ज़रा सोचिए… दक्षिण कोरिया की एक ग्लोबल कंपनी, जिसने भारत में 29 साल तक कारोबार किया, लेकिन कभी किसी भारतीय को अपनी सबसे ऊँची कुर्सी नहीं सौंपी। और फिर अचानक, एक दिन, उस कंपनी ने ऐलान किया — “अब भारत की स्टीयरिंग, एक भारतीय के हाथों में होगी।” यही वो पल था जब नाम आया — Tarun Garg।
एक ऐसा नाम, जिसने न सिर्फ़ हुंडई मोटर इंडिया के इतिहास को बदल दिया, बल्कि पूरे भारतीय ऑटो उद्योग में एक नई उम्मीद जगाई — कि लीडरशिप अब सिर्फ़ विदेशी नहीं, भारतीय भी बन सकते हैं। पर सवाल ये है — आखिर कौन हैं Tarun Garg? कैसे एक छोटे से शहर से उठकर उन्होंने उस कुर्सी तक सफर तय किया, जहाँ पहुँचने का सपना कई बड़े कॉर्पोरेट दिग्गज भी नहीं देख पाते?
कहानी की शुरुआत होती है उत्तर प्रदेश की गलियों से। एक साधारण परिवार में जन्मे तरुण बचपन से ही ‘इंजन’ और ‘मैकेनिज्म’ से fascinated थे। वो चीज़ों को तोड़कर समझते थे — कैसे काम करती हैं, क्यों चलती हैं। उनके दोस्तों के लिए ये बस एक शौक था, पर तरुण के लिए ये curiosity, आगे चलकर उनकी पहचान बनने वाली थी।
दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी से Mechanical Engineering की पढ़ाई ने उनके अंदर की मशीनों को समझने की उस भूख को दिशा दी। और फिर जब उन्होंने IIM लखनऊ से MBA किया, तो उस curiosity ने shape ले लिया — strategy और vision के रूप में। यहीं से शुरू हुआ वो सफर, जो उन्हें corporate India के सबसे ऊँचे मुकाम तक ले गया।
साल था 1995। भारत का ऑटोमोबाइल सेक्टर global brands से भरने लगा था। मारुति, टाटा, महिंद्रा, और अब नई विदेशी कंपनियाँ अपनी पकड़ बना रही थीं।https://youtu.be/cL7PSMM6GPs
Tarun Garg गर्ग ने करियर की शुरुआत की मारुति सुज़ुकी से। यहाँ उन्होंने न सिर्फ़ सेल्स और मार्केटिंग सीखी, बल्कि ‘भारतीय ग्राहक को समझने’ की कला सीखी। उनके लिए कार बेचना सिर्फ़ transaction नहीं था — वो इसे एक emotion मानते थे। उन्होंने हमेशा कहा — “भारतीय कार नहीं खरीदता, वो अपने सपनों का पहला comfort zone खरीदता है।”
मारुति में उन्होंने 25 साल से ज्यादा समय बिताया — और इस दौरान parts, logistics, accessories, sales, marketing, हर एक क्षेत्र में अपनी expertise साबित की। धीरे-धीरे उनका नाम industry में एक sharp strategist के रूप में गूँजने लगा।
फिर आया साल 2019। हुंडई मोटर इंडिया लिमिटेड, जो भारत में दूसरी सबसे बड़ी कार कंपनी थी, उसे एक ऐसे लीडर की तलाश थी जो brand को सिर्फ़ numbers से नहीं, बल्कि लोगों के दिलों से connect कर सके। और तभी चुना गया नाम — Tarun Garg। उन्होंने पद संभाला — Head of Sales, Service & Marketing के रूप में। पहले दिन से ही उनका vision साफ़ था — “हुंडई सिर्फ़ एक कार नहीं, एक भरोसे का नाम बननी चाहिए।”
उन्होंने ground level से चीज़ें बदलनी शुरू कीं — dealerships को सिर्फ़ बिक्री केंद्र नहीं, experience zones बनाया। customers को सिर्फ़ buyers नहीं, ब्रांड के ambassadors माना। और फिर साल 2020 आया, और दुनिया थम गई। Pandemic ने सब industries को हिला दिया, कारें बिकनी बंद, फैक्ट्रियाँ रुक गईं। लेकिन Tarun Garg ने इस संकट को एक अवसर में बदला। उन्होंने कहा — “लोग अब अपनी safety को प्राथमिकता देंगे, और personal mobility की demand बढ़ेगी।” उनकी इस दूरदर्शिता ने हुंडई को lockdown के बाद सबसे तेज़ रिकवरी वाली कंपनी बना दिया।
i20, Venue, Creta जैसे models की strategic re-launching और digital buying experience के ज़रिए, उन्होंने ग्राहकों को showroom से बाहर निकले बिना कार खरीदने का भरोसा दिलाया। हुंडई के sales graph ने फिर से ऊपर उड़ान भरी — और company ने तीन साल लगातार record sales और profits दर्ज किए। Tarun Garg की leadership का सबसे बड़ा कमाल था उनका लोगों से जुड़ने का तरीका। वो हर कर्मचारी से कहते थे — “हम मशीनें नहीं बेचते, हम मुस्कानें बेचते हैं।”
उन्होंने corporate culture को मानवीय बनाया — हर salesman को empowered किया, हर dealer को voice दी। हुंडई की marketing campaigns में पहली बार ‘भारतीय भावना’ दिखने लगी। चाहे वो “Made for India” philosophy हो या rural reach strategy — Tarun Garg ने brand को भारत की सड़कों और दिलों दोनों में उतारा। 2023 में, हुंडई ने उन्हें Chief Operating Officer (COO) नियुक्त किया। और बस, फिर उनकी रफ़्तार किसी turbo engine से कम नहीं रही।
उनके कार्यकाल में हुंडई ने भारत में अपना सबसे बड़ा IPO पूरा किया — जो न सिर्फ़ कंपनी के लिए, बल्कि पूरे भारतीय ऑटो सेक्टर के लिए मील का पत्थर था। इसी दौरान, हुंडई ने EV segment में भी आक्रामक entry की। Tarun Garg ने कहा — “भारत का भविष्य electric है, लेकिन emotion अब भी fuel है।” उन्होंने इस hybrid philosophy पर काम करते हुए petrol से लेकर EV तक हर segment को मजबूती से संतुलित किया। हुंडई के global CEO José Muñoz ने एक बयान में कहा — “Tarun Garg is not just a manager, he’s a movement.”
उन्होंने आगे कहा — “उनके नेतृत्व में कंपनी ने तीन साल लगातार record profits दिए, और भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर में customer satisfaction index में top पर रही। वह ऐसे leader हैं जो लोगों को प्रेरित करते हैं, डराते नहीं।” यही वजह थी कि साल 2025 के अंत में हुंडई ने घोषणा की — जनवरी 2026 से Tarun Garg को MD और CEO बनाया जाएगा। यानी, पहली बार किसी भारतीय को वो कुर्सी मिली, जो अब तक केवल विदेशी हाथों में थी।
लेकिन इस सफलता के पीछे एक और कहानी छिपी है — patience और perseverance की। Tarun Garg हमेशा कहते हैं — “Success overnight नहीं होती, ये हर दिन के consistent छोटे कदमों का result होती है।” उनकी ज़िंदगी का हर कदम यही बताता है — उन्होंने shortcuts नहीं चुने, उन्होंने रास्ते खुद बनाए। मारुति में जब वो junior executive थे, तब भी वो customers के call खुद सुनते थे।
हुंडई में COO बनने के बाद भी, वो हर हफ्ते field visit करते रहे — mechanics, dealers, sales staff से बात करते रहे। उनका मानना था — “जब आप जमीनी आवाज़ सुनना छोड़ देते हैं, तो ऊपर का decision नीचे तक असर नहीं करता।” UP के लखनऊ से उनका emotional connection आज भी बरकरार है।
IIM Lucknow में बिताए उनके सालों ने उन्हें सिखाया — “strategy सिर्फ़ boardroom में नहीं बनती, वो ground reality से बनती है।” आज भी जब वो IIM जाते हैं guest lectures के लिए, तो छात्रों से कहते हैं — “corporate दुनिया में सबसे बड़ी skill empathy है — अपने consumer, अपने colleague, अपने देश को समझना।”
शायद यही empathy, उनके leadership का सबसे बड़ा secret ingredient है। हुंडई के आने वाले पांच साल के roadmap में, Tarun Garg गर्ग की सोच साफ़ झलकती है। कंपनी ने भारत में 45,000 करोड़ का नया investment करने का एलान किया है — जिसमें EV manufacturing, local R&D, battery localization और export hub बनाना शामिल है। Tarun Garg मानते हैं कि भारत अब सिर्फ़ market नहीं, manufacturing power बन चुका है।
उनका vision है — “India will not just drive cars, India will drive the future.” उनके मुताबिक़, हुंडई इंडिया को अगले पाँच साल में carbon-neutral operations और 25% से ज़्यादा EV sales ratio तक पहुँचाना है। यानी उनका लक्ष्य सिर्फ़ business growth नहीं, sustainable growth है। लेकिन हर journey की तरह, Tarun Garg की राह भी चुनौतियों से खाली नहीं रही। जब उन्होंने हुंडई में कदम रखा, तो industry में competition अपने चरम पर था।
Kia, MG, Tata — सब एक-दूसरे से आगे निकलने की दौड़ में थे। ऐसे में हुंडई के लिए अपनी identity को strong रखना मुश्किल था। पर Tarun Garg ने game बदल दिया — उन्होंने कहा, “हम दूसरों से compete नहीं करेंगे, हम खुद को improve करेंगे।” और यही mindset हुंडई को अलग league में ले गया।
उन्होंने हर launch को festival बनाया, हर feedback को improvement का मौका। 2024 में जब भारत का ऑटो मार्केट 4 मिलियन units के पार गया, हुंडई की हिस्सेदारी लगभग 15% थी — और इसमें सबसे बड़ा योगदान Tarun Garg की strategy का था। उन्होंने rural India में aggressive expansion किया, EVs के लिए dedicated charging ecosystem बनाया, और “Smart India, Smart Mobility” campaign से youth connect को मज़बूत किया।
उनका मानना है — “अगर कंपनी को long run में survive करना है, तो उसे next generation के mindset को समझना होगा।” वो कहते हैं — “Car सिर्फ़ एक product नहीं होती, वो किसी के जीवन का upgrade होती है। जब एक middle-class family नई कार खरीदती है, वो सिर्फ़ वाहन नहीं, अपने self-respect का नया chapter खरीदती है।” ऐसे शब्द शायद किसी economist के नहीं, बल्कि एक समझदार इंसान के हो सकते हैं, जिसने आम भारतीय की नब्ज़ को महसूस किया हो।
जब उनसे एक इंटरव्यू में पूछा गया कि “हुंडई इंडिया का MD बनना कैसा लगा?” तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा — “यह मेरे लिए personal achievement नहीं, भारत के हर उस युवा की जीत है, जो मेहनत से आगे बढ़ना चाहता है।” उनकी humility, उनकी grounded सोच ही उन्हें बाकी leaders से अलग बनाती है। वो अपने हर success को team के नाम करते हैं, और हर failure को खुद स्वीकार करते हैं।
Conclusion
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