ज़रा सोचिए… सुबह की तस्वीरों में आप देखते हैं कि अमेरिका का सबसे ताकतवर नेता भारत के प्रधानमंत्री के साथ मंच पर खड़ा है। दोनों के चेहरों पर मुस्कान है, हाथ आपस में कसकर जुड़े हुए हैं, कैमरों की चमक और तालियों की गड़गड़ाहट उस पल को दोस्ती का प्रतीक बना देती है। दुनिया यह मान लेती है कि भारत और अमेरिका अब एक अटूट गठबंधन में बंध चुके हैं। लेकिन रात होते-होते वही तस्वीर बदल जाती है।
वही नेता जो सुबह मुस्कान के साथ भारत का हाथ थाम रहा था, रात में उसी हाथ की पीठ में छुरा घोंपने की तैयारी करता है। यह कोई कल्पना या अतिशयोक्ति नहीं, बल्कि अमेरिका के जाने-माने अर्थशास्त्री Steve Hanke का सीधा बयान है। Steve Hanke, जो कभी अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन के सलाहकार रह चुके हैं, उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों को लेकर जो चेतावनी दी है, उसने भारत समेत पूरी दुनिया को सोचने पर मजबूर कर दिया है। आज हम इसी विषय पर गहराई में चर्चा करेंगे।
Steve Hanke ने बेहद साफ शब्दों में कहा—“ट्रंप ऐसे व्यक्ति हैं जो सुबह मोदी से हाथ मिला सकते हैं और रात में उनकी पीठ में छुरा घोंप सकते हैं।” यह वाक्य सिर्फ कूटनीति का विश्लेषण नहीं है, बल्कि आने वाले समय की गहरी झलक है। यह बताता है कि ट्रंप पर आंख मूंदकर भरोसा करना भारत के लिए कितना खतरनाक हो सकता है। दोस्ती का मुखौटा पहनकर धोखे की राजनीति करना ट्रंप के व्यक्तित्व का हिस्सा माना जा रहा है। और अगर भारत सरकार ने इसे नज़रअंदाज़ किया, तो इसका खामियाज़ा आने वाले वर्षों में भुगतना पड़ सकता है।
Steve Hanke का तर्क साफ है। उनका मानना है कि आज की दुनिया में ताकत का पैमाना सिर्फ हथियारों और सेनाओं से तय नहीं होता। असली ताकत इस बात से आती है कि किसी देश के पास कितनी तकनीक है, कितने rare resources पर उसका नियंत्रण है और विज्ञान के क्षेत्र में उसकी स्थिति कितनी मजबूत है।
इस कसौटी पर अमेरिका के मुकाबले चीन कहीं ज्यादा शक्तिशाली बन चुका है। चीन ने वर्षों की सुनियोजित रणनीति के तहत माइनिंग, मेटलर्जी और मटेरियल साइंस में अपना वर्चस्व कायम कर लिया है। इन क्षेत्रों में उसकी पकड़ इतनी मजबूत है कि व्हाइट हाउस की राजनीतिक ताकत भी उसके सामने कमजोर पड़ती दिखती है। यही वजह है कि Steve Hanke कहते हैं—भारत को यह सोचकर अमेरिका पर भरोसा नहीं करना चाहिए कि वह चीन के खिलाफ भारत की ढाल बनेगा।
चीन की इस बढ़ती ताकत ने ट्रंप को मजबूर किया है कि वे अपनी प्राथमिकताएं बदलें। Steve Hanke का कहना है कि ट्रंप धीरे-धीरे भारत से दूरी बना रहे हैं और पाकिस्तान की ओर बढ़ रहे हैं। यह एक चौंकाने वाला तथ्य है, क्योंकि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था लगभग ध्वस्त हो चुकी है। महंगाई आसमान छू रही है, विदेशी कर्ज़ का बोझ बढ़ता जा रहा है, और विकास की रफ्तार लगभग ठहर गई है। फिर भी ट्रंप पाकिस्तान को गले क्यों लगा रहे हैं? इसका जवाब Steve Hanke भू-राजनीति में ढूंढते हैं।
उन्होंने बताया कि पाकिस्तान का महत्व इसलिए बढ़ गया है क्योंकि, अमेरिका को ईरान के पास स्थित एयरबेस तक पहुंचने के लिए पाकिस्तान की ज़रूरत है। यह भूगोल का खेल है। पाकिस्तान अमेरिका को वह रणनीतिक रास्ता देता है जो किसी और देश से नहीं मिल सकता। Steve Hanke ने खुलासा किया कि पाकिस्तान के फील्ड मार्शल पिछले एक महीने में दो बार अमेरिका आ चुके हैं। ये यात्राएं सिर्फ औपचारिक मुलाक़ातें नहीं थीं, बल्कि इनके पीछे ईरान पर हमले की तैयारियां छिपी थीं। अगर ऐसा है, तो इसका मतलब साफ है कि अमेरिका पाकिस्तान को फिर से अपने लिए अहम बना रहा है, और यह भारत के लिए बेहद चिंताजनक है।
Steve Hanke ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर भी बड़ा खुलासा किया। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों ने देश के विदेशी कर्ज़ का लगभग, 37% हिस्सा दुबई जैसे विदेशी ठिकानों में जमा कर रखा है। यानी पाकिस्तान की जनता कर्ज़ तले दबी हुई है, लेकिन सेना अपने डॉलर सुरक्षित ठिकानों में रख रही है। यह देश की आर्थिक दुर्दशा का सबसे बड़ा सबूत है। इसके बावजूद अमेरिका पाकिस्तान से हाथ मिला रहा है, क्योंकि उसके लिए रणनीतिक महत्व ज़्यादा अहम है, न कि वहां की जनता का भविष्य।
लेकिन यह सब सिर्फ भारत-पाकिस्तान और चीन तक सीमित नहीं है। असली खतरा अमेरिकी जनता और पूरी दुनिया के लिए ट्रंप की आर्थिक नीतियों से है। Steve Hanke ने साफ चेतावनी दी कि ट्रंप के टैरिफ यानी Import पर लगाए गए टैक्स, दरअसल अमेरिकी उपभोक्ताओं पर एक छिपा हुआ टैक्स हैं। उन्होंने विस्तार से समझाया कि जब भारत या कोई और देश अमेरिका को सामान बेचता है, तो टैक्स उस देश पर नहीं लगता। असली बोझ अमेरिकी Importers और उपभोक्ताओं पर पड़ता है। यानी हर बार जब अमेरिकी नागरिक कोई विदेशी सामान खरीदता है, तो वह ट्रंप की नीतियों का टैक्स अपनी जेब से चुका रहा है।
व्यापार का असली फायदा तभी होता है जब दोनों देशों को राहत मिले। भारत अमेरिका को सस्ता सामान बेचता है, तो वहां की जनता को कम दाम में ज़रूरी चीज़ें मिलती हैं। लेकिन जब उन पर टैरिफ लगाया जाता है, तो वही सामान महंगा हो जाता है। लोग उसे कम खरीदते हैं, व्यापार घटता है और अंततः दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं नुकसान उठाती हैं। Steve Hanke का कहना है कि टैरिफ व्यापार को मारते हैं, उसके फायदे को खत्म कर देते हैं और अर्थव्यवस्था को अंदर से खोखला कर देते हैं।
Steve Hanke ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मौजूदा हालत पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि पिछले ढाई सालों से अमेरिका में मनी सप्लाई यानी मुद्रा की उपलब्धता बहुत कम हो गई है। जब बाजार में पैसा कम होता है तो लोग खर्च करना कम कर देते हैं। Investment घट जाता है, उत्पादन धीमा पड़ जाता है और रोजगार के अवसर कम होने लगते हैं। यह स्थिति किसी भी देश को मंदी की ओर धकेल सकती है। Steve Hanke का मानना है कि अमेरिका इस वक्त ठीक उसी कगार पर खड़ा है।
उन्होंने नेपोलियन का एक मशहूर कथन याद दिलाया—“कभी भी अपने दुश्मन को परेशान मत करो जब वह खुद को नष्ट करने की प्रक्रिया में हो।” Steve Hanke कहते हैं कि आज अमेरिका खुद अपने ही बनाए जाल में फंस रहा है। ट्रंप की नीतियां उसे धीरे-धीरे आत्मविनाश की ओर ले जा रही हैं। और अगर ऐसा हुआ, तो इसका असर सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा। पूरी दुनिया, जिसमें भारत भी शामिल है, इस आर्थिक झटके को महसूस करेगी।
भारत के लिए यह स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण है। एक तरफ चीन है, जो संसाधनों और तकनीक में अमेरिका से आगे है। दूसरी तरफ पाकिस्तान है, जो अमेरिका की भू-राजनीतिक मजबूरियों की वजह से अचानक महत्वपूर्ण बन गया है। और तीसरी तरफ अमेरिका है, जिसका नेता सुबह दोस्ती का हाथ बढ़ाता है और रात में वही हाथ पीछे खींच लेता है। ऐसे में भारत के लिए यह समझना ज़रूरी है कि वह किस पर भरोसा करे और किससे दूरी बनाए।
अगर ट्रंप की नीतियों की वजह से अमेरिका मंदी में जाता है, तो उसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। भारत को न केवल व्यापार में नुकसान होगा, बल्कि foreign investment और कूटनीतिक भरोसे में भी चोट लगेगी। भारत को यह तय करना होगा कि वह अपनी नीतियों को किस तरह मजबूत बनाए, ताकि दुनिया की बड़ी ताकतों के खेल में वह सिर्फ मोहरा बनकर न रह जाए।
भारत के लिए सबसे बड़ा सबक यही है कि उसे अपनी अर्थव्यवस्था और तकनीक पर खुद निर्भर होना होगा। किसी भी देश पर आंख मूंदकर भरोसा करना खतरनाक है, चाहे वह अमेरिका जैसा महाशक्ति क्यों न हो। ट्रंप की नीतियां भारत को यह याद दिला रही हैं कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में, कोई स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता, केवल हित स्थायी होते हैं।
Conclusion
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