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Zepto की रॉकेट उड़ान! महज़ 22 की उम्र में अरबपति बने दो लड़के, जिन्होंने दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया।

Zepto

एक ऐसी उम्र, जब ज़्यादातर लोग कॉलेज की क्लास मिस होने की टेंशन में रहते हैं, internship मिलेगी या नहीं इस पर बहस करते हैं, और घरवालों के सवालों से बचने की कोशिश करते हैं कि आगे क्या करना है। उसी उम्र में दो लड़के सुबह उठते हैं, मोबाइल स्क्रीन खोलते हैं, और देखते हैं कि उनकी कंपनी की वैल्यूएशन पचास हज़ार करोड़ रुपये के पार जा चुकी है।

उसी दिन उनका नाम देश की सबसे बड़ी रिच लिस्ट में सबसे ऊपर चमक रहा होता है। यही वो पल है, जहां ये कहानी शुरू होती है। क्योंकि ये सिर्फ अमीर बनने की कहानी नहीं है, ये उस generation की कहानी है जो उम्र से नहीं, सोच से बड़ी हो चुकी है।

जब Hurun India और IDFC First Private की नई लिस्ट सामने आई, तो ज़्यादातर लोगों की नज़र बड़े-बड़े कॉरपोरेट नामों पर थी। लेकिन जैसे ही लिस्ट के टॉप नाम सामने आए, पूरा नैरेटिव बदल गया। भारत की 200 सबसे मूल्यवान कंपनियों की इस लिस्ट में, जिनकी शुरुआत साल 2000 के बाद हुई, सबसे ऊपर दो ऐसे नाम थे जिनकी उम्र सुनकर लोग दोबारा चेक करने लगे। महज 22 साल के कैवल्य वोहरा और 23 साल के आदित पालिचा। Zepto के फाउंडर्स। भारत के सबसे कम उम्र के self-made टॉप उद्यमी।

Zepto की वैल्यूएशन आज करीब 52,400 करोड़ रुपये मानी जा रही है। यह सिर्फ एक नंबर नहीं है। यह उस speed, उस execution और उस timing का सबूत है, जिसने इन दोनों को उन उद्योगपतियों से आगे खड़ा कर दिया है जिनके नाम दशकों से बिज़नेस किताबों में लिखे जाते रहे हैं। यही वजह है कि इस लिस्ट में कैवल्य वोहरा पहले और आदित पालिचा दूसरे स्थान पर हैं, और पूरा बिज़नेस इंडिया इस बदलाव को ध्यान से देख रहा है।

कैवल्य और आदित की कहानी बाहर से देखने पर किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसी लगती है, लेकिन अंदर से ये relentless मेहनत और clarity of thought की कहानी है। दोनों ही Stanford University के computer science program से जुड़े रहे। Stanford, जहां पहुंचना ही ज़िंदगी की सबसे बड़ी उपलब्धि माना जाता है। लेकिन इन दोनों के लिए Stanford मंज़िल नहीं था, एक पड़ाव था। और जब उन्हें लगा कि असली सीख क्लासरूम के बाहर है, तो उन्होंने वो कदम उठाया जो ज़्यादातर लोग लेने से डरते हैं — dropout।

साल 2020। पूरी दुनिया कोविड के लॉकडाउन में बंद थी। लोग घरों में थे, शहर ठहरे हुए थे, और grocery shopping एक challenge बन चुकी थी। ऑनलाइन delivery apps overload हो रहे थे, delays आम बात थी, और local kirana stores भी दबाव में थे। इसी chaos के बीच कैवल्य और आदित ने एक simple लेकिन खतरनाक सवाल पूछा — क्या भारत में किराने का सामान और तेज़ पहुंचाया जा सकता है?

यहीं से एक idea ने जन्म लिया। शुरुआत में कंपनी का नाम Zepto नहीं था। इसे Kiranakart कहा गया। Vision था local kirana ecosystem को technology से जोड़ना और delivery को 45 मिनट तक लाना। उस वक्त ये भी ambitious माना जा रहा था। लेकिन जैसे-जैसे ground reality समझ में आई, दोनों को एहसास हुआ कि भारत जैसे densely populated शहरों में असली game speed का है।

यहीं से आया वो फैसला, जिसने पूरी quick-commerce इंडस्ट्री को redefine कर दिया — 10 मिनट delivery। बहुत लोगों ने कहा ये impossible है। किसी ने कहा economics नहीं चलेगी। किसी ने कहा ये सिर्फ marketing stunt है। लेकिन Zepto ने बहस नहीं की, execution किया।

Dark stores, micro-warehouses, hyperlocal inventory, real-time demand prediction और data-driven rider placement — Zepto ने logistics को experiment नहीं, science की तरह treat किया। हर locality का अलग data, हर minute की planning, और हर order का precise routing। Result ये हुआ कि 10 मिनट delivery सिर्फ promise नहीं, habit बन गई।

धीरे-धीरे Zepto metro cities में फैलने लगा। Mumbai, Bangalore, Delhi-NCR, Chennai, Hyderabad। Urban youth के लिए Zepto convenience का synonym बन गया। College students, working professionals, young families — सबके लिए एक common solution। और जैसे-जैसे users बढ़ते गए, valuation ने rocket की तरह उड़ान भरी।

आज Zepto सिर्फ एक startup नहीं है, बल्कि India की changing consumption behavior का symbol है। यही वजह है कि इतनी कम उम्र में इसके founders Hurun की लिस्ट में सबसे ऊपर पहुंच गए हैं। कैवल्य वोहरा, उम्र सिर्फ 22 साल। Hurun India Rich List 2025 के मुताबिक उनकी net worth करीब 4,480 करोड़ रुपये है। सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि उन्होंने पहली बार Hurun Rich List में entry 19 साल की उम्र में ही कर ली थी। यानी जिस उम्र में लोग पहली बार voting card बनवाते हैं, उस उम्र में कैवल्य करोड़ों की wealth के साथ देश की richest list में शामिल हो चुके थे।

दूसरी तरफ आदित पालिचा। Zepto के co-founder और CEO। उम्र 23 साल। अगर कैवल्य vision और tech हैं, तो आदित execution और scale हैं। Strategy, operations और growth — तीनों का संतुलन। यही partnership Zepto की असली ताकत है। लेकिन ये कहानी सिर्फ दो लोगों की नहीं है। ये कहानी उस India की है, जहां entrepreneurship अब age-dependent नहीं रही। Hurun की इस लिस्ट में तीसरे नंबर पर Bharat Pe के शाश्वत नकरानी हैं, जिनकी उम्र सिर्फ 27 साल है। Fintech से लेकर solar और green energy startups तक, युवा founders टॉप 10 में जगह बना रहे हैं।

इस पूरी लिस्ट में शामिल 200 कंपनियों की कुल वैल्यू करीब 42 लाख करोड़ रुपये है। और ये कंपनियां देश के 51 अलग-अलग शहरों से आती हैं। इसका मतलब ये है कि entrepreneurship अब सिर्फ Bangalore या Mumbai तक सीमित नहीं रही। Tier-2 और Tier-3 cities भी इस नई economy का हिस्सा बन चुकी हैं।

एक और बड़ा संकेत इस लिस्ट में साफ दिखता है। इस साल पहली बार Eternal के founder दीपिंदर गोयल ने DMart के R.K. Damani को पीछे छोड़ते हुए टॉप पोज़िशन हासिल की है। ये सिर्फ ranking का बदलाव नहीं है, ये mindset का बदलाव है। Old-school retail से new-age tech की तरफ power shift।

Zepto की कहानी पर लौटें तो बहुत लोग कहते हैं कि ये funding का खेल है। लेकिन funding सिर्फ fuel होती है। Engine execution होता है। और execution में Zepto ने वो कर दिखाया जो बहुत कम कंपनियां कर पाती हैं। 10 मिनट delivery का मतलब सिर्फ speed नहीं है। इसका मतलब inventory risk, operational pressure, rider safety और regulatory scrutiny भी है। लेकिन Zepto ने speed के साथ discipline भी रखा। यही वजह है कि कंपनी सिर्फ growth नहीं, sustainability की तरफ भी बढ़ रही है।

सबसे inspiring बात ये है कि कैवल्य और आदित खुद को celebrity founders की तरह पेश नहीं करते। कोई unnecessary glamour नहीं, कोई hollow motivation नहीं। Focus सिर्फ product, data और long-term vision पर। शायद यही maturity उन्हें बाकी लोगों से अलग बनाती है। ये कहानी parents के लिए भी है, जो मानते हैं कि पहले degree, फिर सपना। Zepto की कहानी कहती है कि degree ज़रूरी है, लेकिन direction उससे भी ज़्यादा ज़रूरी है।

ये कहानी students के लिए है, जो सोचते हैं कि world-class companies सिर्फ Silicon Valley में बनती हैं। Zepto साबित करता है कि India में भी global-scale companies बनाई जा सकती हैं। और ये कहानी critics के लिए भी है, जो कहते हैं कि आज के बच्चे जल्दी successful हो जाते हैं। सच्चाई ये है कि ये बच्चे जल्दी successful नहीं हुए, ये जल्दी responsible हो गए।

22 और 23 की उम्र में जहां एक गलती करोड़ों में पड़ सकती है, वहां company चलाना कोई खेल नहीं है। Pressure immense है। Expectations sky-high हैं। लेकिन Zepto के founders ने दिखाया कि age सिर्फ number है। असली पहचान execution से बनती है।

आज जब आप Zepto app खोलते हैं और 10 मिनट में grocery आपके दरवाज़े पर होती है, तो याद रखिए — इसके पीछे दो ऐसे लड़कों की कहानी है जिन्होंने comfort zones छोड़े, दुनिया की best university छोड़ी, और uncertainty को चुना। और शायद यही वजह है कि आज Hurun list में बड़े-बड़े दिग्गजों को पीछे छोड़कर सबसे ऊपर खड़े हैं — कैवल्य वोहरा और आदित पालिचा।

Conclusion

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