Part 1: संघर्ष की शुरुआत और ज़मीनी अनुभव

₹20 प्रति घंटे से ₹350 करोड़ की Valuation तक: Nitin Kalra और Let’s Try की कहानी।
दिल्ली की गर्म दोपहर में एक आदमी हाथ में snacks के पैकेट लेकर दुकान-दुकान घूम रहा था। कई दुकानदार मना कर चुके थे, मगर उसके पास लौटने के लिए कोई सुरक्षित नौकरी नहीं थी।
कुछ समय पहले तक उसके सामने ₹1 करोड़ सालाना package वाली नौकरी का रास्ता था। अब डर यह था कि अगर आखिरी बचत भी खत्म हुई, तो परिवार और सपना दोनों कैसे संभलेंगे?
₹20 प्रति घंटे का McDonald’s क्लासरूम
उस आदमी ने कभी McDonald’s में tables और washroom साफ किए थे। मेहनताना था केवल ₹20 प्रति घंटा। सालों बाद वही व्यक्ति करोड़ों की company बनाने निकला, लेकिन रास्ता फिर शून्य से शुरू हुआ।
तभी घर में एक बच्चे की गंभीर बीमारी ने सवाल बदल दिया। क्या बाजार में ऐसा snack मिल सकता है, जो स्वाद बनाए रखे, पर ingredients को लेकर परिवार का भरोसा भी न तोड़े?
यहीं से Nitin Kalra की कहानी business success से आगे निकलती है। असली suspense यह नहीं कि Let’s Try बड़ी कैसे बनी, बल्कि यह है कि भीड़ भरे market में उसने जगह कैसे बनाई।
कॉर्पोरेट करियर से बड़ा रिस्क लेने का फैसला
आज headlines इस brand को करीब ₹350 करोड़ की valuation से जोड़ती हैं। मगर इस आंकड़े तक पहुँचने से पहले Nitin ने चौदह वर्षों की sales, rejection और ground-level work झेला था।
Nitin दिल्ली से आए और Delhi University के Satyawati College में commerce पढ़े। College के दौरान उन्होंने अपनी पढ़ाई के साथ एक part-time काम स्वीकार किया, जिसे बहुत लोग छोटा समझते।
McDonald’s outlet में उनकी duty केवल customers को serve करना नहीं थी। Tables पोंछना, गिरी चीजें साफ करना और washroom की रोज सफाई करना भी उसी job का हिस्सा था।
Nitin ने बाद में खुद बताया कि उन्हें उस समय ₹20 प्रति घंटा मिलता था। रकम छोटी थी, लेकिन food business को भीतर से देखने का उनका पहला practical classroom यही बना। Let’s Try
वहाँ उन्होंने देखा कि customer केवल खाना नहीं खरीदता। वह speed, cleanliness, consistency और भरोसा खरीदता है। एक ही taste बार-बार देना किसी भी food brand की सबसे कठिन जिम्मेदारी होती है। Let’s Try
उनका शुरुआती सफर सीधी corporate सीढ़ी नहीं था। Cheque delivery, sales promotion और call centre जैसे कामों ने उन्हें strangers से बात करना, objections सुनना और pressure में selling करना सिखाया।
आगे चलकर उन्होंने ITC, PepsiCo और Raymond जैसे बड़े नामों के साथ काम किया। खासकर sales और consumer business का अनुभव उन्हें दुकानदार, distributor और buyer की भाषा समझाने लगा। Let’s Try
करीब चौदह साल में Nitin ने career की वह दूरी तय की, जिसकी शुरुआत ₹20 प्रति घंटे से हुई थी। उनके अनुसार, बाद में ₹1 करोड़ annual package का अवसर सामने आया।
सुरक्षित भविष्य चाहने वाला व्यक्ति शायद उसी offer को चुनता। मगर Nitin को लगने लगा था कि वर्षों का अनुभव किसी और का target पूरा करने के बजाय अपना brand बनाने में लगाया जाए। Let’s Try
Part 2: पारिवारिक प्रेरणा और बिजनेस की नींव

यह फैसला romantic नहीं था। ऊँची salary छोड़ते ही household expenses, responsibilities और uncertain income सामने थे। Startup आकर्षक था, लेकिन bank account को कहानी नहीं, लगातार cash flow चाहिए था। Let’s Try
इसी दौरान घर की एक घटना ने market gap को निजी दर्द से जोड़ दिया। Nitin की बहन के बेटे, यानी उनके भांजे, में thalassemia का diagnosis होने की बात परिवार ने साझा की।
थैलेसीमिया का डायग्नोसिस और मार्केट गैप
Thalassemia एक inherited blood disorder है, जिसमें शरीर पर्याप्त hemoglobin नहीं बना पाता। इस diagnosis ने परिवार को treatment के साथ रोजमर्रा की lifestyle और food choices पर अधिक सतर्क कर दिया। Let’s Try
एक बात साफ रहनी चाहिए। Let’s Try का snack thalassemia का इलाज नहीं था, न हो सकता है। बीमारी ने परिवार को ingredients और labels अधिक ध्यान से देखने के लिए प्रेरित किया।
जब घर के लिए snacks चुने गए, Nitin को लगा कि shelves पर options तो बहुत हैं, पर taste, affordability और उनके मनचाहे ingredient standards का मेल आसानी से नहीं मिल रहा था। Let’s Try
‘Let’s Try’ ब्रांड की कानूनी शुरुआत और ट्रायल्स
Food industry के अनुभव ने उन्हें दूसरा पहलू भी दिखाया। Packaged snack में केवल recipe नहीं बिकती; oil, raw material, shelf life, packaging, distribution और final price एक साथ संतुलित करने पड़ते हैं।
यहीं business idea साफ हुआ। किसी नई खाने की category को invent नहीं करना था। परिचित Indian namkeen और munchies को अलग ingredient promise, consistent taste और accessible pricing के साथ पेश करना था। Let’s Try
Nitin ने पत्नी Chitra Gupta और परिवार के साथ इस विचार पर काम शुरू किया। Company databases में Neelam Kalra और Geetanjali Kalra भी Let’s Try की founding team में दर्ज हैं। Brand की legal entity Earth Crust Private Limited, June 2020 में incorporated हुई। Let’s Try ने 2021 में commercial journey शुरू की, जब pandemic के बाद consumer market तेजी से बदल रहा था।
Nitin के एक पुराने post के अनुसार, 1 January 2021 को वह pani puri, masala और दूसरे products pack करके shelf life जांच रहे थे। शुरुआत presentation से नहीं, repeated trials से हुई।
घर की छोटी testing में हर batch सवाल पूछता था। Taste कितने दिन वैसा रहेगा? Packet moisture रोकेगा? तेल की cost price बिगाड़ेगी? Customer पहली खरीद के बाद दोबारा आएगा या नहीं?
उन्होंने brand का नाम Let’s Try रखा। नाम में कोई भारी promise नहीं था, बस एक invitation था—एक बार चखकर देखिए। नए FMCG product के लिए पहली trial ही सबसे बड़ी दीवार होती है।
सामग्री और बाजार में एंट्री की चुनौतियाँ
Brand ने अपनी पहचान familiar flavours के साथ “better ingredients” पर बनाई। उसकी current website palm oil और maida से दूरी, तथा namkeen में 100% groundnut oil इस्तेमाल करने का दावा करती है।
Website preservatives, artificial flavours और colours न इस्तेमाल करने की बात कहती है। फिर भी consumer को हर product का ingredient label और nutrition panel अलग से पढ़ना चाहिए।
क्योंकि “healthy” कोई जादुई शब्द नहीं। Fried snack, चाहे किसी भी oil में बना हो, balanced diet का replacement नहीं बनता। Let’s Try की असली positioning comparative ingredient choice और taste के बीच थी।
धीरे-धीरे range bhujia और chips से आगे बढ़ी। Makhana, roasted chana, cookies, mixtures, wafers, rusks और दूसरे Indian snacks ने अलग उम्र तथा अलग eating occasions को target किया।
Part 3: रिजेक्शन से Shark Tank India तक का सफर

लेकिन product बनाना आधी लड़ाई थी। सामने decades पुराने brands, उनकी factories, distributors, shelf space और advertising budgets थे। एक नए packet को retailer की दुकान में जगह मिलना आसान नहीं था। Let’s Try
Nitin packets लेकर market में निकले। कहीं दुकानदार ने कहा product महंगा है, कहीं brand अनजान था, और कहीं जवाब मिला कि customer वही नाम मांगता है, जिसे वह पहले से जानता है।
ग्राउंड सेल्स अनुभव और ऑनलाइन ब्रेकथ्रू
ऐसे rejection में उनका पुराना sales experience काम आया। वह केवल order मांगने के बजाय feedback सुनते, pack size देखते और समझते कि retailer को margin, rotation और repeat demand क्यों चाहिए। Let’s Try
Online channel ने शुरुआती रास्ता खोला। Website और marketplaces पर brand सीधे customer तक पहुँच सकता था, reviews पढ़ सकता था और traditional distribution के बिना नए शहरों में demand test कर सकता था।
शुरुआती महीनों में sales छोटी थीं, मगर pitch में team ने बताया कि बिना बड़े marketing spend के कारोबार बढ़ा। कुछ buyers taste और positioning के कारण लौट रहे थे। Let’s Try
शार्क टैंक में तीखे सवाल और नेगोशिएशन
फिर आया वह मंच, जिसने Let’s Try को national audience के सामने रख दिया। Shark Tank India के पहले season में brand का pitch record हुआ और January 2022 में television पर प्रसारित हुआ।
Bright lights के बीच Nitin और team snacks लेकर Sharks के सामने खड़े थे। उनकी मांग थी ₹45 लाख के बदले 2% equity, यानी लगभग ₹22.5 करोड़ की implied valuation।
सवाल तुरंत तीखे हुए। Market पहले से crowded था, बड़े competitors मौजूद थे और snack category में price sensitivity बहुत ऊँची थी। केवल groundnut oil का promise क्या मजबूत moat बन सकता था? Let’s Try
कुछ Sharks को business अलग नहीं लगा। मगर Aman Gupta और Anupam Mittal ने founder की sales समझ, margins और execution में संभावना देखी। Negotiation product से अधिक valuation पर टिक गई। Let’s Try
टीवी डील की सच्चाई और अगला राउंड
Television पर आखिर ₹45 लाख के बदले 12% equity की joint deal स्वीकार हुई। इस हिसाब से valuation ₹3.75 करोड़ बैठती थी, जो founders की शुरुआती मांग से बहुत नीचे थी। Let’s Try
लेकिन televised handshake और final investment हमेशा समान नहीं होते। Due diligence के बाद Anupam आगे नहीं बढ़े, जबकि Aman ने अकेले investment पूरा किया—यह बात बाद की reports में सामने आई।
Aman Gupta ने 2025 में बताया कि उनका actual investment करीब ₹12 लाख था और उन्हें लगभग 7 से 8% equity मिली। इसलिए TV deal और cap table के आंकड़े अलग दिखते हैं। Let’s Try
उन्होंने कहा कि उस stake के लिए लगभग ₹40 करोड़ का purchase offer आया। यह estimated opportunity थी, जरूरी नहीं कि पूरी रकम cash में realise हो चुकी हो।
Part 4: फंडिंग, मैन्युफैक्चरिंग और तेजी से विस्तार

Shark Tank ने credibility और visibility दी, मगर अगले packet की quality television नहीं बचा सकता था। National attention के बाद stock, delivery, customer complaints और repeat orders संभालना असली परीक्षा बन गया।
2022 में brand ने Venture Catalysts के नेतृत्व वाले seed round से funding जुटाई। यह capital manufacturing, quality checks, packaging, inventory और बढ़ती demand के लिए backend मजबूत कर सकती थी।
इन-हाउस मैन्युफैक्चरिंग और विप्रो वेंचर्स का निवेश
Let’s Try ने in-house manufacturing पर जोर रखा। इससे recipe और product development पर control मिला, मगर साथ ही machinery, people, compliance और capacity planning की जिम्मेदारी भी company के भीतर रही।
July 2024 में Wipro Consumer Care–Ventures ने brand में निवेश किया और existing investor 100 Unicorns भी शामिल हुआ। उस समय company ने ₹50 करोड़ से अधिक revenue run rate का दावा किया।
यहाँ run rate और audited annual revenue का फर्क समझना जरूरी है। Run rate हाल की sales को पूरे साल पर project करता है; वह बीते financial year की final कमाई नहीं होता।
ग्लोबलाइजेशन, ओम्नीचैनल और पार्टनर नेटवर्क
April 2025 में Singapore की SWC Global के नेतृत्व में Let’s Try ने $2.5 million, यानी उस समय करीब ₹22 करोड़, का pre-Series A round जुटाया। Existing investors भी साथ रहे।
Company ने कहा कि इस capital का इस्तेमाल Tier 1, Tier 2 और Tier 3 cities में distribution, supply chain, backend operations और omnichannel brand building मजबूत करने में होगा।
Funding के साथ product availability भी फैली। Brand की website आज Amazon, BigBasket, Blinkit, Flipkart, Instamart, Reliance, Zepto, DMart और MilkBasket जैसे channels को availability partners के रूप में दिखाती है।
Growth का अगला संकेत revenue से आया। December 2025 के interview में Nitin ने कहा कि company ने पिछले वर्ष, लगभग ₹65 करोड़ revenue किया और चालू वर्ष के लिए ₹230 करोड़ target रखा।
इन numbers को achieved और projected हिस्सों में अलग रखना जरूरी है। ₹65 करोड़ founder द्वारा बताया गया पिछला revenue था; ₹230 करोड़ उस समय का अनुमान और लक्ष्य था, audited result नहीं।
Part 5: भविष्य की योजनाएँ, IPO का सपना और सीख

मगर valuation company के bank account में रखा cash नहीं होता, और न revenue होती है। यह किसी funding round, share price या investor estimate पर आधारित बदलती हुई corporate value होती है। Let’s Try
Nitin ने 2026 के लिए और बड़ा सपना बताया। उनका घोषित लक्ष्य अगले चरण में ₹1,000 करोड़ revenue तक पहुँचना और 2028 के आसपास IPO या pre-IPO तैयारी करना था।
₹100 करोड़ का इंफ्रास्ट्रक्चर और चैनल मिक्स
यह उपलब्धि नहीं, भविष्य की योजना है। बड़े target headlines बनाते हैं, लेकिन उन्हें पूरा करने के लिए production, demand, working capital, governance और profitable distribution हर quarter साबित करना पड़ता है। Let’s Try
Company ने चार नई manufacturing facilities पर लगभग ₹100 करोड़ invest करने की योजना बताई। Bengaluru और Mumbai–Pune region के साथ exports के लिए western unit का विचार भी था।
उस interview के समय लगभग 80% revenue online और 20% offline channels से आने की बात कही गई। लक्ष्य mix को 60:40 बनाकर general trade, modern trade, railways और airlines तक पहुँचना था।
बिज़नेस से मिलने वाले तीन सबसे बड़े सबक
Let’s Try का कहना है कि वह पहले वर्ष से profitable रही, और single-digit margins रखकर कमाई का हिस्सा R&D तथा expansion में लगाया। यह company claim है, independent audit का substitute नहीं।
इस कहानी की सबसे बड़ी सीख salary छोड़ना नहीं, preparation है। Nitin ने अचानक food business नहीं चुना; उन्होंने वर्षों तक sales, distribution, consumer behaviour और operations को ground level पर समझा था।
दूसरी सीख है कि personal pain idea दे सकता है, पर business repeat purchase से बनता है। ग्राहक सहानुभूति में packet खरीद सकता है, मगर दोबारा वही लेगा जो taste, price और trust निभाए।
और आखिरी तस्वीर फिर उसी McDonald’s floor पर लौटती है। ₹20 प्रति घंटे काम करने वाला युवक जानता नहीं था कि वही सफाई, service और consistency एक दिन उसके अपने brand की बुनियाद बनेगी।
₹1 करोड़ का अवसर छोड़ना साहस था, मगर ₹350 करोड़ की reported valuation तक पहुँचना हजारों छोटे decisions का परिणाम बना। Nitin Kalra की कहानी कहती है—शुरुआत छोटी हो सकती है, standards नहीं।
Part 6: समरी टीज़र और दोबारा दोहराई गई कहानी

एक समय नितिन कालरा ₹20 के लिए McDonald’s में tables और toilets साफ करते थे। जेब खाली थी, जिम्मेदारियां बड़ी थीं और डर था कि कहीं पूरी जिंदगी छोटे कामों में न गुजर जाए। लेकिन कौन जानता था कि यही लड़का एक दिन ₹1 करोड़ की नौकरी छोड़ देगा?
संघर्ष से बिजनेस तक की संक्षिप्त यात्रा
Food industry में दस साल काम करने के बाद नितिन ने market की बड़ी कमी देखी। Snacks हजारों थे, लेकिन बेहतर ingredients वाले विकल्प बेहद कम थे। फिर उनके भांजे को Thalassemia होने की खबर ने परिवार को झकझोर दिया।
सुरक्षित diet तलाशते हुए packed snacks की ingredients list ने उन्हें परेशान कर दिया। तभी उन्होंने पत्नी चित्रा गुप्ता के साथ Let’s Try शुरू किया, जहां मैदे के बजाय बेहतर ingredients और peanut oil इस्तेमाल करने का दावा किया गया।
फिर नितिन Shark Tank India पहुंचे और 2% equity के बदले ₹45 लाख मांगे। Aman Gupta और Anupam Mittal ने दिलचस्पी दिखाई, लेकिन अचानक Anupam पीछे हट गए। अब क्या नितिन का सपना यहीं टूटने वाला था? पूरी सच्चाई जानने के लिए description में दिए लिंक पर क्लिक कर अभी पूरी वीडियो देखें।!
₹20 प्रति घंटे से ₹350 करोड़ की Valuation तक: Nitin Kalra और Let’s Try की कहानी।
शून्य से शुरुआत और पारिवारिक चुनौती
दिल्ली की गर्म दोपहर में एक आदमी हाथ में snacks के पैकेट लेकर दुकान-दुकान घूम रहा था। कई दुकानदार मना कर चुके थे, मगर उसके पास लौटने के लिए कोई सुरक्षित नौकरी नहीं थी।
कुछ समय पहले तक उसके सामने ₹1 करोड़ सालाना package वाली नौकरी का रास्ता था। अब डर यह था कि अगर आखिरी बचत भी खत्म हुई, तो परिवार और सपना दोनों कैसे संभलेंगे?
उस आदमी ने कभी McDonald’s में tables और washroom साफ किए थे। मेहनताना था केवल ₹20 प्रति घंटा। सालों बाद वही व्यक्ति करोड़ों की company बनाने निकला, लेकिन रास्ता फिर शून्य से शुरू हुआ।
तभी घर में एक बच्चे की गंभीर बीमारी ने सवाल बदल दिया। क्या बाजार में ऐसा snack मिल सकता है, जो स्वाद बनाए रखे, पर ingredients को लेकर परिवार का भरोसा भी न तोड़े?
यहीं से Nitin Kalra की कहानी business success से आगे निकलती है। असली suspense यह नहीं कि Let’s Try बड़ी कैसे बनी, बल्कि यह है कि भीड़ भरे market में उसने जगह कैसे बनाई।
आज headlines इस brand को करीब ₹350 करोड़ की valuation से जोड़ती हैं। मगर इस आंकड़े तक पहुँचने से पहले Nitin ने चौदह वर्षों की sales, rejection और ground-level work झेला था।
Nitin दिल्ली से आए और Delhi University के Satyawati College में commerce पढ़े। College के दौरान उन्होंने अपनी पढ़ाई के साथ एक part-time काम स्वीकार किया, जिसे बहुत लोग छोटा समझते।
McDonald’s outlet में उनकी duty केवल customers को serve करना नहीं थी। Tables पोंछना, गिरी चीजें साफ करना और washroom की रोज सफाई करना भी उसी job का हिस्सा था।
Nitin ने बाद में खुद बताया कि उन्हें उस समय ₹20 प्रति घंटा मिलता था। रकम छोटी थी, लेकिन food business को भीतर से देखने का उनका पहला practical classroom यही बना।
वहाँ उन्होंने देखा कि customer केवल खाना नहीं खरीदता। वह speed, cleanliness, consistency और भरोसा खरीदता है। एक ही taste बार-बार देना किसी भी food brand की सबसे कठिन जिम्मेदारी होती है।
उनका शुरुआती सफर सीधी corporate सीढ़ी नहीं था। Cheque delivery, sales promotion और call centre जैसे कामों ने उन्हें strangers से बात करना, objections सुनना और pressure में selling करना सिखाया।
आगे चलकर उन्होंने ITC, PepsiCo और Raymond जैसे बड़े नामों के साथ काम किया। खासकर sales और consumer business का अनुभव उन्हें दुकानदार, distributor और buyer की भाषा समझाने लगा।
करीब चौदह साल में Nitin ने career की वह दूरी तय की, जिसकी शुरुआत ₹20 प्रति घंटे से हुई थी। उनके अनुसार, बाद में ₹1 करोड़ annual package का अवसर सामने आया।
सुरक्षित भविष्य चाहने वाला व्यक्ति शायद उसी offer को चुनता। मगर Nitin को लगने लगा था कि वर्षों का अनुभव किसी और का target पूरा करने के बजाय अपना brand बनाने में लगाया जाए।
यह फैसला romantic नहीं था। ऊँची salary छोड़ते ही household expenses, responsibilities और uncertain income सामने थे। Startup आकर्षक था, लेकिन bank account को कहानी नहीं, लगातार cash flow चाहिए था।
इसी दौरान घर की एक घटना ने market gap को निजी दर्द से जोड़ दिया। Nitin की बहन के बेटे, यानी उनके भांजे, में thalassemia का diagnosis होने की बात परिवार ने साझा की।
Thalassemia एक inherited blood disorder है, जिसमें शरीर पर्याप्त hemoglobin नहीं बना पाता। इस diagnosis ने परिवार को treatment के साथ रोजमर्रा की lifestyle और food choices पर अधिक सतर्क कर दिया।
एक बात साफ रहनी चाहिए। Let’s Try का snack thalassemia का इलाज नहीं था, न हो सकता है। बीमारी ने परिवार को ingredients और labels अधिक ध्यान से देखने के लिए प्रेरित किया।
जब घर के लिए snacks चुने गए, Nitin को लगा कि shelves पर options तो बहुत हैं, पर taste, affordability और उनके मनचाहे ingredient standards का मेल आसानी से नहीं मिल रहा था।
Food industry के अनुभव ने उन्हें दूसरा पहलू भी दिखाया। Packaged snack में केवल recipe नहीं बिकती; oil, raw material, shelf life, packaging, distribution और final price एक साथ संतुलित करने पड़ते हैं।
यहीं business idea साफ हुआ। किसी नई खाने की category को invent नहीं करना था। परिचित Indian namkeen और munchies को अलग ingredient promise, consistent taste और accessible pricing के साथ पेश करना था।
Nitin ने पत्नी Chitra Gupta और परिवार के साथ इस विचार पर काम शुरू किया। Company databases में Neelam Kalra और Geetanjali Kalra भी Let’s Try की founding team में दर्ज हैं। Brand की legal entity Earth Crust Private Limited, June 2020 में incorporated हुई। Let’s Try ने 2021 में commercial journey शुरू की, जब pandemic के बाद consumer market तेजी से बदल रहा था।
Nitin के एक पुराने post के अनुसार, 1 January 2021 को वह pani puri, masala और दूसरे products pack करके shelf life जांच रहे थे। शुरुआत presentation से नहीं, repeated trials से हुई।
घर की छोटी testing में हर batch सवाल पूछता था। Taste कितने दिन वैसा रहेगा? Packet moisture रोकेगा? तेल की cost price बिगाड़ेगी? Customer पहली खरीद के बाद दोबारा आएगा या नहीं?
उन्होंने brand का नाम Let’s Try रखा। नाम में कोई भारी promise नहीं था, बस एक invitation था—एक बार चखकर देखिए। नए FMCG product के लिए पहली trial ही सबसे बड़ी दीवार होती है।
Brand ने अपनी पहचान familiar flavours के साथ “better ingredients” पर बनाई। उसकी current website palm oil और maida से दूरी, तथा namkeen में 100% groundnut oil इस्तेमाल करने का दावा करती है।
Website preservatives, artificial flavours और colours न इस्तेमाल करने की बात कहती है। फिर भी consumer को हर product का ingredient label और nutrition panel अलग से पढ़ना चाहिए।
क्योंकि “healthy” कोई जादुई शब्द नहीं। Fried snack, चाहे किसी भी oil में बना हो, balanced diet का replacement नहीं बनता। Let’s Try की असली positioning comparative ingredient choice और taste के बीच थी।
धीरे-धीरे range bhujia और chips से आगे बढ़ी। Makhana, roasted chana, cookies, mixtures, wafers, rusks और दूसरे Indian snacks ने अलग उम्र तथा अलग eating occasions को target किया।
लेकिन product बनाना आधी लड़ाई थी। सामने decades पुराने brands, उनकी factories, distributors, shelf space और advertising budgets थे। एक नए packet को retailer की दुकान में जगह मिलना आसान नहीं था।
Nitin packets लेकर market में निकले। कहीं दुकानदार ने कहा product महंगा है, कहीं brand अनजान था, और कहीं जवाब मिला कि customer वही नाम मांगता है, जिसे वह पहले से जानता है।
ऐसे rejection में उनका पुराना sales experience काम आया। वह केवल order मांगने के बजाय feedback सुनते, pack size देखते और समझते कि retailer को margin, rotation और repeat demand क्यों चाहिए।
Online channel ने शुरुआती रास्ता खोला। Website और marketplaces पर brand सीधे customer तक पहुँच सकता था, reviews पढ़ सकता था और traditional distribution के बिना नए शहरों में demand test कर सकता था।
शुरुआती महीनों में sales छोटी थीं, मगर pitch में team ने बताया कि बिना बड़े marketing spend के कारोबार बढ़ा। कुछ buyers taste और positioning के कारण लौट रहे थे।
फिर आया वह मंच, जिसने Let’s Try को national audience के सामने रख दिया। Shark Tank India के पहले season में brand का pitch record हुआ और January 2022 में television पर प्रसारित हुआ।
Bright lights के बीच Nitin और team snacks लेकर Sharks के सामने खड़े थे। उनकी मांग थी ₹45 लाख के बदले 2% equity, यानी लगभग ₹22.5 करोड़ की implied valuation। Let’s Try
सवाल तुरंत तीखे हुए। Market पहले से crowded था, बड़े competitors मौजूद थे और snack category में price sensitivity बहुत ऊँची थी। केवल groundnut oil का promise क्या मजबूत moat बन सकता था?
कुछ Sharks को business अलग नहीं लगा। मगर Aman Gupta और Anupam Mittal ने founder की sales समझ, margins और execution में संभावना देखी। Negotiation product से अधिक valuation पर टिक गई। Let’s Try
Television पर आखिर ₹45 लाख के बदले 12% equity की joint deal स्वीकार हुई। इस हिसाब से valuation ₹3.75 करोड़ बैठती थी, जो founders की शुरुआती मांग से बहुत नीचे थी।
लेकिन televised handshake और final investment हमेशा समान नहीं होते। Due diligence के बाद Anupam आगे नहीं बढ़े, जबकि Aman ने अकेले investment पूरा किया—यह बात बाद की reports में सामने आई।
Aman Gupta ने 2025 में बताया कि उनका actual investment करीब ₹12 लाख था और उन्हें लगभग 7 से 8% equity मिली। इसलिए TV deal और cap table के आंकड़े अलग दिखते हैं। Let’s Try
उन्होंने कहा कि उस stake के लिए लगभग ₹40 करोड़ का purchase offer आया। यह estimated opportunity थी, जरूरी नहीं कि पूरी रकम cash में realise हो चुकी हो।
Shark Tank ने credibility और visibility दी, मगर अगले packet की quality television नहीं बचा सकता था। National attention के बाद stock, delivery, customer complaints और repeat orders संभालना असली परीक्षा बन गया। 2022 में brand ने Venture Catalysts के नेतृत्व वाले seed round से funding जुटाई। यह capital manufacturing, quality checks, packaging, inventory और बढ़ती demand के लिए backend मजबूत कर सकती थी।
Let’s Try ने in-house manufacturing पर जोर रखा। इससे recipe और product development पर control मिला, मगर साथ ही machinery, people, compliance और capacity planning की जिम्मेदारी भी company के भीतर रही।
July 2024 में Wipro Consumer Care–Ventures ने brand में निवेश किया और existing investor 100 Unicorns भी शामिल हुआ। उस समय company ने ₹50 करोड़ से अधिक revenue run rate का दावा किया।
यहाँ run rate और audited annual revenue का फर्क समझना जरूरी है। Run rate हाल की sales को पूरे साल पर project करता है; वह बीते financial year की final कमाई नहीं होता।
April 2025 में Singapore की SWC Global के नेतृत्व में Let’s Try ने $2.5 million, यानी उस समय करीब ₹22 करोड़, का pre-Series A round जुटाया। Existing investors भी साथ रहे।
Company ने कहा कि इस capital का इस्तेमाल Tier 1, Tier 2 और Tier 3 cities में distribution, supply chain, backend operations और omnichannel brand building मजबूत करने में होगा।
Funding के साथ product availability भी फैली। Brand की website आज Amazon, BigBasket, Blinkit, Flipkart, Instamart, Reliance, Zepto, DMart और MilkBasket जैसे channels को availability partners के रूप में दिखाती है।
Growth का अगला संकेत revenue से आया। December 2025 के interview में Nitin ने कहा कि company ने पिछले वर्ष, लगभग ₹65 करोड़ revenue किया और चालू वर्ष के लिए ₹230 करोड़ target रखा।
इन numbers को achieved और projected हिस्सों में अलग रखना जरूरी है। ₹65 करोड़ founder द्वारा बताया गया पिछला revenue था; ₹230 करोड़ उस समय का अनुमान और लक्ष्य था, audited result नहीं।
मगर valuation company के bank account में रखा cash नहीं होता, और न revenue होती है। यह किसी funding round, share price या investor estimate पर आधारित बदलती हुई corporate value होती है।
Nitin ने 2026 के लिए और बड़ा सपना बताया। उनका घोषित लक्ष्य अगले चरण में ₹1,000 करोड़ revenue तक पहुँचना और 2028 के आसपास IPO या pre-IPO तैयारी करना था।
यह उपलब्धि नहीं, भविष्य की योजना है। बड़े target headlines बनाते हैं, लेकिन उन्हें पूरा करने के लिए production, demand, working capital, governance और profitable distribution हर quarter साबित करना पड़ता है।
Company ने चार नई manufacturing facilities पर लगभग ₹100 करोड़ invest करने की योजना बताई। Bengaluru और Mumbai–Pune region के साथ exports के लिए western unit का विचार भी था।
उस interview के समय लगभग 80% revenue online और 20% offline channels से आने की बात कही गई। लक्ष्य mix को 60:40 बनाकर general trade, modern trade, railways और airlines तक पहुँचना था।
Let’s Try का कहना है कि वह पहले वर्ष से profitable रही, और single-digit margins रखकर कमाई का हिस्सा R&D तथा expansion में लगाया। यह company claim है, independent audit का substitute नहीं।
इस कहानी की सबसे बड़ी सीख salary छोड़ना नहीं, preparation है। Nitin ने अचानक food business नहीं चुना; उन्होंने वर्षों तक sales, distribution, consumer behaviour और operations को ground level पर समझा था।
दूसरी सीख है कि personal pain idea दे सकता है, पर business repeat purchase से बनता है। ग्राहक सहानुभूति में packet खरीद सकता है, मगर दोबारा वही लेगा जो taste, price और trust निभाए।
और आखिरी तस्वीर फिर उसी McDonald’s floor पर लौटती है। ₹20 प्रति घंटे काम करने वाला युवक जानता नहीं था कि वही सफाई, service और consistency एक दिन उसके अपने brand की बुनियाद बनेगी।
₹1 करोड़ का अवसर छोड़ना साहस था, मगर ₹350 करोड़ की reported valuation तक पहुँचना हजारों छोटे decisions का परिणाम बना। Nitin Kalra की कहानी कहती है—शुरुआत छोटी हो सकती है, standards नहीं। Let’s Try
निष्कर्ष एवं अंतिम विचार
एक समय नितिन कालरा ₹20 के लिए McDonald’s में tables और toilets साफ करते थे। जेब खाली थी, जिम्मेदारियां बड़ी थीं और डर था कि कहीं पूरी जिंदगी छोटे कामों में न गुजर जाए। लेकिन कौन जानता था कि यही लड़का एक दिन ₹1 करोड़ की नौकरी छोड़ देगा? Let’s Try
Food industry में दस साल काम करने के बाद नितिन ने market की बड़ी कमी देखी। Snacks हजारों थे, लेकिन बेहतर ingredients वाले विकल्प बेहद कम थे। फिर उनके भांजे को Thalassemia होने की खबर ने परिवार को झकझोर दिया। सुरक्षित diet तलाशते हुए packed snacks की ingredients list ने उन्हें परेशान कर दिया। तभी उन्होंने पत्नी चित्रा गुप्ता के साथ Let’s Try शुरू किया, जहां मैदे के बजाय बेहतर ingredients और peanut oil इस्तेमाल करने का दावा किया गया। Let’s Try
फिर नितिन Shark Tank India पहुंचे और 2% equity के बदले ₹45 लाख मांगे। Aman Gupta और Anupam Mittal ने दिलचस्पी दिखाई, लेकिन अचानक Anupam पीछे हट गए। अब क्या नितिन का सपना यहीं टूटने वाला था? पूरी सच्चाई जानने के लिए description में दिए लिंक पर क्लिक कर अभी पूरी वीडियो देखें।!
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