Manrega की नई पहचान — नाम बदलने से क्या सच में मज़दूरों के सम्मान और हक़ को नई ताक़त मिलेगी? 2026
सोचिए ज़रा—एक गांव की सुबह… कच्ची सड़क, हाथ में फावड़ा, पैरों में चप्पल नहीं, और माथे पर पसीना। उस मजदूर को शायद ये भी नहीं पता कि संसद में आज किस योजना का नाम बदला जा रहा है, किस कानून की आत्मा को नया चेहरा दिया जा रहा है। लेकिन उसे इतना ज़रूर पता है … Read more