादा “वायरल” होता है। उन्होंने ना तो किसी सेट पर शूट किया, ना किसी बड़े सेलिब्रिटी को बुलाया। उनके पास सिर्फ एक चीज़ थी — रियल कंटेंट। और यही उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी।

Shadab Jakati का जन्म उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में हुआ। एक ऐसा शहर जो अपनी पुरानी गलियों, तंग बाजारों और मिट्टी की खुशबू के लिए जाना जाता है। लेकिन वहीं से निकलकर किसी का बुर्ज खलीफा तक पहुंच जाना, वो भी कंटेंट क्रिएशन के दम पर — यह अपने आप में मिसाल है। शादाब का बचपन बेहद सामान्य रहा। उनके पिता सरकारी नौकरी में नहीं थे, न ही कोई बड़ी जायदाद थी। घर में बस यही सिखाया गया था — “जो भी करो, ईमानदारी से करो।” यही ईमानदारी आगे चलकर उनकी पहचान बनी।

स्कूल के दिनों में Shadab Jakati बहुत बातूनी थे। उन्हें लोगों को हँसाना, मिमिक्री करना और कहानियाँ सुनाना पसंद था। उनके टीचर्स कहते थे — “यह लड़का कुछ अलग करेगा।” लेकिन उस वक्त सोशल मीडिया जैसा कोई प्लेटफॉर्म नहीं था, जहां एक आम इंसान अपनी प्रतिभा दिखा सके। ज़िंदगी धीरे-धीरे अपने रास्ते पर बढ़ती गई, जिम्मेदारियाँ बढ़ीं, और सपने पीछे छूटते गए।

लेकिन फिर एक दिन, जैसे किस्मत ने दरवाज़ा खटखटाया। 2019 में उन्होंने टिकटॉक पर छोटे वीडियो बनाना शुरू किया। वो किसी सेलिब्रिटी बनने के लिए नहीं, बस मनोरंजन के लिए करते थे। उनके वीडियो में किसी ग्लैमर की कोशिश नहीं होती थी — बस रोज़मर्रा की बातें, आम लोगों की मुस्कान और एक देसी ह्यूमर। धीरे-धीरे उनके वीडियो पसंद किए जाने लगे। लोग कहते — “ये लड़का दिल से बोलता है।” और यही वो तारीफ़ थी जिसने उन्हें आगे बढ़ने का हौसला दिया।

फिर आया वो वक्त जब टिकटॉक बैन हो गया। बहुत से क्रिएटर्स टूट गए, लेकिन Shadab Jakati नहीं। उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने कहा — “प्लेटफॉर्म कोई भी हो, मेहनत कभी बेकार नहीं जाती।” और वो इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर शिफ्ट हो गए। शुरुआत में मुश्किलें आईं। व्यूज़ नहीं आते थे, वीडियो पर सिर्फ कुछ लाइक और दो-चार कमेंट्स। लेकिन शादाब ने हार नहीं मानी। वो रोज़ एक नया वीडियो बनाते, अपने अंदाज़ में — सादा, लेकिन दिल से।

धीरे-धीरे लोगों ने उनकी सच्चाई को महसूस करना शुरू किया। उनके वीडियो किसी ‘एक्टिंग’ जैसे नहीं लगते थे, बल्कि ज़िंदगी के करीब लगते थे। और फिर आया वो पल जिसने सब कुछ बदल दिया — “10 रुपये वाला बिस्कुट” वाला वीडियो।

एक छोटी सी रील, जिसमें शादाब एक लड़की से पूछते हैं— “बहन जी, 10 रुपये वाला बिस्कुट कितने का है?” बस इतना सा सवाल, और Shadab Jakati का चुटीला जवाब। कोई एडिटिंग नहीं, कोई डायलॉग नहीं — बस सच्चाई और ह्यूमर। यही वीडियो इंटरनेट पर धूम मचा गया। कुछ ही दिनों में लाखों लोग इसे शेयर करने लगे। लोग हँसते थे, लेकिन साथ ही कहते — “यार, ये बंदा सच्चा है।” यही “सच्चाई” उन्हें भीड़ से अलग बनाती गई।

उस वीडियो ने शादाब को वायरल स्टार बना दिया। पहले व्यूज़ लाखों में गए, फिर करोड़ों में। हर प्लेटफॉर्म पर उनके फॉलोअर्स तेजी से बढ़ने लगे। लोगों ने उनके वीडियो को “रियल इंडिया का असली चेहरा” कहा। बड़ी-बड़ी ब्रांड्स ने उनसे संपर्क करना शुरू कर दिया। लेकिन Shadab Jakati वही रहे — सिंपल, विनम्र, और जमीन से जुड़े हुए।

धीरे-धीरे उनकी लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि रैपर बादशाह ने उनके एक वीडियो की नकल करते हुए खुद एक रील बनाई। वही रील सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगी और Shadab Jakati का नाम अब बॉलीवुड के गलियारों में भी गूंजने लगा। क्रिकेटर रिंकू सिंह जैसे खिलाड़ी भी उनके साथ वीडियो बनाने लगे। हर कोई इस ‘साधारण आदमी’ की असाधारण सफलता पर हैरान था। लेकिन असली चमत्कार अभी बाकी था।

एक दिन दुबई के मशहूर कारोबारी जमजम ब्रदर्स — जो इलेक्ट्रॉनिक्स और परफ्यूम बिजनेस में बहुत बड़ा नाम रखते हैं, उन्होंने Shadab Jakati का वीडियो देखा। उन्हें Shadab Jakati की सादगी और सकारात्मकता इतनी पसंद आई कि उन्होंने खुद उनसे संपर्क किया। और फिर हुआ वो जो किसी ने सोचा भी नहीं था — उन्होंने कहा, “भाई, हम आपको बुर्ज खलीफा में फ्लैट गिफ्ट करना चाहते हैं।”

पहले तो Shadab Jakati को विश्वास ही नहीं हुआ। उन्हें लगा कोई मजाक कर रहा है। लेकिन जब उन्होंने फ्लाइट टिकट देखी, जब वो दुबई पहुंचे, और जब उन्हें बुर्ज खलीफा के सामने खड़ा देखा — वो पल उनके लिए किसी सपने से कम नहीं था।

वो फ्लैट कोई आम अपार्टमेंट नहीं था। वो समुद्र की ओर देखने वाला सी-फेसिंग लग्ज़री फ्लैट था — जिसकी कीमत 10 करोड़ रुपये थी। जमजम ब्रदर्स ने कहा, “Shadab Jakati ने हमें दिखाया कि असली स्टार वही है जो सच्चाई से लोगों का दिल जीते।”

उस पल Shadab Jakati की आंखों में आंसू थे। उन्होंने कहा — “मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मेरे जैसे आम आदमी के लिए बुर्ज खलीफा के दरवाजे खुलेंगे। यह मेरे लिए नहीं, बल्कि उन लाखों छोटे शहरों के युवाओं के लिए है जो मानते हैं कि सपने सिर्फ अमीरों के लिए होते हैं।”

आज Shadab Jakati के इंस्टाग्राम पर लाखों फॉलोअर्स हैं। उनके वीडियो में ना तो ओवरएक्टिंग होती है, ना किसी तरह की दिखावेबाज़ी। वो अभी भी उसी स्टाइल में वीडियो बनाते हैं जैसे पहले — सड़कों पर, दुकानों पर, और आम लोगों के बीच। लोग उन्हें “रील्स का अमिताभ बच्चन” कहते हैं, लेकिन वो खुद को “लोगों का भाई” कहते हैं। शादाब की कहानी यह सिखाती है कि सोशल मीडिया सिर्फ लाइक्स और फॉलोअर्स का खेल नहीं है, बल्कि “कनेक्शन” का माध्यम है। अगर आपकी बात दिल से निकले, तो वो करोड़ों लोगों तक पहुंचती है।

उनकी सफलता इस बात का सबूत है कि आज भी सच्चाई बिकती है, बस उसे पैक करने की जरूरत नहीं। और यही वजह है कि जब लाखों कंटेंट क्रिएटर्स ट्रेंड्स के पीछे भाग रहे हैं, Shadab Jakati अपने दिल की सुनते हैं। वो किसी हैशटैग का हिस्सा नहीं बनना चाहते — वो खुद एक हैशटैग हैं: #RealContent। आज जब वो बुर्ज खलीफा की 148वीं मंज़िल की बालकनी से दुबई की रात देखते हैं, तो उन्हें मेरठ की गलियों की मिट्टी याद आती है। वहां से उठकर यहां तक पहुंचना, यह सिर्फ उनकी जीत नहीं, बल्कि उन सभी सपनों की जीत है जो छोटे घरों में पलते हैं, लेकिन दिल में आसमान समेटे रहते हैं।

Shadab Jakati कहते हैं — “लोग सोचते हैं कि किस्मत ने साथ दिया। पर मैं कहता हूँ — नहीं, लोगों ने साथ दिया। क्योंकि मैंने हमेशा लोगों की हंसी को अपनी मेहनत बनाया।” आज बुर्ज खलीफा की ऊंचाई से उनकी मुस्कान बता रही है — कि सपनों की कोई ऊंचाई नहीं होती, और सादगी से बढ़कर कोई ताकत नहीं। 10 रुपये के बिस्कुट से 10 करोड़ के फ्लैट तक का सफर, Shadab Jakati की कहानी हर उस इंसान के लिए सबक है जो सोचता है कि “मेरे जैसे लोग कुछ बड़ा नहीं कर सकते।” क्योंकि हकीकत यही है — अगर आपकी नीयत साफ है, तो दुनिया की सबसे ऊंची इमारत भी आपके लिए झुक सकती है।

Conclusion

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