Confident Group: बिना कर्ज़ 159 प्रोजेक्ट्स की उड़ान, भारत से अमेरिका तक बना रियल एस्टेट का भरोसेमंद नाम I

एक ऐसा कारोबारी, जो जब पूरा रियल एस्टेट सेक्टर बैंक लोन, EMI और भारी ब्याज के बोझ में डूबा हुआ था, तब शांति से जमीन खरीद रहा था। कोई शोर नहीं, कोई अख़बारों की सुर्ख़ियां नहीं, और न ही बड़े-बड़े वादे। बस एक साइलेंट स्ट्रैटेजी, गहरी समझ और भविष्य को देखने की हिम्मत। आज जब लोग पूछते हैं कि क्या बिना कर्ज के इतना बड़ा रियल एस्टेट साम्राज्य खड़ा किया जा सकता है, तो जवाब एक नाम में छुपा है—चिरियानकंदथ जोसेफ रॉय, यानी सीजे रॉय। यह कहानी सिर्फ़ एक बिल्डर की नहीं है। यह कहानी है धैर्य की, सही समय पर लिए गए फैसलों की और उन जगहों पर भरोसा करने की, जिन्हें बाकी दुनिया नज़रअंदाज़ कर देती है।

केरल के कोच्चि में जन्मे सीजे रॉय आज बेंगलुरु के सबसे अमीर, और प्रभावशाली रियल एस्टेट कारोबारियों में गिने जाते हैं। करीब 8,400 करोड़ रुपये की नेटवर्थ वाला यह शख़्स, बाहर से जितना ग्लैमरस दिखता है, अंदर से उतना ही grounded है। हेलीकॉप्टर, रोल्स-रॉयस, बुगाटी और रेड कार्पेट वाली ज़िंदगी के पीछे एक ऐसी कहानी है, जो बहुत शांत माहौल में शुरू हुई थी। एक मां, जो छोटे स्तर पर प्रॉपर्टी का काम करती थीं, और एक बेटा, जो चुपचाप बैठकर उनके सौदों का हिसाब समझता था।

सीजे रॉय का बचपन सेंट्रल बेंगलुरु में बीता। उस दौर में रियल एस्टेट कोई glamorous बिजनेस नहीं माना जाता था। यह ज़्यादा तर भरोसे और नेटवर्क का खेल था। उनकी मां एक साथ 30 से 40 प्लॉट खरीदती थीं, घर बनवाती थीं और फिर उन्हें बेच देती थीं। रॉय इन सौदों में आगे नहीं रहते थे, लेकिन बैकएंड में बैठकर अकाउंट्स संभालते थे। किस प्लॉट में कितना पैसा फंसा है, कहां से कैश फ्लो आएगा, कौन सा सौदा समय से पहले बेच देना है—ये सब बातें उन्होंने किताबों से नहीं, घर के माहौल से सीखीं।

बाद में उन्होंने खुद कहा था कि उन्होंने बिजनेस अपनी मर्जी से चुना, लेकिन उद्यमी वे संयोग से बन गए। यही शुरुआती exposure आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बना। जब बाकी लोग सिर्फ़ प्राइम लोकेशन और तैयार मार्केट के पीछे भाग रहे थे, तब रॉय जमीन को एक कहानी की तरह पढ़ते थे। उन्हें यह समझ आ गया था कि रियल एस्टेट सिर्फ़ आज की कीमत का खेल नहीं है, यह भविष्य की संभावनाओं पर भरोसे का खेल है। यही वजह थी कि साल 2001 में उन्होंने एक ऐसा दांव खेला, जिसे उस वक्त ज्यादातर लोग पागलपन कहते थे।

उस समय बेंगलुरु के ज़्यादातर डेवलपर्स सेंट्रल इलाकों में फंसे हुए थे। वहीं सीजे रॉय की नजर शहर के बाहरी हिस्सों पर थी। सरजापुर रोड उस वक्त खेती की जमीन थी। न बड़ी सड़कें थीं, न IT पार्क, न मॉल और न ही चमचमाते अपार्टमेंट। एक एकड़ जमीन करीब छह लाख रुपये में मिल जाती थी। लोग कहते थे, यहां कौन रहेगा। शहर बहुत दूर है। लेकिन रॉय को यहां सिर्फ़ मिट्टी नहीं दिख रही थी, उन्हें भविष्य दिख रहा था।

उन्होंने एक सिंपल लॉजिक लगाया। एक तरफ व्हाइटफील्ड तेजी से IT हब बन रहा था, दूसरी तरफ इलेक्ट्रॉनिक सिटी उभर रही थी। दोनों के बीच सरजापुर रोड था। रॉय को लगा कि एक दिन यह इलाका इन दोनों को जोड़ने वाला सेंटर बनेगा। उन्होंने यहां 150 से 200 एकड़ जमीन खरीद ली। परिवार और कंपनी के कई लोगों ने इसका विरोध किया। सबको डर था कि इतना पैसा ऐसी जगह फंसा दिया गया है, जहां अभी कुछ भी नहीं है। लेकिन एक इंसान उनके साथ खड़ा रहा—उनकी पत्नी। उन्होंने रॉय के विज़न पर भरोसा किया।

समय ने साबित किया कि यह फैसला कितना बड़ा था। जैसे-जैसे IT कंपनियां फैलीं, वैसे-वैसे सरजापुर रोड की कीमतें बढ़ने लगीं। कुछ ही सालों में जमीन के दाम दस गुना तक पहुंच गए। यही वो मोड़ था, जिसने सीजे रॉय को आम डेवलपर से अलग खड़ा कर दिया। उन्होंने समझ लिया कि रियल एस्टेट में सबसे बड़ा हथियार पैसा नहीं, patience और timing है।

1991 में शुरू हुआ Confident Group धीरे-धीरे एक मजबूत ब्रांड बन गया। खास बात यह रही कि यह ग्रुप बिना कर्ज के बढ़ता रहा। जब पूरा सेक्टर बैंक लोन पर टिका हुआ था, तब Confident Group अपनी growth खुद के पैसों से करता रहा। 31 मार्च 2025 तक कंपनी की कुल संपत्ति 2,039 करोड़ रुपये थी। भारत, यूएई और अमेरिका में अब तक 159 प्रोजेक्ट पूरे किए जा चुके थे। रियल एस्टेट के अलावा ग्रुप शिक्षा और हॉस्पिटैलिटी में भी सक्रिय रहा। बेंगलुरु का ज़ायन हिल गोल्फ काउंटी, जिसकी वैल्यू करीब 3,000 करोड़ रुपये बताई जाती है, ग्रुप का एक फ्लैगशिप प्रोजेक्ट बन चुका है।

लेकिन हर सफलता की कहानी सीधी नहीं होती। केरल में रॉय की शुरुआत आसान नहीं रही। कोच्चि के पास उनके शुरुआती प्रोजेक्ट्स को लेकर उन्होंने रोड शो किए, मार्केटिंग की, लेकिन खरीदार नहीं आए। फ्लैट तैयार थे, लेकिन बुकिंग नहीं हो रही थी। यह वो दौर था, जब बहुत से लोग हार मान लेते हैं। लेकिन रॉय ने रास्ता बदला, मंज़िल नहीं।

मुंबई में एक मीटिंग के दौरान उन्हें एक नया आइडिया मिला। उन्होंने एक लोकप्रिय रियलिटी शो में इनाम के तौर पर अपना फ्लैट दिया और खुद शो के ब्रांड एंबेसडर बन गए। यह फैसला गेमचेंजर साबित हुआ। टीवी के ज़रिए उनकी पहचान घर-घर पहुंची। लोग सिर्फ़ फ्लैट नहीं खरीद रहे थे, वे एक भरोसेमंद नाम खरीद रहे थे। केरल में Confident Group की बिक्री ने रफ्तार पकड़ ली।

सीजे रॉय की ज़िंदगी का एक और पहलू है, जिसने लोगों का ध्यान खींचा—उनका लग्जरी कार कलेक्शन। 1994 में उन्होंने अपनी पहली कार एक मारुति खरीदी थी। उस समय एक सेल्समैन का व्यवहार उन्हें आज भी याद है। उन्होंने कहा था कि वही अनुभव था, जिसने उन्हें कस्टमर एक्सपीरियंस की अहमियत समझाई।

सालों बाद, जब वे दुनिया की सबसे महंगी कारों के मालिक बने, तब भी उन्होंने अपनी पहली मारुति कार को दोबारा खरीद लिया। उनके कलेक्शन में 12 रोल्स-रॉयस, लैम्बॉर्गिनी और बुगाटी वेरॉन जैसी कारें शामिल रहीं। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि एक रोल्स-रॉयस का सालाना बीमा करीब 18 लाख रुपये होता है। यह शौक भले ही महंगा हो, लेकिन इसके पीछे भी उनकी सोच साफ थी—जो चीज़ आपको खुशी देती है, अगर वह आपकी क्षमता में है, तो उसे जीना चाहिए।

रियल एस्टेट के बाद रॉय ने एंटरटेनमेंट की दुनिया में भी कदम रखा। उन्होंने मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में निवेश किया और 2012 में मोहनलाल अभिनीत फिल्म कसानोवा बनाई। फिल्म भले ही बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन न कर पाई हो, लेकिन इसने रॉय को एक नए सर्कल में पहचान दिलाई।

Confident Group स्टार सिंगर और बिग बॉस मलयालम जैसे बड़े टीवी शोज का टाइटल स्पॉन्सर भी रहा। यह ब्रांड बिल्डिंग का एक अलग ही लेवल था। सोशल मीडिया के दौर में सीजे रॉय भी पीछे नहीं रहे। इंस्टाग्राम पर उनके करीब 13 लाख फॉलोअर्स रहे। उनकी प्रोफाइल पर लग्जरी कारें, हेलीकॉप्टर राइड्स, फैमिली मोमेंट्स और प्रोजेक्ट अपडेट्स दिखते थे। दिलचस्प बात यह थी कि उन्होंने कमेंट्स बंद कर रखे थे। शायद इसलिए, क्योंकि वे शोर से ज़्यादा काम में भरोसा रखते थे।

सीजे रॉय की कहानी हमें एक अहम सबक देती है। रियल एस्टेट सिर्फ़ ऊंची इमारतें बनाने का नाम नहीं है। यह जमीन को पढ़ने, समय को समझने और खुद पर भरोसा रखने का खेल है। बिना कर्ज के 159 प्रोजेक्ट पूरे करना सिर्फ़ फाइनेंशियल डिसिप्लिन नहीं दिखाता, यह मानसिक मजबूती भी दिखाता है। जब पूरी इंडस्ट्री तेज़ी में उधार लेकर दौड़ रही हो, तब धीरे चलना भी एक बड़ा साहस होता है।

आज जब युवा उद्यमी जल्दी अमीर बनने के सपने देखते हैं, तब सीजे रॉय की कहानी याद दिलाती है कि असली दौलत शॉर्टकट से नहीं बनती। वह बनती है चुपचाप, सालों की मेहनत और सही फैसलों से। उन्होंने उन जमीनों पर भरोसा किया, जिन पर कोई और खड़ा होने को तैयार नहीं था। और वक्त ने उन्हें सही साबित किया।

शायद इसी लिए Confident Group की कहानी सिर्फ़ एक बिजनेस सक्सेस स्टोरी नहीं है। यह एक माइंडसेट की कहानी है। एक ऐसा माइंडसेट, जो शोर से दूर रहकर भविष्य की नींव रखता है। और जब वह नींव मजबूत होती है, तो उस पर खड़ा साम्राज्य खुद बोलता है। तो अगली बार जब आप किसी सुनसान सड़क या खाली जमीन को देखें और सोचें कि यहां कुछ नहीं हो सकता, तो सीजे रॉय को याद कीजिए। हो सकता है, वहीं से अगली बड़ी कहानी शुरू होने वाली हो।

Conclusion

सोचिए… एक मां चुपचाप प्लॉट खरीदती है, घर बनाती है—और वही सीख एक बेटे को हजारों करोड़ का साम्राज्य खड़ा करने की ताकत दे देती है। डर ये कि रियल एस्टेट में गलत समय और कर्ज एक झटके में सब मिटा सकता है। और जिज्ञासा ये कि बिना कर्ज कोई इतना बड़ा कैसे बन सकता है? ये कहानी है सीजे रॉय और Confident Group की। बेंगलुरु के उन इलाकों पर भरोसा किया, जिन्हें लोग “बहुत दूर” कहते थे। सरजापुर रोड पर खेती की जमीन खरीदी, जब कोई तैयार नहीं था।

वक्त बदला, शहर फैला, और वही जमीन सोना बन गई। आज Confident Group भारत, यूएई और अमेरिका में 159 प्रोजेक्ट पूरे कर चुका है—वो भी बिना कर्ज। रॉय ने सिखाया कि बिजनेस में शोर नहीं, धैर्य बोलता है। सही जगह, सही समय और आत्मविश्वास—यही असली लग्ज़री है।  अगर हमारे आर्टिकल ने आपको कुछ नया सिखाया हो, तो इसे शेयर करना न भूलें, ताकि यह महत्वपूर्ण जानकारी और लोगों तक पहुँच सके। आपके सुझाव और सवाल हमारे लिए बेहद अहम हैं, इसलिए उन्हें कमेंट सेक्शन में जरूर साझा करें। आपकी प्रतिक्रियाएं हमें बेहतर बनाने में मदद करती हैं।

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