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उद्यमी बनने के लिए अमीर होना जरूरी नहीं: Narayana Murthy की Business सीख। 2026

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भाग 1: एक विचार, बड़ा डर और उद्यमिता का सपना

business

उद्यमी बनने के लिए अमीर होना जरूरी नहीं: Narayana Murthy की Business सीख।

एक युवा अपनी नौकरी छोड़कर business शुरू करना चाहता था। उसके पास न बड़ा bank balance था, न powerful connections। उसके पास केवल एक idea था और मन में बैठा एक डर—अगर सब कुछ असफल हो गया तो? Murthy

घरवाले पूछ रहे थे, “पैसा कहां से आएगा?” दोस्त कह रहे थे, “अच्छी नौकरी मत छोड़ो।” लेकिन उसके भीतर एक दूसरा सवाल उठ रहा था—क्या उद्यमी बनने का अधिकार केवल अमीर परिवारों के बच्चों के पास है?

सीमित संसाधनों से वैश्विक पहचान तक का सफर

शायद इसी सवाल का जवाब उस व्यक्ति की जिंदगी में छिपा है, जिसने सीमित resources से शुरुआत की और भारत की एक छोटी software company को दुनिया के सामने भरोसे का नाम बना दिया। Murthy

वह व्यक्ति थे N R Narayana Murthy। उनकी कहानी केवल Infosys की सफलता नहीं है। यह idea, failure, discipline, transparency और उन मुश्किल दिनों की कहानी है, जब भविष्य बिल्कुल साफ दिखाई नहीं देता।

सफलता की चमक के पीछे की अनगिनत रातें

Business की दुनिया अक्सर success की चमक दिखाती है। बड़े offices, ऊंची valuation और famous founders नजर आते हैं। लेकिन उस चमक के पीछे अनगिनत रातें होती हैं, जब company का अस्तित्व ही सवाल बन जाता है।

Narayana Murthy का जन्म 20 अगस्त 1946 को Karnataka में हुआ। उनका पूरा नाम Nagavara Ramarao Narayana Murthy है। वह किसी बड़े industrial empire के उत्तराधिकारी नहीं थे।

उन्होंने engineering की पढ़ाई पूरी की और फिर IIT Kanpur से higher education हासिल की। Technology के प्रति उनकी रुचि उस समय बनी, जब भारत में computers आम लोगों के लिए लगभग अनजानी चीज थे।

Career की शुरुआत में उन्होंने IIM Ahmedabad में काम किया। वहां उन्हें early computer systems पर काम करने का अवसर मिला। यह experience आगे चलकर उनके entrepreneurial vision का महत्वपूर्ण हिस्सा बना।

भाग 2: पहली असफलता, सीख और Infosys की नींव

business model

लेकिन उनकी पहली entrepreneurial कोशिश Infosys नहीं थी। उन्होंने Softronics नाम की company शुरू की थी। Idea था, मेहनत थी, लेकिन market उस service के लिए पूरी तरह तैयार नहीं था। Murthy

करीब डेढ़ वर्ष में Softronics बंद हो गई। यह वह मोड़ था, जहां कोई भी व्यक्ति खुद को असफल मानकर दोबारा risk लेने से डर सकता था।

असफलता को शिक्षा में बदलना

Murthy ने उस failure को अपनी अंतिम पहचान नहीं बनाया। उन्होंने समझा कि अच्छा product होना काफी नहीं है। Market timing, customer need और business model भी उतने ही जरूरी होते हैं।

Softronics बंद होने के बाद वह Patni Computer Systems से जुड़े। वहां उन्होंने international clients, software exports और professional management की working को करीब से समझा।

यही वह समय था, जब global technology market बदल रहा था। बड़ी foreign companies को skilled software professionals की जरूरत थी, और भारत के पास talented engineers की एक नई generation तैयार हो रही थी।

Murthy ने इस opportunity को देखा। लेकिन opportunity देखना और उसके लिए नौकरी छोड़ देना अलग बातें हैं। उनके सामने capital, government rules, technology access और foreign clients का भरोसा जीतने जैसी बड़ी रुकावटें थीं।

₹10,000 की शुरुआती पूंजी और संघर्ष

1981 में उन्होंने छह साथियों के साथ मिलकर Infosys की नींव रखी। इस founding team में Nandan Nilekani, S Gopalakrishnan, S D Shibulal, K Dinesh, N S Raghavan और Ashok Arora शामिल थे।

इस शुरुआत में कोई शानदार campus नहीं था। कोई करोड़ों का funding round नहीं था। केवल कुछ professionals थे, जिन्हें विश्वास था कि India से world-class software services दी जा सकती है।

Infosys की शुरुआत से जुड़ी प्रसिद्ध कहानी में ₹10,000 की initial capital का उल्लेख आता है, जो Sudha Murty ने अपनी savings से उपलब्ध कराई थी। उस समय यह रकम भरोसे की सबसे बड़ी पूंजी थी।

लेकिन पैसा मिल जाना केवल पहला कदम था। 1980 के दशक का भारत आज के startup ecosystem जैसा नहीं था। Computer import करना, foreign exchange लेना और clients तक पहुंचना बेहद कठिन था।

भाग 3: कठिन दौर, प्रोडक्ट-मार्केट फिट और सफलता का ओवरकॉन्फिडेंस

income

आज founder laptop खोलकर दुनिया के किसी customer से video call कर सकता है। उस समय telephone connection पाने तक में लंबा इंतजार हो सकता था और international communication बहुत महंगा था। Murthy

एक computer import करने में महीनों या उससे भी अधिक समय लग सकता था। सरकारी permissions की लंबी प्रक्रिया business की speed को धीमा कर देती थी।

यही संघर्ष Murthy की उस सोच को समझाता है, जिसमें वह business की अनावश्यक रुकावटें कम करने की बात करते रहे। उनका मानना था कि entrepreneurship बढ़ेगी, तो jobs और income भी बढ़ेंगी। Murthy

शुरुआती संघर्ष और अनिश्चितता सहने की क्षमता

लेकिन उन्होंने केवल rules को दोष देकर हार नहीं मानी। Infosys की team ने onsite model अपनाया, जिसमें engineers clients के पास जाकर काम करते और धीरे-धीरे भरोसा बनाते थे। शुरुआती वर्षों में Infosys कोई रातोंरात सफल होने वाली company नहीं थी। Founders को कम resources, delayed payments और सीमित infrastructure के बीच लगातार काम करना पड़ा।

यहीं business का पहला बड़ा lesson सामने आता है। Entrepreneur बनने के लिए अमीर परिवार में जन्म लेना जरूरी नहीं, लेकिन uncertainty को सहने की मानसिक ताकत जरूर चाहिए। Murthy

Capital महत्वपूर्ण है, पर capital अकेले company नहीं बनाता। सही team, customer की समस्या, disciplined execution और मुश्किल समय में टिके रहने की क्षमता business को आगे ले जाती है। Murthy

Murthy के अनुसार startup केवल नया नाम रखकर पुरानी service बेचने का खेल नहीं है। उसमें ऐसा idea या execution होना चाहिए, जो customer को पहले से बेहतर value दे सके। Murthy

हर idea को दुनिया में पहली बार खोजा जाना जरूरी नहीं। Innovation कभी product में होती है, कभी delivery में, कभी price में और कभी customer experience में। Murthy

पिवट (Pivot) करना और अति-आत्मविश्वास से बचना

लेकिन founder अक्सर अपने idea से भावनात्मक रूप से जुड़ जाता है। उसे लगता है कि product में गलती नहीं हो सकती और market ही उसे समझ नहीं रही।

यहीं failure का दूसरा lesson आता है। अगर customers बार-बार product को reject कर रहे हैं, revenue नहीं बन रहा और assumptions गलत साबित हो रही हैं, तो signals को जल्दी पहचानना जरूरी है।

Idea बदलना हमेशा हार नहीं होता। कई बार pivot करना, feature हटाना या गलत market छोड़ना company को बचाने का सबसे समझदार फैसला होता है।

Murthy की अपनी पहली company का बंद होना बताता है कि किसी venture की failure, founder की पूरी क्षमता का फैसला नहीं करती। असफलता एक महंगी education बन सकती है।

लेकिन failure से सीखना तभी संभव है, जब founder excuses से बाहर निकले। उसे साफ देखना होगा कि गलती product में थी, pricing में, timing में या execution में।

दिलचस्प बात यह है कि success से सीखना कई बार failure से भी कठिन होता है। Failure सवाल पूछने पर मजबूर करता है, लेकिन success founder को overconfident बना सकती है। Murthy

भाग 4: संस्था का निर्माण, नेतृत्व और पावर का सही इस्तेमाल

success

कभी-कभी company सही strategy से नहीं, सही timing या अचानक बढ़ी demand से सफल होती है। Founder उस सफलता को अपनी हर पुरानी आदत की जीत समझ सकता है।

यहीं से गलत confidence पैदा होता है। Company सोचती है कि पहले जो किया, वही हमेशा काम करेगा। लेकिन market बदलता रहता है और पुरानी सफलता future की guarantee नहीं होती।

इसलिए अच्छे leader को success के बाद भी analysis करना चाहिए। कौन-सा फैसला सच में काम आया, कौन-सी गलती luck ने छिपा दी और कौन-सा risk आगे नुकसान पहुंचा सकता है?

संस्थापक से लंबी उम्र वाली संस्था बनाना

Infosys की growth में professional management की बड़ी भूमिका रही। Company को केवल founders के control में चलने वाले पारिवारिक business की तरह नहीं, बल्कि institution की तरह विकसित किया गया।

Murthy का एक महत्वपूर्ण lesson है कि company की उम्र उसके founder की मौजूदगी से लंबी होनी चाहिए। इसके लिए organization के भीतर नए leaders तैयार करना जरूरी है।

अगर हर छोटा फैसला केवल एक व्यक्ति लेता है, तो company बड़ी दिखाई दे सकती है, लेकिन भीतर से कमजोर होती है। Leader हटते ही पूरी decision-making रुक सकती है।

अच्छा founder अपने आसपास केवल आदेश मानने वाले लोग नहीं रखता। वह ऐसे professionals तैयार करता है, जो उससे असहमति जता सकें और जिम्मेदारी लेकर सही निर्णय कर सकें।

Infosys में leadership transition इसी institutional thinking का हिस्सा बना। Murthy के बाद Nandan Nilekani ने CEO की जिम्मेदारी संभाली और आगे दूसरे professional leaders ने company चलाई।

पद नहीं, काम से पैदा होती है इज्जत

Leadership का अर्थ chair पर हमेशा बैठे रहना नहीं है। असली leadership तब दिखाई देती है, जब organization आपके बिना भी अपने values और systems के साथ आगे बढ़ सके।

Murthy ने यह भी बताया कि केवल designation किसी व्यक्ति को star नहीं बनाता। बड़ा title visiting card पर लिखा जा सकता है, लेकिन respect काम से पैदा होती है। Murthy

एक manager तभी valuable है, जब उसकी मौजूदगी से team बेहतर काम करे, customers अधिक संतुष्ट हों और company की long-term value बढ़े।

कई organizations में लोग position को performance समझ लेते हैं। Cabin, authority और reporting team मिलने के बाद उन्हें लगता है कि leadership साबित हो गई।

लेकिन power character की परीक्षा लेती है। Performance से recognition मिलता है, recognition से respect और respect के साथ influence बढ़ता है। इसके बाद विनम्र बने रहना अधिक कठिन हो जाता है।

भाग 5: पारदर्शिता, कठिन समय में चरित्र और नैतिकता

professional standards

Murthy की management philosophy में humility का विशेष महत्व रहा। उनके अनुसार power मिलने के बाद शालीनता बनाए रखने वाला leader organization की गरिमा बढ़ाता है। कर्मचारी ऐसे leader के लिए अधिक ईमानदारी से काम करते हैं, जो उनकी बात सुनता है। केवल डर से चलने वाली team problems छिपाती है, जबकि trust वाली team problems जल्दी बताती है।

Business में transparency केवल अच्छी image बनाने का शब्द नहीं है। इसका अर्थ है कि investors, employees और customers को महत्वपूर्ण जानकारी सही समय पर साफ तरीके से मिले।

Infosys ने corporate governance, financial disclosure और professional standards पर जोर देकर global clients तथा investors के बीच credibility बनाने की कोशिश की।

1993 में Infosys Indian stock exchanges पर listed हुई। बाद में 1999 में वह NASDAQ पर list होने वाली शुरुआती भारतीय companies में शामिल बनी। यह Indian IT sector के लिए प्रतीकात्मक उपलब्धि थी।

International listing के साथ reporting और compliance की जिम्मेदारियां भी बढ़ीं। Company को global investors के सामने अपने numbers, risks और decisions अधिक स्पष्ट रूप से रखने पड़े।

कठिन समय में पारदर्शिता और संसाधनों का सही प्रबंधन

यहां से एक बड़ा entrepreneurial lesson निकलता है। Trust advertisement से जल्दी नहीं बनता। वह वर्षों तक promises निभाने और uncomfortable truth भी बताने से बनता है।

बुरा समय transparency की असली परीक्षा लेता है। अच्छे दिनों में हर founder confident दिखाई देता है, लेकिन revenue गिरने पर कई companies problems छिपाने लगती हैं।

Murthy की सीख थी कि business में अच्छे और बुरे दोनों दिन आते हैं। कठिन समय company को खर्चों पर control और priorities को दोबारा समझना सिखाता है।

जब market तेजी से बढ़ता है, तो unnecessary expenses भी growth का हिस्सा दिखाई देने लगते हैं। लेकिन slowdown आते ही पता चलता है कि कौन-सा खर्च जरूरी था और कौन-सा केवल दिखावा।

मुश्किल समय customer satisfaction की अहमियत भी समझाता है। नया customer लाना कठिन हो जाए, तो existing customers का भरोसा company की सबसे बड़ी protection बन जाता है।

इसी तरह employees को केवल cost समझना खतरनाक है। संकट में वही team company को बचाती है, जिसने product, customer और systems की knowledge वर्षों में बनाई होती है। Murthy

इसका अर्थ यह नहीं कि हर खर्च बनाए रखा जाए। इसका अर्थ है कि cost reduction panic में नहीं, data और long-term impact को देखकर किया जाए।

एथिक्स (Ethics) कोई लग्जरी नहीं, नींव है

कठिन समय company का character बनाता है। वह दिखाता है कि leadership केवल profit के दिनों में values की बात करती थी या loss के दिनों में भी उनका पालन करती है।

Murthy की सोच में values और business अलग-अलग चीजें नहीं थीं। उनका मानना था कि organization का future उसके leaders और employees के नैतिक standards पर निर्भर करता है। Murthy

अगर revenue पाने के लिए company गलत promise करती है, numbers छिपाती है या customer को confuse करती है, तो short-term sale मिल सकती है, लेकिन long-term trust कमजोर होता है।

युवा entrepreneurs के लिए इसका अर्थ है कि ethics कोई luxury नहीं है, जिसे company profitable होने के बाद अपनाया जाए। Values शुरुआत से systems में डालनी पड़ती हैं।

भाग 6: संतुलित दृष्टिकोण, जमीनी सच्चाई और अंतिम निष्कर्ष

employee treatment

Invoice से लेकर hiring, taxation, customer data और employee treatment तक, हर छोटा decision company की culture लिखता है। बाद में posters लगाकर उस culture को आसानी से नहीं बदला जा सकता।

Narayana Murthy को Padma Shri और Padma Vibhushan जैसे राष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया गया। International platforms ने भी entrepreneurship और corporate leadership में उनके योगदान को पहचाना।

लेकिन उनकी हर राय निर्विवाद नहीं रही। लंबे working hours और work-life balance पर उनके विचारों ने हाल के वर्षों में बड़ी बहस पैदा की है।

कई लोगों का मानना है कि hard work जरूरी है, लेकिन केवल अधिक घंटे productivity की guarantee नहीं होते। Burnout, health और fair compensation को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

अंधानुकरण से बचना और जमीनी सच्चाइयों को स्वीकारना

यहीं एक mature entrepreneur को व्यक्ति और विचार के बीच फर्क समझना चाहिए। किसी सफल business leader से सीखने का अर्थ उसकी हर राय को बिना सवाल स्वीकार करना नहीं होता।

Murthy की journey से discipline और hard work सीखा जा सकता है, लेकिन आज के founder को sustainable work culture, employee well-being और output quality का balance भी बनाना होगा।

Entrepreneurship hero बनने की कहानी नहीं है। यह problems solve करने, लोगों को jobs देने और customer से मिली जिम्मेदारी निभाने की प्रक्रिया है।

आपके पास बड़ा surname न हो, तब भी शुरुआत संभव है। लेकिन केवल motivation से business नहीं चलता। Market research, cash flow और customer payment की reality समझनी पड़ती है। आपका idea शानदार हो सकता है, फिर भी customer उसके लिए payment न करे। इसलिए product बनाने से पहले यह जानना जरूरी है कि असली problem क्या है और वह कितनी urgent है।

आपकी team intelligent हो सकती है, लेकिन values अलग हों, तो partnership टूट सकती है। इसलिए co-founder चुनते समय skill के साथ honesty और working style भी देखना चाहिए।

Funding मिल सकती है, लेकिन profit का रास्ता न हो, तो company हमेशा बाहरी पैसे पर नहीं चल सकती। Growth और financial discipline को साथ लेकर चलना पड़ता है।

Success मिल जाए, तो questions पूछना बंद मत कीजिए। Failure आए, तो खुद को समाप्त मत मानिए। दोनों परिस्थितियों में facts को ego से ऊपर रखना founder की ताकत है।

और जब power बढ़े, तो humility को कम मत होने दीजिए। क्योंकि employees आपकी speeches नहीं, आपके daily decisions देखकर तय करते हैं कि company के values असली हैं या केवल लिखे हुए शब्द।

क्या डर के कारण आप कोशिश भी नहीं करेंगे?

Narayana Murthy की कहानी हमें यह नहीं बताती कि हर छोटा startup अगला Infosys बन जाएगा। वह बताती है कि सीमित शुरुआत भी बड़ी बन सकती है, अगर foundation मजबूत हो।

एक idea से company बन सकती है, लेकिन institution बनाने के लिए leaders, systems, transparency और patience चाहिए। यही फर्क कुछ वर्षों के venture और कई दशकों की organization में होता है।

उस युवा का डर आज भी वही है—अगर business असफल हो गया तो? लेकिन शायद सही सवाल यह है—अगर डर के कारण उसने अपनी तैयारी के बावजूद कभी कोशिश ही नहीं की, तो?

उद्यमी बनने के लिए अमीर का बेटा होना जरूरी नहीं। जरूरी है problem को पहचानना, failure से सीखना, सही लोगों को साथ लेना और बुरे दिनों में अपना character बनाए रखना।

क्योंकि business की असली पहचान अच्छे दिनों के profit से नहीं होती। वह उन कठिन दिनों में बनती है, जब पैसे कम हों, रास्ता धुंधला हो और फिर भी फैसले ईमानदारी से लेने हों।

एक साधारण परिवार का युवा बड़ा सपना देखता था, लेकिन डर भी था—क्या बिना अमीर पिता, बड़े नेटवर्क और भारी पूंजी के कोई सफल उद्यमी बन सकता है? यही सवाल नारायण मूर्ति की कहानी को खास बनाता है।

1981 में उन्होंने छह साथियों के साथ Infosys की शुरुआत की। उनका विश्वास था कि Startup सिर्फ नया Idea नहीं, बल्कि सही Team, ईमानदार सोच और लगातार सीखने की क्षमता से आगे बढ़ता है।

मूर्ति कहते हैं, पद नहीं, आपका काम आपको Star बनाता है। असफलता के संकेत जल्दी पहचानना और जरूरत पड़ने पर अपने पसंदीदा Idea को छोड़ देना भी Leadership की असली परीक्षा है।

उनके अनुसार सफलता कभी-कभी गलतियों को छिपा देती है, जबकि बुरा समय खर्चों पर नियंत्रण, ग्राहकों का भरोसा, कर्मचारियों की संतुष्टि और पारदर्शिता सिखाता है।

लेकिन क्या अच्छे और बुरे दिनों में लिया गया एक फैसला कंपनी का पूरा Character बदल सकता है? पूरी सच्चाई जानने के लिए discription में दिए लिंक पर क्लिक कर अभी पूरी वीडियो देखें।!

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