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Legendary: Warren Buffett की जादुई कहानी: 3 शेयर से बदली किस्मत और बने 13 लाख करोड़ के मालिक!

Warren Buffett

ज़रा सोचिए… एक बच्चा, जिसकी उम्र खेलकूद और शरारतों की हो, वही बच्चा स्कूल के बैग में किताबों के साथ-साथ शेयर मार्केट की रिपोर्टें छिपाकर लाता हो। जहाँ बाकी बच्चे कॉमिक्स और कार्टून में खोए रहते हैं, वहाँ यह बच्चा कंपनियों के भविष्य को पढ़ने और समझने की कोशिश करता हो।

उसकी जेब में टॉफी खरीदने जितने पैसे हों, लेकिन दिमाग में अरबों डॉलर कमाने का सपना पल रहा हो। यह बच्चा कोई और नहीं, बल्कि वही इंसान है, जिसने सिर्फ़ 3 शेयर खरीदकर अपनी ज़िंदगी की दिशा बदल दी और आगे चलकर दुनिया के 10वें सबसे अमीर शख्स बने—Warren Buffett। आज हम इसी विषय पर गहराई में चर्चा करेंगे।

30 अगस्त 1930 को अमेरिका के नेब्रास्का राज्य के छोटे से शहर ओमाहा में जन्मे Warren Buffett की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं लगती। उनका बचपन आम बच्चों की तरह ही शुरू हुआ था, लेकिन जिस माहौल में वे बड़े हुए, उसने उन्हें अलग सोच दी। उनके पिता, हावर्ड बफे, पेशे से एक स्टॉक ब्रोकर थे।

घर के ड्रॉइंग रूम से लेकर ऑफिस तक, चारों ओर शेयर मार्केट की चर्चा सुनाई देती थी। छोटे-से वॉरेन का बचपन इन्हीं कहानियों और अंकों के बीच बीता। शायद यही वजह थी कि उन्हें छोटी उम्र से ही पैसों और Investment की समझ आने लगी। जब उनके हमउम्र दोस्त बेसबॉल और खिलौनों में दिलचस्पी लेते थे, तब बफे स्टॉक चार्ट्स और बिजनेस अख़बारों में झाँकने लगे।

वॉरेन की ज़िंदगी की पहली कमाई बेहद दिलचस्प है। 12 साल की उम्र में 1942 में उन्होंने अपना पहला Investment किया। उन्होंने अमेरिकन पेट्रोलियम कंपनी—सिटीज़ सर्विस प्रिफर्ड—के तीन शेयर खरीदे। उस समय किसी ने भी सोचा नहीं था कि यह मासूम-सा बच्चा आने वाले समय में शेयर बाज़ार का भगवान कहलाएगा। इन तीन शेयरों पर उन्होंने चार महीने बाद जब बिक्री की, तो उन्हें पाँच डॉलर का छोटा-सा मुनाफा हुआ। यह रकम सुनने में भले ही कम लगे, लेकिन उस पल ने वॉरेन की ज़िंदगी बदल दी। उन्हें अहसास हुआ कि सही जगह लगाया गया पैसा न सिर्फ़ बढ़ता है, बल्कि आपके भविष्य की पूरी तस्वीर बदल सकता है। यह पाँच डॉलर उनकी किस्मत की पहली सीढ़ी था।

यहाँ से वॉरेन ने पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा। 14 साल की उम्र तक आते-आते उन्होंने लगभग 200 डॉलर कमा लिए थे। ज़रा सोचिए, एक किशोर, जो अभी स्कूल की डेस्क पर बैठा है, उसकी जेब में इतनी रकम है कि कई परिवार महीनों में भी नहीं कमा पाते। यही वह समय था जब वॉरेन ने तय कर लिया था कि उनका असली खेल कंपनियों में हिस्सेदारी लेना है, और वे इसे एक पेशे के रूप में अपनाएँगे। जबकि अधिकतर बच्चे बड़े होकर डॉक्टर, इंजीनियर या वकील बनने का सपना देखते थे, बफे ने मन ही मन खुद को करोड़पति और Investor के रूप में देख लिया था।

समय बीतता गया और वॉरेन ने अपनी शिक्षा के साथ-साथ Investment की समझ को और गहराई से निखारा। उन्होंने कई नामी विश्वविद्यालयों से पढ़ाई की, लेकिन असली शिक्षा उन्हें किताबों और अनुभवों से मिली। उन्होंने बेंजामिन ग्राहम की लिखी किताबें पढ़ीं, जिन्हें शेयर मार्केट का “गॉडफादर” कहा जाता है। ग्राहम के सिद्धांतों ने वॉरेन की सोच बदल दी—कि किसी भी कंपनी को सिर्फ़ उसके शेयर प्राइस से नहीं, बल्कि उसकी असली कीमत और भविष्य की क्षमता से आँकना चाहिए। यही विचार वॉरेन की सबसे बड़ी ताक़त बना।

35 साल की उम्र में यानी 1965 में वॉरेन ने एक बड़ा कदम उठाया। उन्होंने अपने करीबी सहयोगी चार्ली मुंगर के साथ मिलकर बर्कशायर हैथवे नाम की कंपनी का अधिग्रहण किया। उस समय यह कंपनी एक टेक्सटाइल मिल थी और हालत इतनी ख़राब थी कि इसे दिवालिया घोषित करना लगभग तय माना जा रहा था। लेकिन वॉरेन ने वही किया जो वे हमेशा से करते आए थे—लोगों की नज़र जहाँ खत्म हो जाती है, वहाँ से आगे देखने की कला। उन्होंने इस मरती हुई कंपनी को खरीदा और उसे एक विशाल साम्राज्य में बदल दिया। यह वही कंपनी है, जिसने वॉरेन बफे को दुनिया के सबसे बड़े Investor और अरबपति की श्रेणी में पहुँचा दिया।

बर्कशायर हैथवे का जन्म 1839 में ओलिवर चेस ने किया था, लेकिन यह कंपनी 1960 के दशक में बुरी तरह घाटे में थी। किसी और के लिए यह बोझ होती, मगर वॉरेन ने इसे अवसर बनाया। धीरे-धीरे उन्होंने इस कंपनी को टेक्सटाइल से हटाकर डायवर्सिफाइड होल्डिंग कंपनी बना दिया। इसमें उन्होंने बीमा, फाइनेंस, कपड़ा, मीडिया, आइसक्रीम, फर्नीचर, रेलवे, ऊर्जा और कंस्ट्रक्शन जैसे तमाम क्षेत्रों को शामिल किया। यही वह मास्टरस्ट्रोक था जिसने बर्कशायर को इतिहास के सबसे ताक़तवर बिजनेस समूहों में बदल दिया।

आज बर्कशायर हैथवे का मार्केट कैप 1ट्रिलियन डॉलर यानी 87 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा है। ज़रा सोचिए, 60 के दशक में जो कंपनी दिवालिया होने वाली थी, वही आज दुनिया की 11वीं सबसे बड़ी कंपनी है। इसका मुख्यालय ओमाहा, नेब्रास्का के ब्लैकस्टोन प्लाज़ा में है और 2024 के आंकड़ों के मुताबिक, इसमें लगभग चार लाख कर्मचारी काम कर रहे हैं। इतनी बड़ी संख्या में लोगों को रोज़गार देना अपने आप में किसी राष्ट्र के बराबर ताक़त रखता है।

अब बात करते हैं बर्कशायर हैथवे के शेयर की। यह शेयर दुनिया का सबसे महँगा शेयर माना जाता है। 22 अगस्त 2025 को इसके एक शेयर की कीमत 4,59,800 डॉलर थी। यानी भारतीय रुपए में करीब 4 करोड़ रुपए। सोचिए, सिर्फ़ एक शेयर रखने वाला भी करोड़पति है। इस शेयर का 52-वीक हाई लेवल 6,47,039 डॉलर यानी लगभग 5.63 करोड़ रुपए तक पहुँच चुका है। यह वैसा शेयर है जिसे आम लोग खरीदने का सोच भी नहीं सकते। लेकिन यही शेयर वॉरेन बफे को “ओमाहा का भविष्यवक्ता” बना चुका है।

अब ज़रा वॉरेन की संपत्ति पर नज़र डालते हैं। फोर्ब्स की रियलटाइम बिलियनेयर लिस्ट के अनुसार, वॉरेन बफे इस समय दुनिया के 10वें सबसे अमीर इंसान हैं। उनकी कुल संपत्ति लगभग 147 अरब डॉलर है, जो करीब 13 लाख करोड़ रुपए होती है। यह रकम भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टीसीएस के कुल मार्केट कैप से भी कहीं ज्यादा है। 94 साल की उम्र में भी वॉरेन आज भी Investment की दुनिया के सबसे बड़े नाम हैं। उनके पोर्टफोलियो में BYD, न्यू होल्डिंग्स, टी-मोबाइल, वेरिसाइन, कोका-कोला और एऑन जैसी कंपनियों के स्टॉक्स शामिल हैं।

लेकिन उनकी सबसे बड़ी ताक़त सिर्फ़ पैसे कमाना नहीं, बल्कि पैसे को बढ़ाना और दूसरों को उसका महत्व समझाना रही है। वे हमेशा कहते हैं कि शेयर मार्केट असल में धैर्य का खेल है। “जो इंसान जल्दी अमीर बनने के चक्कर में है, वह अक्सर सब कुछ खो देता है।” वॉरेन की यह सोच ही उन्हें बाकी Investors से अलग बनाती है। उन्होंने अपनी कंपनी की बैठकों में बार-बार यही संदेश दिया है कि “Investment केवल पैसे का नहीं, सोच का खेल है।”

वॉरेन बफे ने यह भी साबित किया कि अमीर बनना केवल एक सपना नहीं, बल्कि सही रणनीति और धैर्य से संभव है। उन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी साधारण जीवन जीते हुए बिताई। आज भी वे उसी घर में रहते हैं जिसे उन्होंने 1958 में 31,500 डॉलर में खरीदा था। न तो आलीशान बंगले, न ही महँगी गाड़ियाँ—बस साधारण-सा जीवन। लेकिन उनके दिमाग की ताक़त और फैसलों की सटीकता ने उन्हें दुनिया का “Investment सम्राट” बना दिया।

उनकी कहानी हम सबको यह सिखाती है कि बड़े सपने देखने के लिए बड़ी जेब नहीं, बल्कि बड़ा दिमाग और धैर्य चाहिए। वॉरेन की ज़िंदगी का सबसे बड़ा सबक यही है कि “शेयर खरीदने से पहले कंपनी को जानो, उसका भविष्य समझो, और फिर लंबे समय तक इंतज़ार करो।” यही कारण है कि तीन छोटे शेयरों से शुरू हुई उनकी यात्रा आज 13 लाख करोड़ की संपत्ति तक पहुँची है।

Conclusion

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