सोचिए, अगर एक दिन ऐसा हो कि दो सबसे ताकतवर देश—अमेरिका और चीन—जिन्हें दुनिया आज तक Global नेतृत्व का प्रतीक मानती रही, वे अचानक अविश्वास के केंद्र बन जाएं, तो क्या होगा? और अगर उसी समय एक उभरती हुई शक्ति, जिसका नाम दशकों तक ‘गुटनिरपेक्ष’ रहा, वह आगे आकर दुनिया को नेतृत्व देने लगे तो?
यह कोई कल्पना नहीं, बल्कि आज की Global सच्चाई है—जहां अमेरिका की वादाखिलाफी और चीन की धोखेबाज़ी के बीच India ‘भरोसे’ का नया नाम बनकर उभरा है। एक ऐसा देश जो न केवल अपनी तरक्की कर रहा है, बल्कि उस तरक्की के साथ दुनिया को भी जोड़ रहा है। यह कहानी सिर्फ आंकड़ों की नहीं, यह उस सोच की है जो कहती है—सच्चा नेतृत्व ताकत से नहीं, भरोसे से आता है। आज हम इसी विषय पर गहराई में चर्चा करेंगे।
आपको बता दें कि दुनिया ने दो महाशक्तियों का असली चरित्र देख लिया है। अमेरिका, जो कभी वादों का पक्का माना जाता था, अब एक ऐसे देश के रूप में देखा जा रहा है, जो न तो स्थिर है और न ही भरोसेमंद। अफगानिस्तान से अचानक सैनिकों की वापसी हो या ट्रम्प-बाइडन के बीच बार-बार बदलती विदेश नीतियां, इन सबने दुनिया के छोटे और मध्यम देशों को असहज कर दिया है। आज अमेरिका जो कहता है, उस पर कल वह टिका रहेगा या नहीं—इसकी कोई गारंटी नहीं। यही नहीं, अमेरिका का Internal political polarization भी उसकी Global स्थिति को कमजोर कर रहा है।
वहीं दूसरी तरफ चीन की सच्चाई और भी खतरनाक है। चीन ‘डेट ट्रैप डिप्लोमेसी’ के जरिए गरीब और विकासशील देशों को अपने कर्ज के जाल में फंसा चुका है। श्रीलंका इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जिसने चीन से लिए गए कर्ज के चलते हंबनटोटा पोर्ट सौ साल के लिए चीन को लीज़ पर दे दिया।
मालदीव, अफ्रीकी देशों और मध्य एशिया के कई राष्ट्रों ने भी चीन के Investment के पीछे छिपे इरादों को अब पहचान लिया है। साथ ही, दक्षिण चीन सागर में उसकी आक्रामकता, हांगकांग में लोकतंत्र की हत्या, और व्यापारिक मामलों में Intellectual property की चोरी जैसे मामलों ने चीन को Global विश्वास से दूर कर दिया है।
और ऐसे वक्त में India दुनिया के लिए एक स्थिर, जिम्मेदार और भरोसेमंद ताकत बनकर उभरा है। भारत की छवि एक ऐसे राष्ट्र की है, जो न तो अपनी शर्तें थोपता है और न ही कर्ज के जरिए किसी को गुलाम बनाता है। बल्कि, भारत सहयोग की भावना से आगे बढ़ता है। चाहे कोविड के दौरान दुनिया भर में वैक्सीन भेजना हो, या फिर प्राकृतिक आपदाओं के समय मदद के लिए सबसे पहले आगे आना—भारत ने दिखा दिया है कि वह केवल एक उभरती हुई आर्थिक शक्ति नहीं, बल्कि एक नैतिक शक्ति भी है।
मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने भी हाल ही में कहा कि भारत आज उस Global व्यवस्था में ‘उम्मीद की किरण’ बनकर खड़ा है, जो अस्थिरता और अविश्वास के दौर से गुजर रही है। उन्होंने इस तथ्य पर बल दिया कि 2022 के बाद से दुनिया को राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा के मोर्चे पर जितनी अनिश्चितताएं झेलनी पड़ी हैं, उनमें भारत की आर्थिक स्थिरता और नीतिगत स्पष्टता ने Investors और साझेदारों का ध्यान खींचा है।
आज India की ग्रोथ रेट 6.5% है, और यह ऐसे समय में है जब पश्चिमी अर्थव्यवस्थाएं मंदी के कगार पर खड़ी हैं। भारत का बॉन्ड यील्ड अंतर भी अमेरिका की तुलना में घट रहा है, जो यह दर्शाता है कि Global Investors भारत को अब जोखिम नहीं, बल्कि अवसर के रूप में देख रहे हैं। यह उस भरोसे का नतीजा है जो भारत की पारदर्शिता, लोकतंत्र और दीर्घकालिक सोच ने दुनिया को दिया है।
अमेरिका और चीन, दोनों ने हाल के वर्षों में अपने-अपने तरीके से Global विश्वास खोया है। अमेरिका की विदेश नीति का बार-बार बदलना, अफगानिस्तान से वापसी जैसा निर्णय, और घरेलू राजनीतिक अस्थिरता ने दुनिया को यह संकेत दिया है कि वह अब एक निश्चित दिशा में नहीं चल रहा। वहीं, चीन की आक्रामक विस्तारवादी नीतियां, व्यापारिक धोखाधड़ी और दबाव की रणनीतियों ने उसे एक ब्लैकमेलर के रूप में स्थापित कर दिया है। इन दोनों के विपरीत, भारत ने भरोसे और समभाव की नीति से एक अलग मार्ग चुना है।
India की नीति सदैव बहुपक्षीय रही है। वह न किसी गुट में बंधा, न किसी विचारधारा का अंधभक्त बना। इसी कारण से भारत को global arbitrator के रूप में देखा जा रहा है—चाहे रूस-यूक्रेन युद्ध हो, या फिर इजराइल-फलस्तीन संघर्ष। भारत की तटस्थता उसका सबसे बड़ा हथियार बन चुकी है। भारत का लोकतांत्रिक ढांचा, संवैधानिक पारदर्शिता और जनमत का सम्मान Global partnership के लिए एक मजबूत नींव प्रदान करता है।
‘चीन प्लस वन’ स्ट्रैटेजी में भारत की भूमिका आज पहले से कहीं ज्यादा अहम हो गई है। पश्चिमी कंपनियां जो पहले चीन पर निर्भर थीं, वे अब भारत में अपना production, investment और सप्लाई चेन ट्रांसफर कर रही हैं। Apple, Foxconn, Tesla, और Google जैसी कंपनियों ने भारत में मैन्युफैक्चरिंग शुरू कर दी है। यह केवल आर्थिक अवसर नहीं, बल्कि भरोसे की जीत है। भारत अब केवल ‘बैकअप’ नहीं, बल्कि ‘प्राइम चॉइस’ बन चुका है।
India का यह बदलाव एक दिन में नहीं हुआ। यह वर्षों की योजनाबद्ध नीति, सुधार, Global forums पर सक्रिय भागीदारी और एक स्पष्ट दृष्टिकोण का परिणाम है। जब पूरी दुनिया कोविड के कारण चरमरा गई थी, तब भारत ने ‘वैक्सीन मैत्री’ के तहत 100 से ज्यादा देशों को टीके भेजे। अफ्रीका से लेकर दक्षिण अमेरिका तक, भारत ने यह स्पष्ट कर दिया कि वह केवल अपने लिए नहीं, बल्कि मानवता के लिए सोचता है।
India ने जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर भी नेतृत्व दिखाया है। इंटरनेशनल सोलर अलायंस के जरिए भारत ने सौर ऊर्जा को Global प्राथमिकता बनाने में अहम भूमिका निभाई। G20 जैसे मंचों पर भारत की भागीदारी अब केवल प्रतिनिधित्व नहीं, नेतृत्व में बदल रही है। यह परिवर्तन उस सोच का है जिसमें ‘विश्वगुरु’ बनने की आकांक्षा को ज़मीन पर कार्य में बदला गया है।
भविष्य में जब इतिहास लिखा जाएगा, तो यह दौर India के Global Renaissance का युग कहलाएगा। एक ऐसा युग, जब भारत ने दो अस्थिर महाशक्तियों के बीच स्थिरता और नैतिकता की मशाल थाम ली। अमेरिका की चालाकियों और चीन की चालबाज़ियों के बीच भारत का सीधा और भरोसेमंद रास्ता अब दुनिया का नया मार्ग बन रहा है। और शायद यही वजह है कि आज दुनिया भारत को केवल एक देश नहीं, बल्कि एक Global समाधान के रूप में देख रही है।
India अब ‘उभरता हुआ बाजार’ नहीं, बल्कि ‘निर्णायक नेतृत्व’ बन गया है। और यह नेतृत्व न तलवार से आया है, न धन से—बल्कि भरोसे, सहयोग और स्थिरता से। यही है भारत की असली ताकत, और यही है वह कारण, जिससे दुनिया आज भारत को अपना इंजन मान रही है—भरोसे का इंजन।
Conclusion:-
“अगर हमारे आर्टिकल ने आपको कुछ नया सिखाया हो, तो इसे शेयर करना न भूलें, ताकि यह महत्वपूर्ण जानकारी और लोगों तक पहुँच सके। आपके सुझाव और सवाल हमारे लिए बेहद अहम हैं, इसलिए उन्हें कमेंट सेक्शन में जरूर साझा करें। आपकी प्रतिक्रियाएं हमें बेहतर बनाने में मदद करती हैं।
GRT Business विभिन्न समाचार एजेंसियों, जनमत और सार्वजनिक स्रोतों से जानकारी लेकर आपके लिए सटीक और सत्यापित कंटेंट प्रस्तुत करने का प्रयास करता है। हालांकि, किसी भी त्रुटि या विवाद के लिए हम जिम्मेदार नहीं हैं। हमारा उद्देश्य आपके ज्ञान को बढ़ाना और आपको सही तथ्यों से अवगत कराना है।
अधिक जानकारी के लिए आप हमारे GRT Business YouTube चैनल पर भी विजिट कर सकते हैं। धन्यवाद!”



