ज़रा सोचिए… आप दुनिया के सबसे बड़े बैंक के CEO हैं। आपके पास अरबों डॉलर की डील्स रोज़ होती हैं, सैकड़ों मीटिंग्स, हजारों ईमेल, और लाखों लोगों का भरोसा आप पर टिका है। अब सोचिए — अगर ऐसा इंसान कहे कि वह काम के वक्त मोबाइल फोन को हाथ तक नहीं लगाता, तो क्या आप यक़ीन करेंगे? शायद नहीं। लेकिन यह कोई अफवाह नहीं है, बल्कि एक हकीकत है जिसे निभा रहे हैं Jamie Dimon, JP Morgan Chase के CEO — वही बैंक जो दुनिया की सबसे ताक़तवर फाइनेंशियल मशीन माना जाता है। जहां एक ओर दुनिया डिजिटल लत में डूबी है, वहीं यह आदमी अपने “नो फोन रूल” से एक मिसाल बन गया है।
Jamie Dimon का मानना है कि फोन इंसान को “कम्युनिकेटिव” नहीं बल्कि “डिस्ट्रैक्टेड” बना देता है। उन्होंने अपने लिए एक ऐसा सख्त नियम बनाया है, जो आज के दौर में शायद किसी के लिए भी निभाना असंभव लगे। उनका कहना है कि मीटिंग्स के दौरान, ईमेल के बीच, या किसी बिज़नेस सेशन में वे कभी भी फोन नहीं उठाते, न किसी को टेक्स्ट करते हैं, न किसी नोटिफिकेशन का जवाब देते हैं। उनका मोबाइल ऑफिस की मेज़ पर नहीं, बल्कि कमरे के बाहर रहता है। और अगर किसी को उनसे वाकई संपर्क करना हो, तो वह सीधा उनके ऑफिस में कॉल करे, न कि फोन पर टेक्स्ट भेजे।
यह सुनकर अजीब लगता है — आज जहां लोग सुबह उठते ही सबसे पहले अपने फोन की नोटिफिकेशन देखते हैं, Jamie Dimon जैसे इंसान ने उसे अपनी लाइफ से लगभग बाहर कर दिया है। उन्होंने कहा था कि दिन में जो लोग उन्हें टेक्स्ट करते हैं, वो समझ लें कि जवाब शायद उसी रात या अगले दिन मिलेगा। दिन के वक्त, वे सिर्फ़ एक ही श्रेणी के लोगों के लिए फोन चालू रखते हैं — अपने परिवार के लिए। उन्होंने साफ़ कहा था, “मेरे फोन पर सिर्फ़ मेरे बच्चों के नोटिफिकेशन ऑन हैं — बाकी सब ऑफ।”
उनकी तीन बेटियां हैं — Julia, Laura और Kara। और यही वे लोग हैं जिनके मैसेज या कॉल Jamie Dimon मिस नहीं करते। बाकी सबके लिए उनका जवाब है — “अगर ज़रूरत है, तो मेरे ऑफिस में कॉल करो। अगर बात सच में ज़रूरी है, तो मेरी टीम मुझे ढूंढ लेगी।”
अब यह सवाल उठता है — आखिर एक ऐसा व्यक्ति, जिसकी हर सेकंड लाखों डॉलर की डील्स से जुड़ी होती है, वह इस डिजिटल युग में फोन से दूरी कैसे बनाए रखता है? Dimon का जवाब बेहद सादा लेकिन गहरा है — “Distraction kills focus.” उनका कहना है कि अगर आप हर वक़्त स्क्रीन पर झुके रहेंगे, तो आप अपने आस-पास की वास्तविक बातचीत और माहौल से कट जाएंगे।
उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था — “जब मैं मीटिंग में होता हूँ, तो मैं 100% वहां मौजूद रहता हूँ। अगर मेरा ध्यान बीच में कहीं और चला गया — जैसे फोन, ईमेल या नोटिफिकेशन की तरफ़ — तो मैं उस पल का सम्मान खो देता हूँ।” Dimon के लिए ये सिर्फ़ एक काम की आदत नहीं, बल्कि जीवन का सिद्धांत बन चुका है। उन्होंने तो यहां तक कहा कि अगर कोई उनके सामने मीटिंग में बैठा है और उसका ध्यान फोन पर है, तो वह उसे मीटिंग से बाहर जाने को कह देते हैं।
कई बार उन्होंने सार्वजनिक मंचों पर भी कहा कि “मीटिंग में फोन या टैबलेट का इस्तेमाल दूसरों के समय का अपमान है।” उनका कहना है कि हर मीटिंग, हर बातचीत एक अवसर होती है — और जब आप उस दौरान किसी स्क्रीन पर झुके होते हैं, तो आप न सिर्फ़ अपनी, बल्कि सामने वाले की भी इज़्ज़त खो देते हैं।
Jamie Dimon का यह “नो फोन कल्चर” अब उनके पूरे बैंकिंग सिस्टम में फैल चुका है। JP Morgan के कई टॉप एग्जीक्यूटिव्स को उन्होंने यह सख्त हिदायत दी है कि किसी भी स्ट्रेटेजिक मीटिंग में कोई फोन या लैपटॉप नहीं होना चाहिए। जो भी डाटा या रिपोर्ट देखनी हो, उसे पहले से प्रिंट किया जाए और ध्यान सिर्फ़ बातचीत पर रखा जाए।
सोचिए — जिस दौर में पूरी दुनिया Zoom कॉल्स, WhatsApp ग्रुप्स, और ईमेल थ्रेड्स में उलझी है, वहां यह आदमी अपने तरीके से एक ‘साइलेंट रेवोल्यूशन’ चला रहा है। एक ऐसा दौर जब लोग “फोकस बढ़ाने” के लिए मोबाइल ऐप्स डाउनलोड करते हैं, वहीं यह व्यक्ति अपनी आदतों से ही ‘फोकस’ की मिसाल बन गया है।
Jamie Dimon की यह सोच उनकी लाइफ के हर हिस्से में झलकती है। उनके लिए वक्त सबसे कीमती चीज़ है — और वे मानते हैं कि अगर वक्त को डिस्ट्रैक्शन में खो दिया जाए, तो जिंदगी अपने मकसद से भटक जाती है। वह कहते हैं — “मैं हर दिन यह सोचकर उठता हूं कि आज मुझे क्या नहीं करना चाहिए।” यानी उनका फोकस सिर्फ़ काम जोड़ने पर नहीं, बल्कि फालतू चीज़ें हटाने पर भी रहता है।
उन्होंने कई बार कहा कि जब वे मीटिंग में होते हैं, तो वे हर व्यक्ति की आंखों में देखकर बात करते हैं, बिना नोट्स, बिना स्क्रीन के। वे चाहते हैं कि हर बातचीत इंसानी लेवल पर जुड़ी हुई हो, न कि किसी डिजिटल मीडियम के ज़रिए। उनके ऑफिस में कोई पॉलिसी नहीं, लेकिन संस्कृति है — “अगर आप किसी से बात कर रहे हैं, तो पूरी तरह मौजूद रहें।”
Jamie Dimon के इस ‘नो फोन रूल’ के पीछे एक गहरा मनोवैज्ञानिक पहलू भी है। जब उन्होंने साल 2014 में throat cancer का सामना किया, तो उन्होंने महसूस किया कि जीवन की सबसे बड़ी पूंजी समय है — और समय को सबसे ज़्यादा बर्बाद करता है “डिजिटल शोर।” उन्होंने अपनी रिकवरी के दौरान फोन से दूरी बनाई, और तब महसूस किया कि इंसान जब टेक्नोलॉजी से बाहर निकलता है, तब ही वह अपने अंदर की आवाज़ को सुन पाता है। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था — “कैंसर ने मुझे सिखाया कि हर सेकंड की अहमियत क्या होती है। और वो सेकंड किसी स्क्रीन को देखने में बर्बाद नहीं करना चाहिए।”
Jamie Dimon के इस निर्णय ने न सिर्फ़ उनकी प्रोडक्टिविटी बढ़ाई, बल्कि उनके टीम कल्चर को भी बदल दिया। JP Morgan के कर्मचारियों ने नोट किया कि जब Dimon मीटिंग में पूरी तल्लीनता से शामिल होते हैं, तो बाकी टीम मेंबर भी उसी स्तर का फोकस रखते हैं। अब यह कल्चर इतना मजबूत हो गया है कि JP Morgan की इंटरनल मीटिंग्स में कोई फोन या टैबलेट नहीं लाया जाता — जब तक कि उसकी ज़रूरत रिपोर्ट दिखाने के लिए न हो। Dimon कहते हैं — “लीडर वही होता है जो अपनी आदतों से टीम को दिशा दे।” और यही उन्होंने किया। आज उनकी टीम दुनिया की सबसे प्रभावी फाइनेंशियल टीमों में गिनी जाती है।
दिलचस्प बात यह है कि Jamie Dimon खुद कभी टेक्नोलॉजी के खिलाफ़ नहीं रहे। वे JP Morgan को दुनिया के सबसे टेक-एडवांस बैंक में बदलने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने ब्लॉकचेन, AI, और फिनटेक इनोवेशन में भारी निवेश किया है। लेकिन उनके लिए टेक्नोलॉजी का मतलब इंसान की जगह नहीं, बल्कि इंसान की मदद है। वे मानते हैं — “Technology should work for you, not own you.”
यहां एक गहरा विरोधाभास दिखाई देता है — एक तरफ वही व्यक्ति जो टेक्नोलॉजी के भविष्य को आगे बढ़ा रहा है, दूसरी तरफ वही व्यक्ति जो अपने व्यक्तिगत जीवन में टेक्नोलॉजी से दूरी बनाता है। लेकिन यही विरोधाभास उनकी सोच की गहराई को दिखाता है। वे जानते हैं कि टेक्नोलॉजी तब ही उपयोगी है, जब वह आपके नियंत्रण में हो, न कि आप उसके नियंत्रण में।
Dimon की यह फिलॉसफी अब ग्लोबल लीडरशिप सर्किल में एक चर्चा का विषय बन चुकी है। कई कंपनियों के CEO इस “Jamie Dimon Rule” को अपनाने लगे हैं। Google और Microsoft जैसी कंपनियों में भी अब “नो-फोन मीटिंग्स” का चलन बढ़ रहा है, जहां कर्मचारी पूरे ध्यान से केवल इंसान से इंसान की बातचीत पर फोकस करते हैं। Dimon कहते हैं कि “कभी-कभी सबसे बड़ी प्रगति एक कदम पीछे हटने में होती है।” और यही उन्होंने किया — तकनीक की भीड़ से पीछे हटकर, इंसानियत की गहराई को फिर से छू लिया।
उनका दिन शुरू होता है सुबह-सुबह अखबार पढ़ने से, न कि फोन स्क्रॉल करने से। वह कहते हैं कि दिन की शुरुआत अगर फोन से होती है, तो आपका ध्यान दिनभर बाहरी चीज़ों में उलझा रहता है। जबकि असली लीडरशिप भीतर से आती है — शांति और स्पष्टता से।
Jamie Dimon यह भी मानते हैं कि एक सच्चे लीडर को अपने लोगों की आंखों में देखकर जवाब देना चाहिए, न कि किसी स्क्रीन से संवाद करना चाहिए। वह कहते हैं, “जब आप स्क्रीन पर झुके होते हैं, तो आप बातचीत नहीं कर रहे होते, आप बस एक नोटिफिकेशन से दूसरे नोटिफिकेशन पर कूद रहे होते हैं।”
उनकी यह सोच आज की पीढ़ी के लिए एक सबक है — खासकर उस दौर में जब फोन हमारी नींद, ध्यान, रिश्ते, और फैसलों को कंट्रोल कर रहा है। Dimon ने यह साबित किया कि अगर आप सच में कुछ बड़ा हासिल करना चाहते हैं, तो सबसे पहले अपने ध्यान को संभालिए। उन्होंने एक बार कहा था — “Discipline is not about control, it’s about clarity.” यानी अनुशासन का मतलब खुद को रोकना नहीं, बल्कि खुद को समझना है — कि क्या वाकई ज़रूरी है और क्या नहीं।
आज जब कोई उनसे पूछता है कि वे दुनिया के सबसे बड़े बैंक के प्रमुख होते हुए भी इतनी सादगी और संतुलन कैसे बनाए रखते हैं, तो उनका जवाब सीधा होता है — “मैं हर दिन यह तय करता हूं कि मैं किस चीज़ को महत्व दूं। और फोन उस सूची में बहुत नीचे आता है।”
Jamie Dimon की यह सोच भारत जैसे देशों के लिए भी एक प्रेरणा है, जहां मोबाइल फोन अब जीवन का केंद्र बन चुका है। आज औसत भारतीय हर दिन 5 घंटे फोन पर बिताता है। लोग भोजन, बातचीत और यहां तक कि अपने रिश्तों से भी ज़्यादा जुड़ाव अपने फोन से महसूस करते हैं। ऐसे में Dimon का यह नियम एक दर्पण है — जो हमें दिखाता है कि असली शक्ति स्क्रीन के पीछे नहीं, बल्कि ध्यान और आत्म-नियंत्रण में छिपी है।
Conclusion
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