नमस्कार दोस्तों, अगर आप भी ऑनलाइन फूड डिलीवरी के शौकीन हैं तो आपके लिए एक बड़ी खबर है। अब तक फूड डिलीवरी के क्षेत्र में स्विगी और जोमैटो का दबदबा रहा है, लेकिन अब इस खेल में एक नया खिलाड़ी उतरने वाला है। राइड-शेयरिंग ऐप रैपिडो ने ऑनलाइन फूड डिलीवरी के कारोबार में उतरने का फैसला किया है।
Rapido अब इस बाजार में स्विगी और जोमैटो की बादशाहत को सीधी चुनौती देने के लिए पूरी तरह तैयार है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Rapido ने इस दिशा में बड़े स्तर पर काम करना शुरू कर दिया है। कंपनी ने रेस्तरां मालिकों से संपर्क करना शुरू कर दिया है और एक नई रणनीति पर काम कर रही है, जिससे स्विगी और जोमैटो की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
Rapido का ये फैसला ऑनलाइन फूड डिलीवरी के पूरे इकोसिस्टम को हिला सकता है। स्विगी और जोमैटो, जो अब तक इस बाजार पर अपना एकाधिकार बनाए हुए थे, अब उन्हें कड़ी Competition का सामना करना पड़ेगा। दिलचस्प बात यह है कि रैपिडो पहले से ही देश के 100 से ज्यादा शहरों में अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुका है। बाइक और ऑटो राइड शेयरिंग के बाद अब फूड डिलीवरी के कारोबार में एंट्री करने के फैसले से कंपनी का विस्तार और अधिक तेजी से होगा। आज हम इसी विषय पर गहराई में चर्चा करेंगे।
रैपिडो ने अपनी शुरुआत साल 2015 में एक बाइक-टैक्सी सेवा के रूप में की थी। उस समय यह एक नया और अनोखा कॉन्सेप्ट था, लेकिन धीरे-धीरे लोगों ने इसे अपनाना शुरू किया और रैपिडो को बड़ा फायदा हुआ। कम किराए और तेज सर्विस के चलते Rapido की लोकप्रियता बढ़ने लगी। कंपनी ने धीरे-धीरे अपनी सेवाओं का विस्तार किया और बाइक टैक्सी के बाद ऑटो और कार की सुविधा भी देनी शुरू की। अब कंपनी फूड डिलीवरी के क्षेत्र में उतरने जा रही है, जिससे कंपनी का रेवेन्यू मॉडल और मजबूत होगा।
फूड डिलीवरी के लिए Rapido ने एक अलग रणनीति बनाई है। कंपनी फिलहाल रेस्तरां मालिकों से संपर्क कर रही है और एक ऐसा मॉडल तैयार कर रही है, जिसमें कमीशन स्ट्रक्चर को कम रखा जाएगा। जोमैटो और स्विगी रेस्तरां से हर ऑर्डर पर भारी कमीशन वसूलते हैं, जिसकी वजह से रेस्तरां मालिकों का मुनाफा कम हो जाता है। Rapido इस कमीशन को कम करने का वादा कर रही है, जिससे रेस्तरां मालिकों को ज्यादा मुनाफा होगा। इससे स्विगी और जोमैटो को सीधी चुनौती मिलेगी, क्योंकि रेस्तरां मालिक ज्यादा मुनाफे के लिए Rapido का रुख कर सकते हैं।
स्विगी और जोमैटो का कमीशन मॉडल 25 से 30% के बीच होता है। यानी अगर कोई ग्राहक 500 रुपये का खाना ऑर्डर करता है, तो स्विगी या जोमैटो इसमें से 125 से 150 रुपये कमीशन के रूप में ले लेते हैं। इससे रेस्तरां मालिकों को सिर्फ 350 से 375 रुपये ही मिलते हैं। इसके अलावा, डिलीवरी चार्ज और अन्य टैक्स भी अलग से लगते हैं। Rapido इस कमीशन स्ट्रक्चर को 10 से 15% के बीच रखने की योजना बना रही है। यानी रेस्तरां मालिकों को हर ऑर्डर पर ज्यादा मुनाफा होगा।
Rapido का ये कदम इसलिए भी बड़ा है क्योंकि कंपनी पहले से ही एक मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क बना चुकी है। कंपनी के पास हजारों की संख्या में बाइक और ऑटो पहले से ही मौजूद हैं। Rapido के पास देश के अलग-अलग हिस्सों में करीब 10 लाख से ज्यादा राइडर्स हैं, जो पहले से ही बाइक टैक्सी और ऑटो सेवा में काम कर रहे हैं। ऐसे में कंपनी को नए डिलीवरी बॉय की जरूरत नहीं होगी। कंपनी के मौजूदा राइडर्स को ही फूड डिलीवरी के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। इससे कंपनी का खर्च भी कम होगा और सर्विस भी तेजी से होगी।
रैपिडो के सह-संस्थापक पवन गुंटूपल्ली ने कहा कि कंपनी की योजना अगले दो सालों में, अपनी सेवाओं का विस्तार देश के 500 शहरों में करने की है। वर्तमान में कंपनी 100 से ज्यादा शहरों में मौजूद है। कंपनी हर दिन लगभग 33 लाख लोगों को राइड शेयरिंग की सुविधा दे रही है। इनमें से 50% से ज्यादा सवारियां बाइक टैक्सी से हो रही हैं। करीब 40% ऑटो सेवा के जरिए होती हैं और बाकी कैब से। Rapido इस नेटवर्क का इस्तेमाल फूड डिलीवरी के लिए करने जा रही है, जिससे उसे बहुत बड़ा फायदा हो सकता है।
इसके अलावा, रैपिडो ने इस नई योजना के तहत अपने ऐप में भी कई बदलाव किए हैं। कंपनी ने फूड डिलीवरी के लिए एक अलग सेक्शन तैयार किया है। ग्राहक Rapido ऐप के जरिए ही अपने नजदीकी रेस्तरां से खाना ऑर्डर कर सकेंगे। फूड डिलीवरी के लिए रैपिडो ने खास तरह के पैकेजिंग बॉक्स तैयार किए हैं, जो खाना गर्म रखने के साथ-साथ उसकी गुणवत्ता को भी बनाए रखेंगे।
स्विगी और जोमैटो के पास पहले से ही एक बड़ा ग्राहक आधार मौजूद है। स्विगी के पास 3 करोड़ से ज्यादा ग्राहक हैं, वहीं जोमैटो के पास भी 2.5 करोड़ से ज्यादा ग्राहक हैं। इसके अलावा, दोनों कंपनियों के पास देशभर में 50,000 से ज्यादा रेस्तरां जुड़े हुए हैं। रैपिडो को इन दोनों कंपनियों से सीधी टक्कर मिलेगी, लेकिन कंपनी की रणनीति अलग है। Rapido ने कमीशन को कम रखने के साथ-साथ डिलीवरी की स्पीड पर भी ध्यान दिया है। कंपनी का दावा है कि वह 20 मिनट के अंदर फूड डिलीवरी करने का टारगेट लेकर चल रही है।
इसके अलावा, रैपिडो की इस रणनीति का असर स्विगी और जोमैटो के शेयरों पर भी पड़ सकता है। Investors को डर है कि अगर Rapido ने बाजार में अपनी पकड़ मजबूत कर ली तो स्विगी और जोमैटो की कमाई में भारी गिरावट आ सकती है। इसके अलावा, रेस्तरां मालिक भी ज्यादा मुनाफे के लिए स्विगी और जोमैटो की जगह Rapido को तवज्जो दे सकते हैं।
रैपिडो के इस कदम का असर ग्राहकों पर भी पड़ेगा। ग्राहकों को फूड डिलीवरी पर कम डिलीवरी चार्ज देना पड़ सकता है। इसके अलावा, डिस्काउंट और ऑफर्स भी ज्यादा मिल सकते हैं। रैपिडो की कम लागत वाली रणनीति से ग्राहकों को फायदा होगा।
हालांकि, स्विगी और जोमैटो के लिए यह खतरे की घंटी है। दोनों कंपनियों ने पिछले कुछ सालों में फूड डिलीवरी के कारोबार को पूरी तरह से अपने कब्जे में कर रखा था। लेकिन अब रैपिडो के आने से इस बाजार में जबरदस्त Competition देखने को मिलेगी। ग्राहकों के लिए यह अच्छी खबर है क्योंकि Competition बढ़ने से सर्विस बेहतर होगी और कीमतें कम हो सकती हैं।
रैपिडो का यह फैसला भारतीय स्टार्टअप इंडस्ट्री के लिए भी एक बड़ा कदम है। इससे यह साबित होता है कि भारतीय स्टार्टअप अब वैश्विक कंपनियों को सीधी चुनौती देने के लिए तैयार हैं। रैपिडो के पास पहले से ही एक मजबूत नेटवर्क है और कंपनी के पास पूंजी भी अच्छी है। ऐसे में रैपिडो का फूड डिलीवरी का कदम स्विगी और जोमैटो के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो सकता है। आने वाले समय में देखना दिलचस्प होगा कि रैपिडो इस बाजार में कितनी तेजी से अपनी पकड़ बना पाती है, और स्विगी और जोमैटो इस चुनौती का सामना कैसे करती हैं।
Conclusion
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