Arvind Srinivas: 31 साल की उम्र में अरबपति – Arvind Srinivas की अद्भुत सफलता कहानी। ✅

कल्पना कीजिए… सिर्फ 31 साल की उम्र और नाम अरबपतियों की सूची में जुड़ जाए। आमतौर पर इस उम्र तक लोग अपनी ज़िंदगी सेट करने की कोशिश ही कर रहे होते हैं—किसी की पहली नौकरी होती है, कोई घर की ईएमआई चुकाना शुरू करता है, कोई अभी भी पढ़ाई पूरी करने में लगा होता है। लेकिन 31 वर्षीय Arvind Srinivas ने वह मुकाम हासिल कर लिया है, जहाँ पहुँचने का सपना करोड़ों लोग देखते हैं और ज़्यादातर अधूरा रह जाता है। उनकी कहानी किसी सपनों की किताब जैसी लगती है।

एक ऐसा नौजवान, जिसका सफर न किसी खानदान की विरासत पर टिका है, न किसी राजनीतिक रसूख पर। यह कहानी है सिर्फ और सिर्फ दिमाग, मेहनत और दूरदर्शिता की। यही वजह है कि हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2025 में Arvind Srinivas का नाम सबसे कम उम्र के भारतीय अरबपति के रूप में दर्ज हुआ है। लेकिन यहाँ असली सवाल यह उठता है – कौन हैं Arvind Srinivas? कैसे चेन्नई की गलियों में पला-बढ़ा यह बच्चा सिलिकॉन वैली तक पहुंचा? और कैसे उसने “Perplexity AI” जैसी कंपनी खड़ी कर दी, जो आज Google और OpenAI जैसे दिग्गजों को चुनौती दे रही है? आज हम इसी विषय पर गहराई में चर्चा करेंगे।

Arvind Srinivas का जन्म 7 जून 1994 को तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में हुआ। चेन्नई एक ऐसा शहर है, जो परंपराओं और आधुनिकता का अनोखा संगम है। एक तरफ यहाँ शास्त्रीय संगीत और मंदिरों की संस्कृति है, तो दूसरी तरफ IIT मद्रास और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री जैसी आधुनिक पहचान भी है। इसी शहर में मध्यमवर्गीय परिवार में पैदा हुए Arvind Srinivas बचपन से ही मशीनों और गणित में खो जाते थे। उनके घर में अक्सर बिजली जाती रहती थी, और उसी दौरान वे मोमबत्ती की रोशनी में किताबें पढ़ते। पड़ोसियों को लगता था कि यह बच्चा ज़रूर कोई बड़ा वैज्ञानिक बनेगा। जहाँ दूसरे बच्चे क्रिकेट और कबड्डी खेलते, वहीं Arvind Srinivas का मन कंप्यूटर और किताबों में रमता।

उनकी यह जिज्ञासा उन्हें IIT मद्रास तक ले गई। IIT मद्रास, जिसे एशिया के टॉप टेक्निकल संस्थानों में गिना जाता है, वहाँ प्रवेश पाना किसी सपने से कम नहीं होता। हज़ारों-लाखों छात्र हर साल JEE जैसी कठिन परीक्षा देते हैं, लेकिन सिर्फ चुनिंदा ही इसमें प्रवेश पा पाते हैं। Arvind Srinivas ने सिर्फ प्रवेश ही नहीं पाया, बल्कि उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक और एमटेक दोनों डिग्रियाँ हासिल कीं। IIT में पढ़ाई का माहौल ऐसा होता है कि छात्र सिर्फ किताबें ही नहीं पढ़ते, बल्कि इनोवेशन और रिसर्च की दिशा में भी सोचते हैं। यही माहौल अरविंद की सोच को और तेज करता गया। प्रोफेसर अक्सर कहते थे – “Arvind Srinivas सिर्फ किताबें नहीं पढ़ता, वह भविष्य को पढ़ता है।”

IIT के बाद Arvind Srinivas का अगला पड़ाव था अमेरिका। उन्होंने कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी, बर्कले से कंप्यूटर साइंस में पीएचडी की। यह वह दौर था, जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस धीरे-धीरे दुनिया का सबसे हॉट रिसर्च एरिया बन रहा था। बर्कले में Arvind Srinivas ने Reinforcement Learning, Image Generation और Transformer-Based Vision Models पर गहरी रिसर्च की। Reinforcement Learning वही तकनीक है, जिससे मशीनें खुद सीख सकती हैं—जैसे इंसान ट्रायल-एंड-एरर से सीखता है। ट्रांसफॉर्मर मॉडल ने AI की दुनिया में क्रांति कर दी, क्योंकि यही तकनीक ChatGPT जैसे मॉडलों की नींव बनी। अरविंद ने इन क्षेत्रों में जो काम किया, उसने उनकी सोच को और व्यापक बनाया।

उनका करियर असली उड़ान भरने लगा 2018 में, जब उन्हें OpenAI में रिसर्च इंटर्न बनने का मौका मिला। OpenAI, जो बाद में ChatGPT जैसी तकनीक से दुनिया को बदलने वाला था, वहाँ काम करना किसी सपने जैसा था। यहाँ Arvind Srinivas ने देखा कि कैसे एक छोटा-सा विचार पूरी दुनिया की तकनीक को बदल सकता है। इसके बाद उन्होंने Google और DeepMind में भी काम किया। DeepMind, जिसने AlphaGo जैसे AI प्रोग्राम बनाए, वहाँ Arvind Srinivas का काम था मशीनों को जटिल समस्याएँ हल करना सिखाना। यह अनुभव उनके लिए सोने पर सुहागा था।

लेकिन Arvind Srinivas का असली सपना था—अपना कुछ बनाना। 2022 में उन्होंने अपने दो साथियों – डेनिस याराट्स और एंडी कोनविंस्की – के साथ मिलकर “Perplexity AI” शुरू किया। यह एक चैट-बेस्ड सर्च इंजन था, लेकिन इसमें खासियत यह थी कि यह सिर्फ लिंक नहीं देता, बल्कि सटीक और संदर्भों से भरे हुए जवाब देता है। यूज़र्स को यह भरोसा होने लगा कि अगर गूगल पर बहुत से लिंक मिलते हैं, तो Perplexity पर उन्हें सीधे सही जवाब मिलेगा। धीरे-धीरे यह प्लेटफ़ॉर्म हर टेक्नोलॉजी चर्चा का हिस्सा बन गया।

जुलाई 2025 तक Perplexity की वैल्यूएशन 18 अरब डॉलर यानी करीब 1,58,400 करोड़ रुपये हो गई। यह वैल्यूएशन किसी यूनिकॉर्न से कहीं ज्यादा बड़ी है। और इसी वजह से Arvind Srinivas की व्यक्तिगत संपत्ति 21,190 करोड़ रुपये पहुँच गई। इस उम्र में इतनी संपत्ति हासिल करना किसी चमत्कार से कम नहीं।

यहाँ खास बात यह है कि Arvind Srinivas की संपत्ति किसी विरासत से नहीं आई। उन्होंने किसी फैक्ट्री या पुरानी कंपनी को नहीं संभाला। उनकी दौलत पूरी तरह उनके दिमाग और तकनीकी विज़न से आई। यही वजह है कि हुरुन इंडिया ने उनकी उपलब्धि को “Historic” कहा।

Arvind Srinivas का नाम तब और सुर्खियों में आया, जब दिसंबर 2024 में उन्होंने ट्वीट किया कि वह तीन साल से अमेरिकी ग्रीन कार्ड का इंतज़ार कर रहे हैं। इस पर एलन मस्क ने जवाब दिया – “Yes।” एक शब्द का यह जवाब अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम पर बहस का कारण बन गया। यह दिखाता है कि भारतीय टैलेंट अमेरिका के लिए कितना महत्वपूर्ण है और वहाँ की राजनीति इसे कैसे देखती है।

2024 में टाइम मैगज़ीन ने भी Arvind Srinivas को “AI के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों” की सूची में शामिल किया। यह उपलब्धि दिखाती है कि अब वह सिर्फ भारत के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा बन चुके हैं।

Perplexity AI ने कई प्रोडक्ट्स लॉन्च किए – Perplexity Pro, Perplexity Assistant और Perplexity Comet। इन प्रोडक्ट्स ने AI को सिर्फ टेक्नोलॉजी तक सीमित नहीं रखा, बल्कि आम लोगों के लिए उपयोगी बनाया। यही वजह है कि आज Perplexity को Google Gemini और OpenAI ChatGPT का सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी माना जा रहा है।

Investors की बात करें तो Jeff Bezos जैसे बड़े नामों ने Perplexity में Investment किया। यह Investment केवल पैसा नहीं था, बल्कि विश्वास का प्रतीक था। यही कारण है कि कंपनी इतनी तेजी से बढ़ पाई।

हुरुन रिपोर्ट का कहना है कि Arvind Srinivas का अरबपति बनना भारत के टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम के लिए गर्व की बात है। यह दिखाता है कि भारत अब सिर्फ सर्विस सेक्टर पर निर्भर नहीं, बल्कि Deep-Tech और प्रोडक्ट इनोवेशन की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।

अगर हम बाकी युवाओं को देखें, तो Zepto के कैवल्य वोहरा और आदित पलिचा, OYO के रितेश अग्रवाल, BharatPe के शाश्वत नकरानी और TAC Security के त्रिशनीत अरोड़ा भी इस लिस्ट में हैं। लेकिन Arvind Srinivas की 21,190 करोड़ की नेटवर्थ उन्हें सबसे आगे खड़ा करती है।

उनकी कहानी प्रेरणा है हर उस युवा के लिए जो मानता है कि सिर्फ जॉब से नहीं, बल्कि इनोवेशन और रिस्क लेने से भी दुनिया बदली जा सकती है। यह कहानी है IIT की गलियों से लेकर सिलिकॉन वैली तक और फिर अरबपतियों की सूची तक पहुंचने की।

Conclusion

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