Pongal की खुशबू — Lohri से Pongal तक: एक त्योहार, कई नाम… भारत की सबसे खूबसूरत कहानी I 2026

ठंडी रात में जलती हुई आग… चारों तरफ ढोल की थाप… हँसी, खुशी, रंग, रोशनी… और उसी के साथ कहीं दूर किसी गाँव में सुबह-सुबह खेतों की मिट्टी की खुशबू, पकी हुई फसल की महक, बच्चों का शोर, और आसमान में उड़ती रंग-बिरंगी पतंगें। एक ही देश… लेकिन इतनी अलग-अलग आवाज़ें, इतने अलग-अलग रंग।

कहीं इसे लोहड़ी कहा जाता है, कहीं खिचड़ी, कहीं उत्तरायण, कहीं पौष संक्रांति… और कहीं बस एक शब्द—“Pongal”—जो सिर्फ एक त्योहार नहीं, एक भावना है। ये सिर्फ तारीख का बदलाव नहीं… ये मौसम का मोड़ है, nature का smile है, किसान की जीत है, और हमारे देश की वो कहानी है जो हर साल 14 जनवरी के आसपास फिर से ज़िंदा हो जाती है। यही है साल 2026 का पहला बड़ा त्योहार—मकर संक्रांति… एक ऐसा त्योहार जो पूरे भारत को एक invisible thread से बांध देता है।

मकर संक्रांति सिर्फ calendar का festival नहीं है। ये वो दिन है जब सूरज अपनी दिशा बदलता है, जब sardi retreat लेती है, जब दिन लम्बे होने लगते हैं और जब धरती जैसे कहती है—“अब नया साल सच में शुरू।” दिलचस्प बात ये है कि जब ज्यादातर Hindu festivals चंद्र कैलेंडर पर depend करते हैं, वहीं मकर संक्रांति सूर्य के आधार पर मनाई जाती है।

इसलिए ये festival लगभग हर साल 14 जनवरी को ही आता है। लेकिन इससे भी ज्यादा magical बात ये है कि ये एक ऐसा त्योहार है जो अलग-अलग भाषाओं, अलग-अलग traditions, अलग-अलग cultures के बावजूद भी सबको एक ही भावना से जोड़ देता है—gratitude. Nature के लिए धन्यवाद… अन्नदाता के लिए सम्मान… और जिंदगी के लिए celebration.

अगर हम North India चलें, तो यहाँ इस त्योहार का सबसे रंगीन रूप नज़र आता है—लोहरी। ठंडी जनवरी की रात, खेतों में काम खत्म, घरों में excitement, और फिर वो आग—जो सिर्फ लकड़ी की नहीं होती, वो उम्मीद की आग होती है। उसके चारों तरफ घूमते लोग, हाथ जोड़कर प्रार्थना करते लोग, मूंगफली, रेवड़ी, गजक, तिल… ये सब सिर्फ खाने की चीज़ें नहीं, ये culture की symbols हैं। लोहरी के गीत बजते हैं… “सुंदर-मुंदरिये हो…” बच्चे घर-घर जाकर गाते हैं, लोग उन्हें मिठाइयाँ देते हैं। वो आग सर्दी को नहीं जलाती… वो डर, थकान और negativity को जलाती है।

ये festival सिर्फ season change का जश्न नहीं… ये life के नए chapter का स्वागत है। अगले ही दिन पंजाब और हिमाचल के कुछ हिस्सों में आता है—माघी। यहाँ लोग नदी, सरोवर में स्नान करते हैं, दान करते हैं, लंगर चलते हैं। ये सिर्फ ritual नहीं… ये gratitude का expression है। क्योंकि जिसने पूरा साल मेहनत की, जिसने धरती को बोया, जिसने बीज डाले, जिसने भगवान पर भरोसा किया… उसे आज उसका फल मिला है। परिवार एक साथ बैठकर खाते हैं, और यही simple moments ही तो असली richness होते हैं।

फिर आते हैं उत्तर प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड की बातें… यहाँ इस दिन को कहते हैं—खिचड़ी। और सुनकर शायद सरल लगे, लेकिन इस simple dish के पीछे इतनी warmth है कि बड़े-बड़े feasts फीके पड़ जाएँ। इस दिन लोग दाल-चावल की गर्म खिचड़ी खाते हैं, दान करते हैं, गरीबों को खिलाते हैं। क्योंकि festival सिर्फ अपने लिए नहीं होता… festival तभी complete होता है, जब वो किसी और के चेहरे पर smile ला दे। गाँवों में, कस्बों में, शहरों में… हर जगह खिचड़ी का धुआँ सिर्फ kitchen से नहीं उठता, दिलों से उठता है।

अब अगर steering घुमाएँ west side की तरफ, तो Gujarat हमें बुलाता है—“आओ, Uttarayan मनाते हैं।” शायद ही दुनिया में कोई festival इतना आसमानी हो। पूरे राज्य का sky रंगों से भर जाता है। terrace पर हँसते-चिल्लाते लोग, हाथ में manjha, “kai po che” की आवाज़, ढोल, संगीत… ये सिर्फ festival नहीं, ये energy का explosion है। सुबह से शाम तक पतंगें उड़ती हैं और हर छोटी जीत का जश्न मनाया जाता है। और यही तो life है—छोटे जीतों को celebrate करना सीखो, क्योंकि वही happiness का असली formula है। Rajasthan और Haryana के कुछ हिस्सों में इसे सकरात कहते हैं। नाम अलग, emotion वही।

लेकिन भारत की diversity की असली ताकत तब समझ में आती है, जब हम पहुँचते हैं South India. यहाँ मकर संक्रांति नहीं, Pongal मनाया जाता है। नाम बदलता है… पर meaning वही रहता है—thanksgiving to nature. Tamil Nadu में चार दिनों का ये festival जैसे एक grand film हो। पहला दिन Bhogi—purani negativity, पुरानी परेशानियाँ symbolically जला दी जाती हैं।

क्योंकि जब तक हम पुराना नहीं छोड़ेंगे, नया कैसे अपनाएँगे? दूसरा दिन—Thai Pongal। ये सबसे बड़ा दिन होता है। घरों के आँगन में रंगोली, नए मिट्टी के pot में दूध और rice पकता है, और जब दूध उफनकर बाहर गिरता है, लोग खुश होकर कहते हैं—“Pongalo Pongal”—मतलब prosperity overflow हो रही है। क्या खूबसूरत सोच है… overflowing food as symbol of overflowing blessings.

तीसरा दिन—Mattu Pongal—ये दिन dedicated होता है उन animals के नाम, जो farming में farmer के साथ soldier की तरह खड़े रहते हैं। cows, bulls, oxen—उन्हें सजाया जाता है, प्यार किया जाता है, पूजा जाता है। ये हमें सिखाता है कि gratitude सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं होना चाहिए। चौथा दिन—Kaanum Pongal—family के साथ समय, outings, togetherness। यानी ये festival सिर्फ खेतों का नहीं… ये दिलों का भी festival है।

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना पहुँचिए… तो यहाँ इसे Pedda Panduga कहते हैं। चार दिन तक हर घर में happiness, rituals, dances, traditional food—सब कुछ इतना खूबसूरत कि लगता है जैसे पूरा state मुस्कुरा रहा है। Karnataka में इसे Suggi Habba कहा जाता है। यहाँ भी farmers celebrate करते हैं कि मेहनत रंग लाई। ये सब festivals हमें बार-बार remind करते हैं—कि civilization सिर्फ buildings और technology से नहीं बनती… civilization gratitude से बनती है।

अब चलते हैं East India. यहाँ भी मकर संक्रांति का रंग कम नहीं। West Bengal और Odisha में इसे Paush Sankranti कहा जाता है। यहाँ लोग pithe puli यानी चावल और गुड़ से बनने वाली मिठाइयाँ बनाते हैं। घरों में खुशबू फैलती है, लोग एक-दूसरे के घर जाते हैं, और मिठास सिर्फ खाने में नहीं… रिश्तों में भी घुलती है।

और फिर Assam… यहाँ इस festival का नाम है—Magh Bihu या Bhogali Bihu। असमिया संस्कृति का ये सबसे प्यारा त्योहार है। खेतों में काम खत्म, नई फसल घर आई, और अब जश्न मनाने का समय है। रातों में मेजियों यानी बड़े bonfire जलाए जाते हैं, community feasts होते हैं, traditional games होते हैं, लोग नाचते-गाते हैं। ये सिर्फ festival नहीं, ये life का festival है।

अगर ध्यान से देखें तो ये पूरा festival cycle हमें तीन simple लेकिन powerful lessons देता है। पहला lesson—Respect Nature. हम modern हो गए हैं, technology आ गई है, cities चमकती हैं… लेकिन अंत में हमारा existence जमीन, सूरज, पानी, हवा पर ही depend करता है। मकर संक्रांति हमें याद दिलाती है कि हमें nature का धन्यवाद करना चाहिए, उसे destroy नहीं।

दूसरा lesson—Respect Farmers. जो लोग शहरों में रहते हैं, वो शायद कभी खेत नहीं जाते, मिट्टी नहीं छूते। लेकिन हर plate में जो खाना आता है… वो किसी किसान की उम्मीद, मेहनत और faith से आता है। ये festival unseen heroes को salute करता है। ये बताता है कि real wealth वही है जो पेट भर दे। तीसरा lesson—Celebrate Life. चाहे गुजरात की पतंग हो, पंजाब की आग, बंगाल की मिठाई, तमिलनाडु का Pongal या असम का बिहू… हर जगह एक ही बात common है—खुश रहो, साथ रहो, share करो। Life challenges से भरी है, लेकिन festivals हमें pause देकर सिखाते हैं—“रुको… साँस लो… जियो…”

मकर संक्रांति का एक और philosophical meaning भी है। इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। Astrology के अनुसार ये positive energy का समय होता है। ये transition symbolically ये सिखाता है कि life में भी ऐसे moments आते हैं जब direction बदलनी पड़ती है। जब अंधेरा खत्म होता है और रोशनी आने लगती है। जब hope वापस जन्म लेती है। और शायद इसलिए इस festival को “नई शुरुआत का festival” कहा जाता है।

Modern India में भी ये festival उतनी ही importance रखता है। आज भले लोग skyscrapers में रहते हों, busy offices में काम करते हों, लेकिन जैसे ही ये दिन आता है, उनके अंदर का desi soul जाग जाता है। लोग villages visit करते हैं, family के साथ समय बिताते हैं, kids पतंगे उड़ाना सीखते हैं, grandparents अपने पुराने festival stories सुनाते हैं।

ये सिर्फ tradition नहीं, ये emotional connection है—अपने roots से, अपनी मिट्टी से, अपनी पहचान से। और शायद ये festival इसलिए भी खास है क्योंकि ये हमें equality का एहसास कराता है। इस दिन caste का value नहीं, class का value नहीं, religion की दीवारें नहीं… सिर्फ एक चीज होती है—एकता। चाहे billionaire हो या मजदूर, सब एक जैसी खिचड़ी खा सकते हैं, एक जैसा तिल-गुड़ खा सकते हैं, एक ही सूरज को नमस्कार कर सकते हैं। Festivals तभी powerful होते हैं, जब वो divide नहीं, unite करें।

Conclusion

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