Bharat Taxi का कमाल — अब खत्म होगी ओला-ऊबर की मनमानी, ड्राइवरों और यात्रियों के लिए सरकार का गेमचेंजर कदम! 2025

ज़रा सोचिए… रात के बारह बजे हैं। आप घर लौट रहे हैं, मोबाइल खोलते हैं और ओला या उबर से कैब बुक करते हैं। ऐप दिखाता है — “Driver is 4 minutes away.” पर कुछ ही सेकंड बाद — Trip cancelled by driver. आप दोबारा कोशिश करते हैं, फिर वही होता है। और तीसरी बार जब राइड मिलती है, तो किराया दोगुना दिखता है। अब आप सोचते हैं — “क्या सच में ये टेक्नोलॉजी हमें सर्विस दे रही है, या हम खुद उसके गुलाम बन गए हैं?”

अब सरकार ने तय कर लिया है — “Enough is enough.” अब प्राइवेट ऐप्स की मनमानी नहीं चलेगी। क्योंकि देश में पहली बार लॉन्च हुआ है — Bharat Taxi, एक ऐसा सरकारी प्लेटफॉर्म जो ड्राइवर और यात्री दोनों को बराबर का सम्मान देगा।

यह सिर्फ़ एक ऐप नहीं है — यह एक आर्थिक क्रांति है, जो टैक्सी सेक्टर में “मोनोपॉली” तोड़ने वाली है। एक ऐसा मॉडल जहाँ कोई कंपनी मालिक नहीं होगी, बल्कि हर ड्राइवर खुद का मालिक बनेगा। भारत टैक्सी — यानी By the people, for the people, and of the drivers.

सरकार के सहकारिता मंत्रालय और नेशनल ई-गवर्नेंस डिवीजन (NeGD) ने मिलकर इसे तैयार किया है। इसे एक cooperative model के रूप में बनाया गया है — जहाँ हर ड्राइवर co-owner होगा, न कि किसी प्राइवेट कंपनी का कर्मचारी। और यही इसकी असली ताकत है।

ओला-उबर के दौर में जब हर राइड पर 25 से 35% तक कमीशन काट लिया जाता था, तब कई ड्राइवर आर्थिक तंगी में पहुँच गए थे। कभी ऐप उनकी राइड कैंसल कर देता, कभी फेयर घटा देता, और कभी इंसेंटिव ही रोक देता। नतीजा ये हुआ कि लाखों ड्राइवर जिन्होंने सपनों के साथ गाड़ी खरीदी थी, वो EMI और पेट्रोल के खर्चों में डूब गए।

लेकिन अब तस्वीर बदलने वाली है — क्योंकि भारत टैक्सी का मॉडल ही अलग है। यहाँ हर राइड की पूरी कमाई ड्राइवर के खाते में जाएगी — बिना किसी कमीशन के। ड्राइवर को सिर्फ़ मेंबरशिप प्लान के तहत मामूली चार्ज देना होगा — चाहे वो डेली हो, वीकली या मंथली। यानि अब “कमाई पर कट” नहीं, बल्कि “कमाई पर कंट्रोल” होगा।

इस सेवा का पायलट प्रोजेक्ट नवंबर में दिल्ली से शुरू हो रहा है। शुरुआत में करीब 650 ड्राइवर इस प्लेटफॉर्म से जुड़ेंगे, और दिसंबर तक ये संख्या 5,000 से ज़्यादा हो जाएगी। उसके बाद चरणबद्ध तरीके से इसे देशभर के 20 प्रमुख शहरों में लॉन्च किया जाएगा — मुंबई, पुणे, भोपाल, लखनऊ, जयपुर, अहमदाबाद, चंडीगढ़ और कोलकाता जैसे मेट्रो और टियर-2 शहरों में।

भारत टैक्सी ऐप को एंड्रॉयड और iOS दोनों पर उपलब्ध कराया गया है। इंटरफ़ेस बेहद सिंपल रखा गया है — ताकि कोई भी व्यक्ति, चाहे वो टेक-सैवी हो या नहीं, इसे आसानी से इस्तेमाल कर सके। और खास बात — ऐप हिंदी के अलावा गुजराती, मराठी और तमिल जैसी भाषाओं में भी उपलब्ध होगा। क्योंकि इसका उद्देश्य है — “हर भाषा में भरोसा।”

इस प्रोजेक्ट की चेयरमैनशिप अमूल के MD जयेन मेहता को दी गई है — जो खुद कोऑपरेटिव मॉडल के जीनियस माने जाते हैं। वो वही मॉडल है जिसने गुजरात के दूध किसानों को दुनिया के सबसे बड़े डेयरी नेटवर्क में बदल दिया। अब वही फॉर्मूला भारत के टैक्सी ड्राइवरों के लिए लागू हो रहा है।

सोचिए — जैसे अमूल ने कहा था “The Taste of India,” वैसे ही Bharat Taxi कह रहा है — “The Ride of India.” ये सिर्फ़ ड्राइवरों की आज़ादी की बात नहीं है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा का भी बड़ा कदम है।

ओला-उबर पर कई बार शिकायतें आईं — ड्राइवरों की गलत प्रोफाइलिंग, यात्रियों से बदसलूकी, सर्ज प्राइसिंग, और सिस्टम की पारदर्शिता की कमी। लेकिन भारत टैक्सी में हर ड्राइवर को वेरिफिकेशन और ट्रेनिंग के बाद ही ऑनबोर्ड किया जाएगा। हर गाड़ी की फिटनेस और सेफ्टी चेक होगी, और ट्रिप डेटा पूरी तरह भारत सरकार के सर्वर पर सुरक्षित रहेगा।

यह ऐप राइडर-फ्रेंडली भी है — क्योंकि इसमें “No Cancellation Penalty” सिस्टम होगा। यानि अगर कोई ड्राइवर राइड कैंसल करता है, तो उसका रेटिंग सिस्टम अपने आप एडजस्ट हो जाएगा, जिससे यात्रियों को परेशानी न हो।

सबसे बड़ा बदलाव यह है कि किराए का एल्गोरिथ्म अब बाजार की मनमानी से नहीं, बल्कि एक पारदर्शी फॉर्मूले से तय होगा। किराया तय करते समय ईंधन की कीमत, ट्रैफिक, और दूरी के साथ-साथ “वास्तविक समय” का भी ध्यान रखा जाएगा। इसका मतलब है — रात में या त्यौहारों पर अब 3x सर्ज नहीं दिखेगा।

भारत टैक्सी ड्राइवरों के लिए health insurance और accident cover भी लाने की योजना पर है। यहां तक कि जो ड्राइवर इस प्लेटफॉर्म पर लंबे समय तक जुड़े रहेंगे, उन्हें बोनस पॉइंट्स के रूप में “profit sharing” मिलेगा। यानि अगर Bharat Taxi बढ़ेगा, तो उसका फायदा हर ड्राइवर तक पहुंचेगा।

अब सवाल ये उठता है — क्या सरकार सच में इस सेक्टर में ओला-उबर जैसी दिग्गज कंपनियों को चुनौती दे पाएगी? जवाब है — हाँ, और बहुत मजबूती से। क्योंकि भारत टैक्सी सिर्फ़ एक ऐप नहीं, बल्कि एक इकोनॉमिक आइडिया है — Cooperative Capitalism का। जहाँ मुनाफा भी साझा होगा और जिम्मेदारी भी।

ओला और उबर की शुरुआत ने भारतीय शहरों को कैब की सुविधा तो दी, लेकिन धीरे-धीरे इस सिस्टम में असंतुलन आ गया। ड्राइवर असंतुष्ट, यात्री परेशान, और कंपनी अरबों की कमाई कर रही थी। अब भारत टैक्सी इस संतुलन को वापस लाने आई है — एक निष्पक्ष रास्ते से।

एक अनुमान के मुताबिक, भारत में टैक्सी और कैब सर्विस का मार्केट 2025 तक 70,000 करोड़ का होने जा रहा है। अगर भारत टैक्सी इस मार्केट का सिर्फ़ 10% भी हासिल कर लेती है, तो ये देश के लाखों ड्राइवरों की ज़िंदगी बदल देगी।

सरकार का लक्ष्य है कि अगले 2 वर्षों में कम से कम 1 लाख ड्राइवर इस प्लेटफॉर्म से जुड़ें। और हर साल 5 करोड़ से ज़्यादा यात्राएं Bharat Taxi के माध्यम से हों। इससे सिर्फ़ ट्रांसपोर्टेशन नहीं, बल्कि रोज़गार और डिजिटल अर्थव्यवस्था दोनों को गति मिलेगी।

भारत टैक्सी के लॉन्च का एक और बड़ा पहलू है — “Digital Empowerment of Drivers.” कई ड्राइवर जो पहले सिर्फ़ “काम करने वाले” माने जाते थे, अब “मालिक” बनेंगे। उनका डेटा, उनका ट्रिप रिकॉर्ड, और उनकी आय — सब कुछ पारदर्शी होगा। इससे बैंक लोन, वाहन अपग्रेड और इंश्योरेंस की प्रक्रिया भी आसान बनेगी।

इसके अलावा, ऐप में एक SOS Emergency Button भी होगा — जिससे यात्रियों या ड्राइवर को किसी भी आपात स्थिति में तुरंत स्थानीय पुलिस और हेल्पलाइन से जोड़ा जा सकेगा। AI-आधारित फीचर्स से गाड़ियों की मूवमेंट और ड्राइवर के व्यवहार की निगरानी भी की जाएगी। यानि सेफ्टी पर अब कोई समझौता नहीं।

अब ज़रा ड्राइवरों की तरफ से सोचिए — ओला और उबर में हर राइड पर उन्हें 100 में से 30 से 35 रुपए ऐप को देने पड़ते थे। अब भारत टैक्सी में यही 100 रुपए पूरी तरह उनके पास रहेगा। अगर कोई ड्राइवर महीने में 50,000 की राइड करता है, तो पहले उसे 35,000 ही मिलते थे।

अब वही रकम 50,000 होगी — यानी सालाना लगभग 1.8 लाख की अतिरिक्त कमाई। ऐसे में ड्राइवरों का भरोसा बढ़ना तय है। और जब ड्राइवर खुश होंगे, तो यात्रियों की सेवा भी बेहतर होगी। यही “सहकार मॉडल” का असली दर्शन है — हर किसी का हक बराबर।

भारत टैक्सी आने वाले महीनों में EV Cabs यानी इलेक्ट्रिक टैक्सी सर्विस भी लॉन्च करने की योजना बना रही है। सरकार चाहती है कि ये प्लेटफॉर्म न सिर्फ़ रोजगार दे, बल्कि पर्यावरण की दिशा में भी योगदान करे। इसके लिए एनर्जी मंत्रालय और कई ऑटो कंपनियों से बात चल रही है कि ड्राइवरों को ईवी वाहन खरीदने में सब्सिडी और सस्ती लोन सुविधा दी जाए।

यानि आने वाले सालों में जब आप भारत टैक्सी की सवारी करेंगे, तो वो कार न केवल साफ़-सुथरी होगी, बल्कि ग्रीन एनर्जी से चलने वाली होगी। वो दिन दूर नहीं जब शहरों की सड़कों पर भारत टैक्सी के ईवी फ्लैग चलते दिखेंगे — “Zero Commission, 100% Indian.”

इस पहल से छोटे शहरों के युवाओं को भी फायदा होगा। अब कोई भी व्यक्ति जो अपनी गाड़ी चलाकर ईमानदारी से कमाना चाहता है, वो सीधे इस प्लेटफॉर्म से जुड़ सकता है — बिना किसी बिचौलिए या प्राइवेट एजेंट के। यह एक Digital Self-Employment Revolution बन सकता है — जैसे eNAM ने किसानों को, या UPI ने व्यापारियों को सशक्त किया।

और अगर आप सोच रहे हैं कि ओला और उबर जैसी कंपनियाँ इस चुनौती से कैसे निपटेंगी, तो जवाब है — उन्हें बदलना होगा, वरना पीछे रह जाएँगी। क्योंकि अब वक्त है सहकारिता का, पारदर्शिता का, और आत्मनिर्भरता का।

शहरों में हर दिन लाखों लोग ऑफिस, स्कूल, हॉस्पिटल या रेलवे स्टेशन जाने के लिए कैब बुक करते हैं। अगर अब वो हर सफर एक भारतीय प्लेटफॉर्म से करेंगे, तो उस पैसे का हर रुपया भारत के नागरिकों की जेब में रहेगा — किसी विदेशी कंपनी के सर्वर पर नहीं।

Conclusion

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