सोचिए एक सुबह आप ऑफिस जाने के लिए तैयार हो रहे हैं, फोन में मेल्स चेक कर रहे हैं, और अचानक एक लाइन आपकी आंखों के सामने रुक जाती है—“Your role is being restructured due to automation.” ना कोई गलती, ना कोई खराब परफॉर्मेंस, बस एक नई टेक्नोलॉजी। अब सोचिए यह लाइन किसी छोटे स्टार्टअप के CEO ने नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे बड़े बैंक के CEO ने indirectly आपके लिए लिखी हो और इस बार चेतावनी सीधी है—“सिर रेत में डालना बंद कर दो… आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नौकरियों को खत्म करेगा।”
जेमी डिमन कोई भविष्य बताने वाले ज्योतिषी नहीं हैं। वह JPMorgan Chase जैसे बैंक के CEO हैं, जिसकी market capitalization कई देशों की GDP से बड़ी है। बैंकिंग, फाइनेंस, टेक्नोलॉजी और ग्लोबल इकोनॉमी—इन सबके बीच बैठा इंसान अगर यह कहे कि “jobs will disappear”, तो इसे नजरअंदाज करना खुद से झूठ बोलने जैसा है। उन्होंने साफ कहा कि AI लंबे समय में productivity बढ़ाएगा, life better बनाएगा, लेकिन short और medium term में job losses inevitable हैं। यानी यह होगा ही।
समस्या यह नहीं है कि AI आ रहा है। समस्या यह है कि ज्यादातर लोग अब भी यह मानकर चल रहे हैं कि “मेरी job safe है”, “ये तो tech वालों के लिए है”, “हमारे सेक्टर में ऐसा नहीं होगा।” यही mindset देखकर डिमन ने कहा—people should stop burying their heads in the sand। क्योंकि इतिहास गवाह है, जो बदलाव को नकारते हैं, वही सबसे पहले कुचले जाते हैं।
अगर हम पीछे देखें, तो हर बड़ी तकनीकी क्रांति ने यही कहानी दोहराई है। जब ट्रैक्टर आया, तो खेतों में काम करने वाले लाखों मजदूरों की जरूरत कम हो गई। जब उर्वरक और आधुनिक खेती आई, तो पूरा agricultural structure बदल गया। जब वैक्सीन आई, तो औसत उम्र बढ़ गई और हेल्थ सिस्टम बदल गया। हर बार एक ही पैटर्न दिखा—पहले डर, फिर नुकसान, और आखिर में एक नई दुनिया। जेमी डिमन इसी तुलना के जरिए समझा रहे हैं कि AI भी वैसा ही moment है, फर्क सिर्फ इतना है कि इसकी speed बहुत ज्यादा है।
डिमन AI को demonize नहीं करते। उल्टा, वह कहते हैं कि “most cases में AI humanity के लिए बहुत अच्छी चीज साबित होगी।” उनका मानना है कि एक दिन ऐसा आएगा जब लोग कम काम करेंगे, लेकिन उनकी जिंदगी ज्यादा बेहतर होगी। शायद future में हम हफ्ते में सिर्फ साढ़े तीन दिन काम करें। यह सुनने में dream जैसा लगता है, लेकिन उस dream के बीच एक nightmare भी छुपा है—transition period।
यही transition period सबसे dangerous होता है। जब पुरानी jobs खत्म हो रही होती हैं और नई jobs अभी पूरी तरह बनी नहीं होतीं। डिमन साफ कहते हैं कि AI अगले साल ही लाखों नौकरियां नहीं खा जाएगा, लेकिन यह भी उतना ही सच है कि यह प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। कंपनियां hiring में cautious हैं, processes automate हो रहे हैं, और decision-making में humans की जगह algorithms ले रहे हैं। अभी लोग इसे macroeconomic factors कहकर टाल रहे हैं, लेकिन underlying shift साफ दिख रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि कौन सी नौकरियां सबसे पहले जाएंगी? डिमन का जवाब बहुत clear है—जो काम machine आसानी से repeat कर सकती है, वह सबसे पहले खतरे में है। Data entry, basic analysis, routine customer support, simple legal drafting, accounting के repetitive हिस्से—ये सब AI के लिए आसान targets हैं। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। AI सिर्फ blue-collar या entry-level jobs तक सीमित नहीं रहेगा। White-collar, high-paying roles भी धीरे-धीरे reshape होंगे।
यही वजह है कि डिमन सिर्फ technology सीखने की बात नहीं करते। वह कहते हैं कि अब लोगों को technical knowledge से आगे सोचना होगा। Coding सीखना जरूरी है, लेकिन सिर्फ coding काफी नहीं है। AI उस code को भी लिख सकता है। असली value उन skills में होगी, जिन्हें machine replicate नहीं कर सकती—critical thinking, emotional intelligence, creativity, judgement, clear communication। यानी जो आपको इंसान बनाता है, वही future में आपकी सबसे बड़ी ताकत बनेगा।
सोचिए एक डॉक्टर और एक AI system। AI reports पढ़ सकता है, patterns पहचान सकता है, diagnosis suggest कर सकता है। लेकिन मरीज की आंखों में देखकर डर समझना, परिवार को empathy के साथ समझाना, और moral judgement लेना—यह अब भी इंसान की ताकत है। यही फर्क हर profession में दिखाई देगा। Engineers, bankers, teachers, managers—सबके roles बदलेंगे, खत्म नहीं होंगे, लेकिन वही टिकेगा जो adapt करेगा।
डिमन इस बात पर भी जोर देते हैं कि job displacement का मतलब बेरोजगारी नहीं है। इसका मतलब है role shift। लेकिन यह shift automatic नहीं होगा। अगर समाज, सरकार और कंपनियां मिलकर reskilling और upskilling पर काम नहीं करेंगी, तो chaos पैदा होगा। Imagine कीजिए लाखों लोग एक साथ displaced हों और उन्हें नई skills सिखाने की तैयारी ही न हो। यही वजह है कि डिमन early planning की बात करते हैं—training, relocation, income support, early retirement जैसी चीजों पर अभी से सोचना होगा।
यहां एक uncomfortable truth भी है। पिछली industrial revolutions में भी यह planning पूरी तरह नहीं हो पाई थी। बहुत से लोग पीछे छूट गए, बहुत से शहर decay में चले गए। डिमन मानते हैं कि हमने history से पूरा सबक नहीं सीखा। और अगर इस बार भी वही गलती हुई, तो damage कहीं ज्यादा बड़ा होगा, क्योंकि AI की reach global है और speed exponential।
एक और interesting point जो डिमन उठाते हैं, वह है perception versus reality। लोग सोचते हैं कि AI अभी experimental है, unreliable है, या सिर्फ बड़े tech giants तक सीमित है। लेकिन reality यह है कि AI quietly हर industry में embed हो रहा है। Banking में fraud detection, trading algorithms, customer onboarding; healthcare में diagnostics; law में document review; media में content generation—यह सब अब future नहीं, present है।
डिमन खुद banking sector से हैं, और अगर banking जैसी regulated, conservative industry में AI इतनी तेजी से घुस चुका है, तो बाकी sectors का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। JPMorgan जैसी कंपनियां AI को cost-cutting tool की तरह नहीं, बल्कि efficiency multiplier की तरह देखती हैं। लेकिन efficiency का मतलब कम लोगों में ज्यादा काम। और यही equation jobs को risky बनाती है।
यहां पर audience के लिए सबसे जरूरी सवाल उठता है—“तो हम क्या करें?” यही वह point है जहां यह वीडियो सिर्फ डर नहीं, direction देना चाहता है। पहला step है denial छोड़ना। यह मान लेना कि “ये होगा।” दूसरा step है self-assessment—क्या मेरा काम repetitive है? क्या मेरी value सिर्फ process follow करने में है? अगर हां, तो खतरा real है।
तीसरा step है skill upgrade, लेकिन smart तरीके से। हर नई tech के पीछे blindly भागना solution नहीं है। Focus उन skills पर होना चाहिए जो transferable हैं। Communication, problem-solving, decision-making, leadership—ये skills हर industry में काम आती हैं। AI tools को enemy की तरह देखने के बजाय partner की तरह use करना सीखना होगा।
चौथा और शायद सबसे difficult step है mindset shift। Stable नौकरी का concept बदल रहा है। Lifetime employment अब exception बनता जा रहा है, rule नहीं। Portfolio career, multiple income streams, continuous learning—ये future की reality हैं। डिमन का warning इसी ओर इशारा करता है कि जो लोग अभी से flexible नहीं होंगे, उन्हें बाद में मजबूरी में बदलना पड़ेगा।
डिमन ने पहले भी यह बात कही थी कि आने वाले 20 से 40 सालों में developed world में लोग बहुत कम घंटे काम करेंगे। Week में साढ़े तीन दिन काम करने का idea सुनने में exciting है, लेकिन उसके पीछे productivity explosion और massive automation छुपा है। इसका मतलब यह नहीं कि काम खत्म हो जाएगा, बल्कि काम की definition बदल जाएगी। सवाल यह है कि उस नई definition के लिए आप तैयार हैं या नहीं।
सरकारों की भूमिका भी यहां critical है। Education system को update करना होगा। बच्चों को सिर्फ रट्टा learning नहीं, adaptability सिखानी होगी। Companies को short-term profit से आगे सोचकर workforce transition plan करना होगा। और individuals को victim mindset छोड़कर learner mindset अपनाना होगा। जेमी डिमन की सबसे sharp line यही है—“Stop burying your head in the sand.” क्योंकि खतरा सिर पर नहीं, हमारे चारों तरफ है।
फर्क सिर्फ इतना है कि कुछ लोग उसे देख रहे हैं, और कुछ लोग देखना नहीं चाहते। AI कोई tsunami नहीं है जो एक दिन अचानक आएगी। यह धीरे-धीरे पानी बढ़ने जैसा है। और जो तैरना नहीं सीखेंगे, वे डूबेंगे। इस पूरी कहानी का सार डर फैलाना नहीं है। सार यह है कि future avoid नहीं किया जा सकता, लेकिन prepare किया जा सकता है। AI मानवता को बेहतर बना सकता है, लेकिन सिर्फ तब जब मानव खुद को बेहतर बनाए। वरना productivity बढ़ेगी, profits बढ़ेंगे, लेकिन inequality भी उतनी ही तेजी से बढ़ेगी।
Conclusion
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