Billionaire की नई मंज़िल: ब्रिटेन छोड़ दुबई में बसा अमीरी का नया साम्राज्य! 2025

Imagine कीजिए… London की ठंडी सुबह है। सड़कें शांत हैं, पर अंदर कुछ खलबली है। City of London के सबसे आलीशान इलाके Mayfair में कुछ घरों के बाहर moving trucks खड़े हैं — पर ये कोई आम शिफ्टिंग नहीं। यह वो घर हैं, जिनके अंदर अरबों डॉलर की दौलत रखने वाले लोग रहते थे। और अब, वो सब एक-एक कर यूके छोड़ रहे हैं। Bankers, billionaires, hedge fund kings — जो कभी ब्रिटेन की शान थे, वो अब अपनी luxury yachts के साथ दुबई, मियामी या ज़्यूरिख की ओर उड़ान भर रहे हैं।

क्यों? क्योंकि अब ब्रिटेन उनके लिए “home” नहीं रहा… अब वो इसे “high-tax trap” कहते हैं। पिछले कुछ सालों में ब्रिटेन से निकल रहे करोड़पतियों और अरबपतियों की यह लहर दुनिया भर में सुर्खियाँ बटोर रही है। एक दौर था जब London को दुनिया का financial capital कहा जाता था — जहाँ पैसा सुरक्षित था, टैक्स स्ट्रक्चर स्मार्ट था, और government उद्यमियों को encourage करती थी। लेकिन अब हालात पलट चुके हैं। आज वही अरबपति, जिन्होंने ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था में जान फूंकी थी, उसी देश से दूर भाग रहे हैं।

ये सिर्फ़ कुछ लोगों का पलायन नहीं — ये “money migration” की एक global wave है। और इसका सबसे बड़ा ठिकाना बना है — United Arab Emirates यानी दुबई। अब नाम सुनिए — Christian Angermayer, Aston Villa के मालिक Nassef Sawiris, shipping tycoon John Fredriksen… और अब Revolut के co-founder Nik Storonsky। इन सभी ने एक ही काम किया — उन्होंने कहा “Goodbye Britain” और “Hello UAE!” अब आप सोच रहे होंगे — आखिर ये अरबपति ब्रिटेन को क्यों छोड़ रहे हैं? क्या उन्हें weather पसंद नहीं? या Brexit के बाद London की charm खत्म हो गई?

असल वजह कुछ और गहरी है — Tax, Politics और Future Uncertainty। ब्रिटेन सरकार ने हाल ही में एक बड़ा फैसला लिया — “non-domiciled tax regime” को खत्म करने का। सालों से यह व्यवस्था ब्रिटेन में रहने वाले विदेशी नागरिकों के लिए स्वर्ग जैसी थी — क्योंकि अगर आपकी कमाई विदेश में होती थी, तो उस पर UK में टैक्स नहीं देना पड़ता था। यानी आप लंदन में रहिए, Rolls Royce चलाइए, लेकिन अगर आपकी कमाई Dubai या Singapore से आ रही है — तो उस पर HMRC (UK Tax Authority) हाथ नहीं लगा सकती थी।

पर अब वो छूट खत्म हो गई है। अब हर व्यक्ति को उसकी global income पर टैक्स देना होगा। और यहीं से शुरू हुई अरबपतियों की “exit strategy”। Nik Storonsky का नाम इसलिए खास है, क्योंकि वो एक symbol बन चुके हैं modern billionaires की सोच का — “जहाँ freedom मिले, वहीं future बनाओ।” रूस में जन्मे Nik Storonsky ने 2015 में Revolut नाम की fintech कंपनी शुरू की थी। एक simple idea — banking को पूरी तरह digital बनाना। कोई physical branch नहीं, सबकुछ app में। और देखते ही देखते Revolut दुनिया के सबसे बड़े neo-banks में से एक बन गया — 65 million users, 200 देशों में presence, और 75 billion dollar का valuation।

Nik की खुद की net worth अब करीब 8 billion dollar है। लेकिन हाल ही में उन्होंने quietly अपनी residency बदल दी — UK से UAE। अब उनका नया घर है — Dubai Marina का एक luxury penthouse, जहाँ से Persian Gulf का view दिखता है। उनके spokesperson ने कुछ नहीं कहा, लेकिन सब समझ गए — ये “tax exile” का सबसे ताज़ा example है।

UAE ने पिछले एक दशक में खुद को global rich के लिए paradise बना लिया है। यहाँ personal income tax zero है। corporate tax भी काफी flexible है। और सबसे बड़ी बात — यहाँ कोई political instability नहीं, कोई populist tax policy नहीं, और न ही ऐसा media pressure जो billionaires को villain बना दे।

पश्चिमी देशों में, खासकर ब्रिटेन में, पिछले कुछ सालों में “anti-rich sentiment” बढ़ा है। महंगाई, energy crisis और Brexit के बाद आम जनता का गुस्सा बढ़ा, और politicians ने उस गुस्से को redirect किया — towards the wealthy। अब अरबपतियों को वहाँ “job creators” नहीं, बल्कि “privileged elite” के रूप में देखा जा रहा है। Labour Party ने भी साफ़ कर दिया है कि वो rich लोगों के लिए special tax relief नहीं रखेगी।

यानी, अगर आप अरबपति हैं, तो ब्रिटेन अब आपके लिए welcoming नहीं रहा। Christian Angermayer, जो psychedelics और biotech में बड़ा नाम हैं, उन्होंने openly कहा — “Britain is punishing innovation. In Dubai, they reward it.” John Fredriksen जैसे shipping giants ने भी कहा — “London was once global, now it’s bureaucratic.” और अब यही सोच हर successful entrepreneur की हो गई है — कि अगर आप growth और comfort दोनों चाहते हैं, तो east की तरफ़ देखिए।

UAE में सिर्फ़ sunshine नहीं है, वहाँ एक नया “billionaire ecosystem” है। अब सिर्फ़ oil money नहीं, वहाँ tech, crypto, AI, logistics — हर sector में अरबों डॉलर का निवेश हो रहा है। Dubai International Financial Centre (DIFC) अब Asia का Singapore बन चुका है। Dubai में 2024 तक 72,500 डॉलर millionaires और 200 से ज्यादा billionaires रह रहे हैं — और यह संख्या हर साल 15% बढ़ रही है।

UAE ने इसे आसान बना दिया है — Golden Visa policy से लेकर 10-year residency तक, सब कुछ rich migrants के हिसाब से design किया गया है। और जब आप वहाँ जाते हैं, तो न कोई heritage tax, न capital gains, न inheritance duty। यानी आपका पैसा आपका ही रहेगा — बिना किसी government intervention के।

अब इस ट्रेंड का असर सिर्फ़ UK की economy पर नहीं, बल्कि पूरे Europe पर पड़ रहा है। क्योंकि high-net-worth individuals सिर्फ़ luxury spenders नहीं होते — वो jobs, startups और donations भी लाते हैं। जब वो किसी देश से जाते हैं, तो साथ में पैसा और opportunity दोनों ले जाते हैं। 2025 में एक survey आया जिसमें बताया गया कि सिर्फ़ इस साल करीब 3,200 millionaires ब्रिटेन छोड़ चुके हैं। यह number पिछले साल से दोगुना है।

और जो countries इस capital flight का फायदा उठा रही हैं — वो हैं UAE, USA, Italy और Switzerland। Italy का example लें — वहाँ “flat tax system” है, जहाँ rich migrants सिर्फ़ 1,00,000 यूरो प्रति साल देकर अपनी global income पर tax-free रह सकते हैं। Switzerland decades से rich migrants का home रहा है — वहाँ privacy, safety और low tax का perfect combination है।

लेकिन UAE ने इन्हें भी पछाड़ दिया है — क्योंकि वहाँ कोई personal tax है ही नहीं। अब British government चिंता में है। Treasury के लिए यह “tax brain drain” बड़ा खतरा है। क्योंकि जब rich लोग जाते हैं, तो साथ में उनके business operations, banking assets और investment capital भी जाता है।

Revolut जैसी कंपनियाँ, जो पहले London को fintech hub बना रही थीं, अब धीरे-धीरे Middle East में अपने headquarters expand कर रही हैं। Nik Storonsky ने भी कहा था — “Dubai gives me flexibility to build global financial infrastructure without political hurdles.” दूसरे शब्दों में — वो जो message दे रहे हैं, वो साफ़ है: “Innovation को politics से बचाओ।”

London के financial district में जो buzz कभी हुआ करता था, वो अब Dubai Marina में महसूस किया जा सकता है। जहाँ पहले British bankers Friday evening को Soho में champagne खोलते थे, अब वही लोग Palm Jumeirah के beach clubs में deal-closing parties करते हैं। यह सिर्फ़ lifestyle change नहीं — यह power shift है।

यूके में अब middle class और political class दोनों इस बात पर divided हैं। कुछ कहते हैं कि rich लोगों को contribute करना चाहिए — “अगर आप यहाँ रहते हैं, तो यहाँ टैक्स दीजिए।” लेकिन दूसरी तरफ़ argument है — “अगर आप उन्हें दबाएँगे, तो वो चले जाएँगे।”और यही हो रहा है।

अब सवाल है — क्या ये पलायन रुक सकता है? इसका जवाब है – Short term में तो नहीं। क्योंकि UAE और Singapore जैसी economies लगातार अपने tax incentives और business policies को और attractive बना रही हैं। और UK, दूसरी तरफ़, political promises और populism में उलझा हुआ है। अभी Labour Party ने 2026 से “Wealth Tax” पर चर्चा शुरू की है — यानी एक ऐसा टैक्स जो आपके assets पर लगेगा, income पर नहीं।

और जैसे ही ये खबर फैली, कई ultra-rich individuals ने अपनी UK-based assets को foreign trusts में शिफ्ट करना शुरू कर दिया। यह trend अब unstoppable दिख रहा है। लेकिन इसमें एक irony है — UK को कभी “safe haven for money” कहा जाता था। अब वही देश “money refugees” बना रहा है।

Dubai ने इस अवसर को brilliantly cash किया है। वहाँ सिर्फ़ real estate ही नहीं, banking, crypto, luxury retail — हर क्षेत्र में boom आया है। Palm Jumeirah और Business Bay जैसी जगहें अब नए London suburbs बन चुकी हैं। वहाँ हर हफ्ते luxury property deals में अरबों डॉलर का turnover होता है।

UAE ने यह बात समझ ली है — अगर आप दुनिया के सबसे अमीर लोगों को attract कर सकते हैं, तो आपको बाकी सब कुछ अपने आप मिल जाता है — jobs, tourism, innovation, even global influence। Nik Storonsky जैसे entrepreneurs अब एक नए narrative के प्रतीक हैं — कि “freedom to create” अब west से east की ओर शिफ्ट हो चुकी है।

जहाँ west regulation से डराता है, वहाँ east innovation को celebrate कर रहा है। Dubai अब सिर्फ़ skyscrapers का शहर नहीं — यह एक नया capital magnet बन चुका है। यहाँ हर nationality का billionaire एक साथ दिखता है — Russians, Indians, Brits, Americans — सबने यहाँ अपना नया “safe home” बना लिया है।

Conclusion

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