सोचिए… एक छोटा-सा लड़का, जिसके report card पर हमेशा teachers की red ink होती थी, जिसके नाम के आगे “weak student” का tag लगा रहता था, जिसके माता-पिता तक डरते थे कि शायद ये बच्चा जिंदगी में कुछ बड़ा न कर पाए… वही लड़का एक दिन ऐसी कंपनी खड़ी कर देता है जिसकी कीमत लाखों करोड़ में आंकी जाती है।
एक दिन वो बच्चा अरबों लोगों के phone screen पर मौजूद एक habit बन जाता है, एक जरूरत बन जाता है, एक lifestyle बन जाता है। यह कहानी है उस लड़के की, जो 5वीं में फेल हुआ था… लेकिन आज 3 लाख करोड़ रुपये की कंपनी का मालिक है। यह कहानी है Zomato के CEO दीपिंदर गोयल की, जिनकी जिंदगी साबित करती है कि हारना problem नहीं, हार मान लेना problem है।
पंजाब के छोटे से शहर मुक्तसर में पैदा हुए दीपिंदर का बचपन बहुत साधारण था, उतना ही साधारण जितना किसी middle class family का बच्चा जीता है। न अंग्रेजी-मीडियम स्कूल का ग्लैमर, न expensive tuition, न privileged background। वो वो बच्चा था जिसे ज्यादातर लोग “average से नीचे” मानते थे। वो पढ़ाई में पीछे था, focus नहीं रहता था, और ऊपर से fate ऐसा कि 5वीं क्लास में फेल हो गया।
imagine कीजिए, एक छोटा बच्चा जब पूरे स्कूल के सामने यह सुनता है कि वह पास नहीं हो पाया, तो उसका confidence कितना टूटता होगा। पिता को स्कूल के प्रिंसिपल से request करनी पड़ी कि कुछ grace marks दे दें ताकि बच्चा next class में जा सके। उस दिन एक बच्चा सिर्फ fail नहीं हुआ था, उसके अंदर society का डर बैठ गया था। लेकिन शायद जिंदगी ने उसके लिए अभी बहुत कुछ लिखा था।
समय बीता, क्लास बढ़ी, ज़िंदगी आगे बढ़ी, लेकिन उस फेलियर का दबाव सिर पर साया बनकर रहता था। फिर आई 8वीं क्लास। half yearly exam था। तैयारी almost zero थी। paper हाथ में था और दिमाग खाली। शायद वो फिर फेल हो जाता, लेकिन उसी exam hall में बैठे एक teacher ने उसकी मदद कर दी। नतीजा ऐसा आया कि वो अचानक class के toppers में खड़ा था। लेकिन यह जीत उसकी नहीं थी, यह borrowed success थी।
अगली बार teacher ने मदद नहीं की। अब उसके पास दो option थे—या तो फिर fail हो जाए, या इस बार सच में लड़कर दिखाए। और उसने कुछ गिने-चुने घंटों की honest पढ़ाई की, अपने दिल को, दिमाग को, खुद को चुनौती दी… और इस बार उसकी मेहनत ने कमाल कर दिया। वो अच्छे नंबरों से पास हुआ और पहली बार उसे महसूस हुआ कि मेहनत का कोई substitute नहीं होता।
अब जिंदगी उसे धीरे-धीरे आगे धकेल रही थी। जैसे हर तेज दिमाग वाले student की एक ही मंज़िल होती है—Indian Institute of Technology। लेकिन I I T सिर्फ exam नहीं, war field है। लाखों students सपना देखते हैं और कुछ हज़ार ही पहुंच पाते हैं। दीपिंदर भी कोचिंग पहुंच गए। वहाँ बैठकर उन्होंने अपने आसपास देखा और shock लग गया। उनके side में बैठे बच्चे दो-दो साल से तयारी कर रहे थे, concept crystal clear, confidence sky-high, और वो खुद… confused और scared।
उन्हें लगा कि शायद यह जगह उनके लिए नहीं बनी। लेकिन जिंदगी अक्सर उसी मोड़ पर miracle करती है, जहां हम give up करने वाले होते हैं। board exams खत्म हुए और I I T J E E के लिए सिर्फ दो महीने बचे थे। किसी भी normal इंसान के लिए यह समय बहुत कम था, लेकिन उन्होंने अपने favourite subject physics को उठाया और पूरी किताब solve कर डाली। कोई यकीन नहीं कर रहा था, लेकिन exam का result आने के बाद दुनिया हैरान थी—उन्होंने सिर्फ दो महीने की तैयारी में IIT JEE crack कर दिया।
IIT दिल्ली पहुंचना achievement था, लेकिन वहां की दुनिया real battlefield थी। हर तरफ intelligent brains, हर कोई तेज, हर कोई best। ये environment खुशी नहीं, कई बार डर देता है। वहीं से उनकी जिंदगी का सबसे tough emotional phase शुरू हुआ। वो depression में चले गए। उन्हें लगा वो पीछे रह रहे हैं। comparison उनकी strength नहीं, weakness बन गया। तभी उन्होंने अपने भीतर से एक आवाज सुनी—compete मत करो… create करो। दूसरों से बेहतर बनने की जगह अपनी खुद की journey बनाओ। उन्हें समझ आया कि जिंदगी race नहीं, creation है। और यही सोच आगे चलकर Zomato की foundation बनी।
बहुत कम लोग जानते हैं कि दीपिंदर हकलाते हैं। public speaking उनके लिए torture जैसी चीज थी। stage पर जाना उनके लिए डर था। लेकिन funny बात यह है कि दुनिया ये समझती रही कि वो attitude दिखाते हैं, कम बोलते हैं तो ego है। सच ये था कि वो अपनी energy अपने काम में लगाते थे।
उनका philosophy simple था—कम बोलो, ज्यादा करके दिखाओ। और उन्होंने यही किया। 2008 में उन्होंने अपने life का सबसे बड़ा कदम उठाया। उन्होंने सोचा, लोग खाना खाने से पहले कितना struggle करते हैं—restaurant ढूंढो, menu देखो, जगह ढूंढो। अगर यह सब online हो जाए तो? वहीं से शुरू हुआ उनका छोटा सा idea—restaurant menus को online लाने का। पहले इसका नाम था FoodieBay और फिर उगा एक नया brand, जो आगे चलकर पूरी दुनिया की habit बन गया—Zomato।
यह journey smooth नहीं थी। funding की tension, लोगों की न समझ, market का doubt—सब कुछ था। लेकिन dedication उससे भी बड़ा था। कई बार situation ऐसी आई कि लगा सब खत्म हो जाएगा। लेकिन strong लोग किसी वजह से नहीं, अपने reason से लड़ते हैं, और दीपिंदर के पास reason था—कुछ अलग बनाना, कुछ बड़ा करना, कुछ meaningful करना। धीरे-धीरे Zomato सिर्फ एक app नहीं, ecosystem बन गया। People सिर्फ food order नहीं कर रहे थे, convenience, comfort और time buy कर रहे थे। brand सिर्फ platform नहीं रहा, lifestyle बन गया।
फिर आया वो bold कदम जिसने साबित किया कि ये आदमी सिर्फ businessman नहीं, visionary है। Blinkit का अधिग्रहण। food से आगे बढ़कर instant delivery के game में उतरना। यह risky था, critics बोले यह decision गलत है। लेकिन leaders वो होते हैं जो भविष्य वहां देखते हैं जहां बाकी लोग आज में अटके रहते हैं। उन्होंने Urban Company बोर्ड छोड़ दिया क्योंकि उनका focus clear था—जहां energy सबसे बड़ा impact दे सके, वहीं लगानी चाहिए। vision कहीं dilute नहीं होना चाहिए।
फिर आया दुनिया का शायद सबसे dark time—corona pandemic। लोग डर में थे, economy ठप थी, रोजगार खत्म हो रहे थे। और इसी समय दुनिया ने देखा कि एक बड़ा entrepreneur सिर्फ पैसा नहीं कमाता, society को वापस भी देता है। दीपिंदर ने 700 करोड़ रुपये के shares donate कर दिए, Zomato Future Foundation के लिए ताकि delivery partners के बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाया जा सके। ये सिर्फ पैसा नहीं था, यह commitment था।
फिर उन्होंने एक ऐसा कदम उठाया जिसने thousands gig workers की जिंदगी में dignity दी। उन्होंने Rest Points बनाने का फैसला लिया ताकि delivery workers कहीं भी आराम कर सकें, पानी पी सकें, washroom use कर सकें। और यह सिर्फ Zomato workers के लिए नहीं, हर company के workers के लिए खुले थे। यही leadership है—जो सिर्फ business नहीं, इंसानियत भी संभालती है।
आज Eternal और Zomato की valuation 3 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच चुकी है। आज दीपिंदर सिर्फ इंडिया के ही नहीं, दुनिया के सबसे बड़े self-made entrepreneurs में गिने जाते हैं। लेकिन उनके चेहरे पर arrogance नहीं, smile है। उनके अंदर ego नहीं, gratitude है। वो accessible नहीं दिखते, लेकिन हमेशा available रहते हैं। वो बोलते कम हैं, लेकिन अपने हर decision से दुनिया को सीख देते हैं।
इस कहानी का सबसे खूबसूरत हिस्सा यह है कि यह सिर्फ एक लड़के की success story नहीं… यह proof है कि हर “average” बच्चे के अंदर एक “legend” छुपा होता है। society जिसे कमजोर कहती है, कभी-कभी वही दुनिया बदल देता है। वो बच्चा जो 5वीं में fail था, आज इंडिया के startup ecosystem का सबसे बड़ा icon है। वो लड़का जो दबा-डरा रहता था, आज लाखों लोगों के confidence की वजह है। और वो इंसान जो कभी खुद तुलना से टूटता था, आज comparison से ऊपर जी रहा है।
अगर आप student हैं और आपको लगता है कि marks आपकी कीमत तय करते हैं—तो यह कहानी आपके लिए है। अगर आप middle class family से आते हैं और सोचते हैं कि बड़ी success सिर्फ बड़े शहरों के लोगों के लिए होती है—तो यह कहानी आपके लिए है। अगर आप life में टूट चुके हैं, complain करते हैं, डरते हैं, अपने आपको कम आंकते हैं—तो यह कहानी आपको एक बात याद दिलाती है कि आपकी शुरुआत कैसी है, यह important नहीं… आपकी ending कैसी होगी, यह पूरी तरह आपके हाथ में है।
दीपिंदर गोयल हमें एक सबसे बड़ा lesson देते हैं—आपकी story society नहीं लिखती, आप लिखते हैं। failure आपके life का chapter हो सकता है, conclusion नहीं। background आपकी पहचान नहीं बनाता, आपकी मेहनत बनाती है। और सबसे बड़ा truth यह है कि destiny luck नहीं, determination से लिखी जाती है।
Conclusion
अगर हमारे आर्टिकल ने आपको कुछ नया सिखाया हो, तो इसे शेयर करना न भूलें, ताकि यह महत्वपूर्ण जानकारी और लोगों तक पहुँच सके। आपके सुझाव और सवाल हमारे लिए बेहद अहम हैं, इसलिए उन्हें कमेंट सेक्शन में जरूर साझा करें। आपकी प्रतिक्रियाएं हमें बेहतर बनाने में मदद करती हैं।
GRT Business विभिन्न समाचार एजेंसियों, जनमत और सार्वजनिक स्रोतों से जानकारी लेकर आपके लिए सटीक और सत्यापित कंटेंट प्रस्तुत करने का प्रयास करता है। हालांकि, किसी भी त्रुटि या विवाद के लिए हम जिम्मेदार नहीं हैं। हमारा उद्देश्य आपके ज्ञान को बढ़ाना और आपको सही तथ्यों से अवगत कराना है।
अधिक जानकारी के लिए आप हमारे GRT Business Youtube चैनल पर भी विजिट कर सकते हैं। धन्यवाद!”

