Pavel Durov: न शेख, न राजकुमार… दुबई का सबसे अमीर शख्स और उसके विवादों की दास्तान। 2025

ज़रा सोचिए… जब आप दुबई का नाम सुनते हैं, तो आपकी कल्पना में क्या आता है? सोने से बनी कारें, हीरे जड़े हुए मोबाइल फोन, पाम आइलैंड पर फैले आलीशान बंगले, दुनिया की सबसे ऊँची इमारत बुर्ज खलीफ़ा और राजसी ठाट-बाट में जीते शेख और राजकुमार। हम सब यही मान लेते हैं कि इस शहर की सबसे बड़ी दौलत केवल तेल से निकली है और इसका मालिक कोई शाही परिवार का सदस्य ही होगा। लेकिन सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है।

दुबई का सबसे अमीर आदमी न तो किसी शाही खून से जुड़ा है और न ही उसका संबंध तेल के कुओं से है। यह व्यक्ति है—Pavel Durov, एक रूसी मूल का टेक उद्यमी, जिसे लोग “रूस का जुकरबर्ग” भी कहते हैं। उनकी कहानी किसी फ़िल्मी पटकथा से कम नहीं लगती—एक बाग़ी युवा जिसने सरकार से टकराकर अपनी मातृभूमि छोड़ी, अपनी बनाई कंपनी खो दी, लेकिन फिर एक नए विचार के साथ खड़ा हुआ और आज दुबई की सबसे अमीर पहचान बन चुका है। आज हम इसी विषय पर गहराई में चर्चा करेंगे।

आपको बता दें कि दुबई की पहचान हमेशा से शाही वैभव और तेल की दौलत रही है। यहाँ अमीरी का अंदाज़ ही अलग है। गाड़ियों की शौक़ीन यहाँ फेरारी और लैम्बोर्गिनी नहीं गिनते, बल्कि ऊँटों पर सोने की जीन सजाते हैं। होटल ऐसे हैं जहाँ सात सितारों से भी ऊपर की लक्ज़री मिलती है। ऐसे शहर में यह सुनकर हैरानी होती है कि सबसे अमीर इंसान कोई शेख या राजकुमार नहीं, बल्कि एक Migrant है, जिसने अपनी पहचान टेक्नोलॉजी से बनाई।

29 सितंबर 2025 को फोर्ब्स ने जब Pavel Durov की नेटवर्थ 17.1 अरब डॉलर बताई, यानी भारतीय मुद्रा में लगभग 1,51,676 करोड़ रुपये, तो यह खबर पूरी दुनिया के लिए चौंकाने वाली थी। दुबई जैसे शहर में जहाँ दौलत का प्रतीक हमेशा शाही घराने रहे हैं, वहाँ एक टेक उद्यमी का सबसे अमीर बनना, दुनिया के बदलते आर्थिक समीकरणों की सबसे बड़ी मिसाल है।

Pavel Durov का जन्म 1984 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में हुआ। उनका परिवार साधारण था लेकिन शिक्षा और विद्या की परंपरा गहरी थी। उनके पिता एक प्रोफेसर थे, जो Linguistics के विद्वान माने जाते थे। घर में किताबों का माहौल था, और बचपन से ही Pavel Durov को यह एहसास हो गया था कि अगर किसी के पास असली ताक़त है, तो वह है ज्ञान और विचारों की ताक़त। स्कूल के दिनों में वे हमेशा अपनी क्लास के सबसे आगे रहने वाले छात्रों में थे। उनमें एक अलग आत्मविश्वास था और साथ ही टेक्नोलॉजी के प्रति दीवानगी भी। कंप्यूटर के साथ उनका पहला परिचय किशोरावस्था में हुआ, और उसके बाद से उन्होंने कोडिंग को अपना जुनून बना लिया।

पढ़ाई पूरी करने के बाद Pavel Durov ने सेंट पीटर्सबर्ग स्टेट यूनिवर्सिटी से फिलोलॉजी में डिग्री हासिल की। लेकिन यह डिग्री उनके जीवन का अंतिम मुकाम नहीं थी, बल्कि एक शुरुआत थी। 2006 में, सिर्फ़ 22 साल की उम्र में, उन्होंने अपने भाई निकोलाई के साथ मिलकर लॉन्च किया VKontakte। यह रूस का पहला बड़ा सोशल नेटवर्क था। उस समय रूस में फेसबुक का असर बहुत कम था और स्थानीय लोगों के लिए, एक ऐसा प्लेटफ़ॉर्म चाहिए था जहाँ वे अपनी भाषा और संस्कृति के साथ जुड़ सकें। VK ने यह जगह पूरी कर दी। कुछ ही समय में VK रूस का सबसे बड़ा सोशल नेटवर्क बन गया और इसके 10 करोड़ से ज़्यादा यूज़र्स हो गए।

Pavel Durov की सोच और उनके Innovation ने उन्हें “रूस का जुकरबर्ग” बना दिया। उनकी तुलना फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग से होने लगी। फोर्ब्स जैसी पत्रिकाओं ने उन्हें रूस की नई पीढ़ी का चेहरा बताया। लेकिन असली परीक्षा तब आई जब रूस की गुप्तचर एजेंसियों ने उनसे VK के यूज़र्स का डेटा माँगा। सरकार चाहती थी कि वह लोगों की चैट्स और निजी जानकारियाँ सौंप दे, ताकि वे राजनीतिक विरोधियों और कार्यकर्ताओं पर नज़र रख सकें। दुरोव ने साफ़ इनकार कर दिया। उनके लिए प्राइवेसी सिर्फ़ तकनीकी फीचर नहीं थी, बल्कि एक सिद्धांत था। उन्होंने कहा कि अगर यूज़र्स को भरोसा है कि उनका डेटा सुरक्षित है, तभी कोई सोशल नेटवर्क जिंदा रह सकता है।

लेकिन रूस की सरकार यह मानने को तैयार नहीं थी। परिणामस्वरूप Pavel Durov पर दबाव बढ़ता गया। उन्हें VK से बाहर कर दिया गया और अपनी हिस्सेदारी बेचनी पड़ी। इस घटना ने उन्हें तोड़ने के बजाय और मज़बूत बना दिया। उन्होंने तय किया कि अब वे अपनी ज़िंदगी का अगला अध्याय शुरू करेंगे और यह अध्याय पहले से कहीं बड़ा होगा।

2013 में उन्होंने लॉन्च किया Telegram—एक ऐसा मैसेजिंग ऐप जिसने पूरी दुनिया की तस्वीर बदल दी। टेलीग्राम ने शुरू से ही खुद को सिर्फ़ चैटिंग ऐप नहीं, बल्कि प्राइवेसी और आज़ादी का प्रतीक बताया। इसमें एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन था, जिससे कोई भी सरकार या कंपनी यूज़र्स की चैट्स तक नहीं पहुँच सकती थी। यही इसकी सबसे बड़ी ताक़त बनी। लोग धीरे-धीरे वॉट्सऐप और फेसबुक मैसेंजर से हटकर टेलीग्राम पर आने लगे। आज 2025 में, टेलीग्राम के 1 अरब से ज़्यादा मासिक एक्टिव यूज़र्स हैं।

टेलीग्राम की सफलता ने Pavel Durov को अरबपति बना दिया। लेकिन यह सफलता विवादों से अछूती नहीं रही। रूस ने 2018 से 2021 तक टेलीग्राम पर बैन लगा दिया क्योंकि दुरोव ने सरकार को डेटा देने से साफ मना कर दिया था। अमेरिका और यूरोप की कई एजेंसियाँ भी समय-समय पर उनसे इसी तरह की माँग करती रही हैं। लेकिन Pavel Durov हमेशा अपने सिद्धांत पर टिके रहे—“प्राइवेसी पर कोई समझौता नहीं।”

2017 में उन्होंने दुबई को अपना नया घर चुना। दुबई सिर्फ़ टैक्स-फ्रेंडली शहर नहीं है, बल्कि यह वैश्विक बिज़नेस का नया हब बन चुका है। यहाँ से वे टेलीग्राम को बिना किसी दबाव के चला सकते थे। उन्होंने दुबई में नागरिकता ली और जुमेराह आइलैंड्स पर 15,000 वर्ग फुट की हवेली खरीदी। इस हवेली की भव्यता उनकी सफलता का प्रतीक है, लेकिन उनका असली गर्व हमेशा टेलीग्राम ही रहा।

हालाँकि, विवाद उनका पीछा यहाँ भी नहीं छोड़ते। 2024 में उन्हें फ्रांस में गिरफ्तार किया गया, आरोप था कि टेलीग्राम का इस्तेमाल अपराध और आतंकवादी गतिविधियों में हो रहा है। हालाँकि बाद में वे जमानत पर छूट गए, लेकिन अब भी फ्रांस में न्यायिक निगरानी में हैं। इसी दौरान उन्होंने फ्रांसीसी खुफ़िया एजेंसियों पर आरोप लगाया कि, उनसे मोल्दोवा के चुनावों के दौरान टेलीग्राम चैनलों को सेंसर करने का दबाव बनाया गया। Pavel Durov का दावा था कि उन्हें अदालत में राहत देने के बदले यह सौदा करने की कोशिश की गई। लेकिन फ्रांस ने इसे खारिज कर दिया।

उनका निजी जीवन भी हमेशा सुर्खियों में रहा है। कहा जाता है कि उनकी दो पूर्व प्रेमिकाओं से पाँच बच्चे हैं और उन्होंने यह भी दावा किया है कि, उन्होंने स्पर्म डोनेशन से करीब 100 बच्चों को जन्म दिया है। उनकी यह अपरंपरागत सोच और जीवनशैली उन्हें और भी रहस्यमयी बनाती है।

आज Pavel Durov दुबई के सबसे अमीर इंसान हैं। उनकी कहानी सिर्फ़ दौलत की कहानी नहीं है, यह बगावत, स्वतंत्रता, प्राइवेसी और टेक्नोलॉजी की ताक़त की कहानी है। दुबई जैसे शहर में जहाँ तेल और शाही परिवार हमेशा अमीरी की पहचान रहे हैं, वहाँ एक रूसी उद्यमी का नंबर वन बनना यह साबित करता है कि अब 21वीं सदी का असली तेल डेटा और टेक्नोलॉजी है।

Conclusion

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