सोचिए… आप एक ऐसा Investment करते हैं जिसे कोई गंभीरता से नहीं लेता, एक ऐसा ब्रांड जिसे बाकी सभी शार्क टेबल पर “boring”, “भीड़ भरा”, “बहुत common” कहकर रिजेक्ट कर देते हैं। आप अकेले होते हैं—एक कमरे में बैठे हुए, सामने कुछ पैकेट्स में भुजिया, चिप्स और नमकीन रखे होते हैं। कैमरे चल रहे होते हैं, और सबकी नज़रें आप पर होती हैं। आप सोचते हैं—क्या 12 लाख रुपये लगाना समझदारी है? क्या यह सही फैसला है? और फिर आप अपनी intuition पर भरोसा करते हैं।
चार साल बाद दुनिया देख रही होती है कि वही छोटा-सा फैसला 12 लाख को 40 करोड़ में बदल चुका है। 33,000 प्रतिशत का रिटर्न। एक ऐसा रिटर्न जो देश की किसी भी ताकतवर टेक कंपनी ने कभी नहीं दिया। एक ऐसा रिटर्न जिसे खुद Aman Gupta कहते हैं—”यह मेरी जिंदगी का सबसे बेहतरीन investment था।” और इस कहानी की शुरुआत एक snack packet से होती है।
Aman Gupta—boAt के co-founder, जिनका नाम आज भारत के सबसे सफल उद्यमियों में लिया जाता है। एक समय नौकरीपेशा युवा, फिर उद्यमी, फिर टीवी स्टार, और अब इंडिया के सबसे चर्चित Investors में से एक। लेकिन अमन की असल brilliance उनके फैसलों में है—वो फैसले जिन्हें बाकी दुनिया समझ नहीं पाती। शार्क टैंक इंडिया के सीजन 1 में जब Let’s Try नाम की एक छोटी-सी snack company pitch करने आई, तो कमरे में एक अजीब सा माहौल था।
किसी ने कहा बाजार बहुत भीड़ वाला है, किसी ने कहा differentiation नहीं दिख रहा, किसी ने कहा scalability doubtful है। लेकिन Aman Gupta ने ब्रांड की पैकेजिंग से आगे देखने की क्षमता दिखाई—उन्होंने product नहीं, passion देखा। उन्होंने snacks नहीं, story देखी। और शायद यही वजह थी कि उन्होंने एक ऐसे brand पर दांव लगाया जिसे बाकी सबने नज़रअंदाज़ कर दिया था।
Let’s Try—एक साधारण घरेलू snacks बनाने वाली कंपनी, लेकिन असाधारण कहानी। ब्रांड के founder नितिन कालरा और उनके परिवार ने अपनी जिंदगी की एक बड़ी tragedy को motivation बनाया। जब नितिन के छोटे भतीजे को थैलेसीमिया हो गया, परिवार अचानक उन चीजों की तरफ देखना शुरू हुआ जिन्हें हम सब casually consume करते हैं—chips, namkeen, packaged snacks।
उन्होंने ingredients पढ़ना शुरू किया, preservatives की लिस्ट देखी, तेल की quality समझी, और पाया कि बाजार में “clean snacks” नाम की चीज़ लगभग नहीं है। एक तरफ बड़े-बड़े ब्रांड chemical-heavy products बेच रहे थे, और दूसरी तरफ middle-class families के पास कोई healthy विकल्प ही नहीं था। यहीं से Let’s Try का जन्म हुआ—100% मूंगफली के तेल में तले snacks, कोई artificial flavour नहीं, कोई colour नहीं, कोई trans-fat नहीं। केवल honest food, honest ingredients, honest flavours।
शार्क टैंक में आए वक्त Let’s Try एक struggling brand था—अच्छे प्रोडक्ट थे, लेकिन limited resources, limited reach, limited marketing। और यहीं आया Aman Gupta का दिमाग। उन्होंने 12 लाख रुपये लगाए—कंपनी में शुरुआती हिस्सेदारी खरीदी, और चार साल बाद वही हिस्सेदारी 40 करोड़ रुपये की हो चुकी थी।
यह सिर्फ एक success नहीं—यह एक lesson है कि early-stage investing किस तरह extraordinary returns दे सकती है। लोग अमन को tech investments के लिए जानते हैं—boAt, consumer electronics, audio devices—लेकिन यह सबसे ironic बात थी कि Nvidia जैसी global tech कंपनियों ने उन्हें बड़ा return नहीं दिया, लेकिन एक छोटी-सी भुजिया कंपनी ने history बना दी।
अमन कहते हैं, “मैं excel sheets नहीं, founders पढ़ता हूँ।” और यह बात Let’s Try की कहानी में हर जगह दिखती है। नितिन कालरा—एक वक्त national-level rifle shooter, कॉलेज में McDonald’s में पार्ट-टाइम काम करते थे जहाँ उन्हें टेबल पोंछने के लिए प्रति घंटे सिर्फ 20 रुपये मिलते थे। बाद में एक multinational कंपनी में 1 करोड़ रुपये सालाना की नौकरी कर रहे थे। सब ठीक था। लेकिन दिल कहीं और था।
उन्हें पता था कि इंडिया में snacks market भले भीड़ वाला है—लेकिन साफ, honest snacks की बहुत बड़ी कमी है। नौकरी छोड़ी। अपनी life savings लगाई। फैमिली को समझाया। और भारत के सबसे कठिन categories में कदम रखा—snacks category। एक ऐसी category जहाँ PepsiCo से लेकर Haldiram तक दिग्गज बैठे हैं। competition इतना कि कोई sane investor प्रवेश नहीं करता। लेकिन साहस रखने वाला हमेशा अलग दिखता है।
Let’s Try की शुरुआत होते ही उन्होंने दो चीजें clear कर दीं—product quality और consumer trust। 100% मूंगफली का तेल, कोई preservative नहीं, कोई artificial colour नहीं, कोई palm oil नहीं। भारत का सबसे बड़ा market—middle class—clean snacks चाहता था, लेकिन options नहीं थे। Let’s Try ने वही gap भरा। धीरे-धीरे उनके products BigBasket, Blinkit, DMart, Amazon, Flipkart, Zepto, Reliance Retail में आने लगे। शिकायतें कम हुईं, repeat customers बढ़े, और सबसे बड़ा game changer आया—Shark Tank का episode।
उस दिन टीवी पर जब Aman Gupta ने 12 लाख रुपये लगाए, उन्होंने सिर्फ एक ब्रांड में Investment नहीं किया—उन्होंने पूरे इंडिया को यह message दिया कि छोटा बाजार नहीं, छोटा vision होता है। बाकी शार्क्स ने deal नहीं ली, लेकिन अमन के लिए यह gut-feeling moment था। और यही gut-feeling चार साल बाद एक history बन गई—33,000% का return। इंटरनेट टूट पड़ा।
लोग disbelief में थे। कोई ट्वीट कर रहा था कि “भारतीय stock market इतना return नहीं दे सकता।” कोई कह रहा था, “Real money silicon chips में नहीं, कुरकुरे chips में है।” कोई मज़ाक में कह रहा था कि “Aman Gupta is the Warren Buffet of Namkeen.” और सच कहें तो—यह मज़ाक होते हुए भी एक harsh truth है। Early-stage investing lottery नहीं, clarity है—और clarity उसी के पास होती है जो लोगों को पढ़ना जानता है।
Aman Gupta ने बाद में media से कहा—“यह मेरे career का सबसे अच्छा investment है।” और शायद यह statement इसलिए और दमदार था क्योंकि यह दुनिया को याद दिलाता है कि India के छोटे cities, small factories, छोटे kitchens से भी multibillion-dollar brands निकल सकते हैं। Let’s Try का journey सिर्फ numbers की कहानी नहीं—यह resilience, honesty और family values की कहानी है। नितिन कालरा का परिवार रोज़ 16 से 18 घंटे काम करता था, उनकी माँ kitchen में recipes बनाती थीं, उनकी wife packaging संभालती थीं, उनका पूरा परिवार इस vision में लगा था कि भारत के घरों तक साफ snacks पहुँचें। और आज वही घर घर में उनकी मेहनत का स्वाद पहुँच रहा है।
यह कहानी हमें यह भी सिखाती है कि startup सफलता सिलिकॉन वैली से ही नहीं आती। गूगल, एनवीडिया, टेस्ला में Investment करने वाला हर कोई सफल नहीं होता। कभी-कभी भारत के ग्राउंड रियलिटी में छिपे businesses ही सबसे बड़े champions बनते हैं। Let’s Try ने यह साबित किया कि भारत में snacks, food, beverages—इन categories में भी massive growth है। भारत की 140 करोड़ की आबादी snacks खाती है—इतना simple मगर powerful insight। और जहाँ market huge हो, वहाँ अगर product honest हो—growth unstoppable होती है।
आज अमन की हिस्सेदारी 40 करोड़ रुपये की है—लेकिन अगर Let’s Try future में IPO लाता है, या बड़े FMCG giants इसे खरीदते हैं—यह number 40 करोड़ से 400 करोड़ तक भी जा सकता है। और यह possibility real है, क्योंकि हर बड़ा FMCG giant भारत में clean snacks, healthy snacking, transparency-based brands acquire कर रहा है। और Let’s Try इस category का सबसे authentic player बन चुका है।
अब बात करें उस बड़े message की, जो यह कहानी भारत के युवाओं को देती है। पहला—कभी भी किसी category को “boring” समझकर ignore मत करो। भारत की सबसे बड़ी successes हर बार boring categories से आई हैं—Amul, Haldiram, Nirma, Patanjali, Paper Boat, Parle-G, और अब Let’s Try। दूसरा—छोटा Investment भी अगर सही founder में लगाया जाए, तो वह investor की life बदल सकता है। तीसरा—passion हमेशा excel sheet को हराता है। चौथा—clean products का future बहुत बड़ा है। और पाँचवाँ lesson—असरदार Investment हमेशा शोर में नहीं, सन्नाटे में मिलता है।
Let’s Try की सफलता यह भी साबित करती है कि भारत का FMCG market अभी भी अधूरा है। नए brands के लिए अभी भी बहुत जगह है। लोग healthy, clean, preservative-free options चाहते हैं। और इसी need को Let’s Try ने tap किया। यही कारण है कि आज यह ब्रांड Blinkit से लेकर Amazon तक हर जगह मौजूद है।
Conclusion
अगर हमारे आर्टिकल ने आपको कुछ नया सिखाया हो, तो इसे शेयर करना न भूलें, ताकि यह महत्वपूर्ण जानकारी और लोगों तक पहुँच सके। आपके सुझाव और सवाल हमारे लिए बेहद अहम हैं, इसलिए उन्हें कमेंट सेक्शन में जरूर साझा करें। आपकी प्रतिक्रियाएं हमें बेहतर बनाने में मदद करती हैं।
GRT Business विभिन्न समाचार एजेंसियों, जनमत और सार्वजनिक स्रोतों से जानकारी लेकर आपके लिए सटीक और सत्यापित कंटेंट प्रस्तुत करने का प्रयास करता है। हालांकि, किसी भी त्रुटि या विवाद के लिए हम जिम्मेदार नहीं हैं। हमारा उद्देश्य आपके ज्ञान को बढ़ाना और आपको सही तथ्यों से अवगत कराना है।
अधिक जानकारी के लिए आप हमारे GRT Business Youtube चैनल पर भी विजिट कर सकते हैं। धन्यवाद!”




