एक समय था जब भीड़भाड़ वाले शहरों में बस स्टॉप पर खड़े लोग बस एक बात कहते थे — “अगर कोई मुझे अभी ऑफिस पहुंचा दे तो मैं सौ रुपये भी दे दूं।” उसी वक्त एक स्टार्टअप ने सोचा — “क्यों न ये सौ रुपये लाखों बार मिलकर करोड़ों बन जाएं?” और बस, वहीं से शुरू हुआ Rapido का सफ़र। एक बाइक, एक ऐप, और एक मिशन — भारत के हर कोने में तेज़, सस्ता और भरोसेमंद ट्रांसपोर्ट देना। और आज वही Rapido, जो कभी स्टार्टअप की दुनिया में नया खिलाड़ी था, अब स्टॉक मार्केट के मैदान में उतरने की तैयारी कर रहा है। 2026 के आखिर तक — Rapido अपना IPO लाने जा रहा है।
लेकिन यह कहानी सिर्फ एक IPO की नहीं, यह कहानी है संघर्ष, रणनीति, और उस सोच की, जिसने भारत की ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री को हिला कर रख दिया। यह कहानी है तीन दोस्तों की, जिन्होंने 2015 में एक ऐसे आइडिया को जन्म दिया, जो बाद में लाखों लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बन गया। और अब, वही कंपनी भारत की सबसे चर्चित सार्वजनिक लिस्टिंग्स में से एक बनने जा रही है।
अरविंद सांका — Rapido के को-फाउंडर — ने हाल ही में बताया कि कंपनी की IPO योजना अब एक “विजन” से “रियलिटी” की ओर बढ़ चुकी है। उन्होंने कहा कि 2026 के आखिर तक Rapido तैयार होगा। लेकिन उनका फोकस IPO से पहले एक ही चीज़ पर है — प्रॉफिटेबिलिटी और सस्टेनेबल ग्रोथ। सांका ने कहा, “हम फिलहाल मार्केट पर नहीं, बल्कि ग्रोथ पर फोकस कर रहे हैं। पिछले दो सालों में हमने 100% सालाना ग्रोथ दर्ज की है, और आने वाले कुछ सालों तक इसी रफ्तार से बढ़ना चाहते हैं।”
यह बयान जितना सीधा लगता है, उसके पीछे उतनी ही जटिल तैयारी छिपी है। IPO लाने का मतलब सिर्फ पब्लिक से पैसा जुटाना नहीं होता, बल्कि अपने बिजनेस मॉडल पर पूरे विश्वास का ऐलान करना होता है। और Rapido उस भरोसे को मजबूत करने के लिए हर कदम सोच-समझकर उठा रहा है।
कंपनी ने साफ़ कर दिया है कि वह “कैश बर्न” की दौड़ में शामिल नहीं है। स्टार्टअप की दुनिया में यह लाइन बहुत मायने रखती है। पिछले कुछ वर्षों में हमने देखा कि कई हाई-फंडेड कंपनियां, जिनके पास अरबों रुपये थे, सिर्फ इसलिए डूब गईं क्योंकि उनका खर्च उनके कमाई से कहीं ज्यादा था। लेकिन Rapido का कहना है कि अब वह उस दौर से आगे निकल चुकी है।
अरविंद सांका ने कहा — “हमारा कोई कैश बर्न नहीं है। हम अब पैसा नहीं गंवा रहे हैं। हमारी सबसे बड़ी इनवेस्टमेंट ब्रांड कैंपेन में होती है। पिछले साल हम एक तिमाही में प्रॉफिटेबल थे, और इस साल पूरे वित्त वर्ष में ऐसा होने की उम्मीद है।” यह एक बड़ा बयान है, क्योंकि इसका मतलब है कि Rapido अब “ब्रेक-ईवन” के करीब है — यानी जितना कमा रही है, लगभग उतना ही खर्च कर रही है। अगर यह ट्रेंड जारी रहता है, तो IPO के समय तक Rapido एक स्थिर और आत्मनिर्भर कंपनी बन जाएगी।
पिछले कुछ सालों में Rapido ने अपने बिजनेस मॉडल को लगातार मजबूत किया है। जहाँ पहले यह सिर्फ “बाइक टैक्सी” तक सीमित थी, वहीं अब यह “ऑटो” और “कैब” सर्विस में भी उतर चुकी है। और सबसे दिलचस्प बात — कंपनी अब “फूड डिलीवरी” सेगमेंट में भी कदम रखने की योजना बना रही है।
यह वही कारण है जिसकी वजह से हाल ही में Swiggy ने अपनी 12% हिस्सेदारी Rapido में बेच दी। सितंबर 2025 में Swiggy ने करीब 2,400 करोड़ में यह डील पूरी की। इस सौदे के बाद Rapido की वैल्यूएशन 2.3 बिलियन डॉलर तक पहुंच गई। Swiggy ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि Rapido अब उनके फूड डिलीवरी बिजनेस के सीधा मुकाबले में उतरने जा रही है। यानी अब Rapido सिर्फ एक ट्रांसपोर्ट ऐप नहीं, बल्कि मल्टी-सर्विस प्लेयर बनकर उभर रही है।
यह विस्तार, Rapido की सबसे बड़ी ताकत है। क्योंकि भारत जैसे देश में जहां हर सेकंड लाखों लोग छोटे-छोटे डिस्टेंस तय करते हैं, वहाँ बाइक टैक्सी सबसे किफायती और सुविधाजनक विकल्प है। Rapido का डीएनए हमेशा से “सस्ता और सुलभ” सेवा देना रहा है। जहाँ Uber और Ola ने मिडल या अपर क्लास मार्केट को टारगेट किया, Rapido ने उन लोगों को जोड़ा जो रोज़ 50 या 100 रुपए बचाने की सोचते हैं। और यही वजह है कि आज छोटे शहरों में Rapido की पकड़ सबसे मजबूत है।
Rapido की टीम इस सफलता की नींव है। 2015 में तीन युवा — पवन गुन्टुपल्ली, ऋषिकेश एस आर, और अरविंद सांका — ने इसे शुरू किया था। तीनों के पास न बड़े कॉर्पोरेट एक्सपीरियंस थे, न अरबों की फंडिंग। बस एक आइडिया था — “बाइक से यात्रा को आसान बनाना।” और आज, उनकी कंपनी Uber और Ola जैसी दिग्गज कंपनियों को कड़ी टक्कर दे रही है।
IPO लाने से पहले Rapido की एक और प्राथमिकता है — “कंपनी को प्रतिस्पर्धा से आगे रखना।” अरविंद सांका ने कहा कि उनका लक्ष्य सिर्फ मार्केट में टिके रहना नहीं, बल्कि अपने नजदीकी प्रतिद्वंद्वी से बड़ी कंपनी बनना है। उन्होंने कहा, “हम शेयर बाजार के बारे में सोचने से पहले आगे बढ़ना चाहते हैं। हमारी ग्रोथ दर 100% रही है और हम इसे कुछ और सालों तक बनाए रखना चाहते हैं। उसके बाद ही IPO का सही समय आएगा।” इसका मतलब है कि कंपनी IPO को जल्दबाज़ी में नहीं ला रही, बल्कि उसे एक मील का पत्थर बनाना चाहती है — ऐसा IPO जो “सफलता का प्रतीक” बन सके, न कि सिर्फ़ फंड जुटाने का माध्यम।
Rapido के लिए 2026 का साल बेहद अहम रहेगा। इस दौरान कंपनी न केवल नए शहरों में प्रवेश करेगी, बल्कि नई कैटेगरी में भी उतरेगी। Rapido के शुरुआती Investor और Skycatcher LLC के फाउंडर सिया कमाली ने कहा कि कंपनी अब “कई छोटे शहरों और नए वर्टिकल्स” में विस्तार की योजना बना रही है। उन्होंने कहा कि Rapido हमेशा से ‘कॉमन मैन का ऐप’ रहा है — और यही उसे बाकी कंपनियों से अलग बनाता है।
भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों में जहाँ पब्लिक ट्रांसपोर्ट अब भी अव्यवस्थित है, Rapido वहां तेजी से पकड़ बना रहा है। लखनऊ, इंदौर, कोयंबटूर, नागपुर, पटना, गुवाहाटी जैसे शहरों में Rapido की सवारी अब रोज़मर्रा की ज़रूरत बन चुकी है। और कंपनी के डेटा के अनुसार, इन शहरों से आने वाले ऑर्डर्स अब उसके कुल बिजनेस का लगभग 60% हैं।
Rapido का विस्तार सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि अब यह पड़ोसी देशों के मार्केट्स पर भी नजर रख रहा है। Southeast Asia के कुछ देशों में “Bike Sharing Economy” तेजी से बढ़ रही है, और Rapido भविष्य में वहां भी अपनी सेवाएं शुरू करने की योजना बना सकती है।
अब बात करते हैं उस हिस्से की जिसने हाल ही में खबरों में जगह बनाई — TVS मोटर कंपनी और Rapido का सौदा। TVS ने अपनी हिस्सेदारी 288 करोड़ में बेचने का समझौता किया है। यह हिस्सेदारी कंपनी ने Excel India 8 (Mauritius) Ltd और MIH Investments One BV को दी है। TVS ने 2022 में Rapido के साथ साझेदारी की थी, ताकि डिमांड-बेस्ड सप्लाई और कमर्शियल ट्रांसपोर्टेशन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाया जा सके। अब यह सौदा दिखाता है कि Rapido अपने Investors के लिए “एक्जिट स्ट्रेटेजी” को भी गंभीरता से ले रही है।
दरअसल, यही Rapido की सबसे अनोखी बात है — यह कंपनी अपने Investors के साथ ट्रांसपेरेंसी और ग्रोथ दोनों को संतुलित रखती है। शुरुआती Investors को उनके Investment पर 10 से 15 गुना तक का रिटर्न मिला है। यह स्टार्टअप वर्ल्ड में एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।
अब सवाल यह है कि IPO के बाद Rapido कैसी दिखेगी? अगर हम वर्तमान स्थिति देखें, तो कंपनी की वैल्यूएशन पहले ही 2.3 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुकी है। आने वाले डेढ़ साल में, अगर Rapido अपनी ग्रोथ और प्रॉफिट मार्जिन बनाए रखती है, तो यह वैल्यूएशन आसानी से 4 बिलियन डॉलर तक जा सकती है। यह भारत के ट्रांसपोर्ट टेक सेक्टर के इतिहास में सबसे बड़ी सार्वजनिक लिस्टिंग्स में से एक होगी।
IPO की तैयारी में कंपनी आंतरिक रूप से कई स्तरों पर बदलाव कर रही है। वित्तीय डिसिप्लिन, कंप्लायंस सिस्टम, और पारदर्शी रिपोर्टिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ताकि जब कंपनी स्टॉक मार्केट में कदम रखे, तो वह सिर्फ “ग्रोथ स्टोरी” नहीं, बल्कि “गवर्नेंस स्टोरी” भी पेश करे।
Rapido के लिए IPO सिर्फ एक फाइनेंशियल मूव नहीं, बल्कि एक भावनात्मक मोड़ भी है। क्योंकि यह कंपनी उस वर्ग से जुड़ी है जो रोज़ सुबह अपने काम पर निकलता है, बाइक पकड़ता है, और उम्मीद करता है कि वो अपनी मंज़िल तक जल्दी पहुंचे। Rapido की सफलता उन्हीं लाखों राइडर्स और कैप्टन्स की कहानी है जिन्होंने अपने वाहनों को कमाई का ज़रिया बनाया। IPO के बाद, संभव है कि कंपनी अपने कुछ शेयर “कैप्टन्स” को भी अलॉट करे — ताकि वो भी कंपनी की सफलता में साझेदार बन सकें।
Rapido ने हमेशा कहा है कि उनका मॉडल “People First” है। इस फिलॉसफी ने ही उसे दूसरों से अलग किया। जब दूसरी कंपनियाँ ड्राइवर्स से भारी कमीशन लेती थीं, Rapido ने उन्हें अधिक रिवॉर्ड दिए। जब कई ऐप्स ने छोटे शहरों को नज़रअंदाज़ किया, Rapido ने वहीं से अपनी पकड़ मजबूत की।
IPO के ज़रिए Rapido अब न सिर्फ़ Investors, बल्कि आम जनता को भी अपनी कहानी का हिस्सा बनाना चाहती है। यह वो पल होगा जब देश का हर आम व्यक्ति, जिसने कभी Rapido की सवारी की है, अब उसका “शेयरहोल्डर” भी बन सकेगा।
Conclusion
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