आपको बता दें कि बहुत सारी कहानियाँ अमीरी से शुरू होकर अमीरी पर ही खत्म हो जाती हैं, लेकिन कुछ कहानियाँ ऐसी होती हैं जो मुश्किलों से शुरू होती हैं, टूटे हुए सपनों से गुजरती हैं, और फिर ऐसा मुकाम बनाती हैं कि दुनिया हैरानी से देखती रह जाती है। Irfan Razack की कहानी भी ऐसी ही है। सोचिए… एक पुराना पुस्तैनी घर, दीवारों पर बचपन की हंसी, आँगन में बीते वक्त की महक, वो कमरा जहाँ परिवार साथ बैठता था… लेकिन एक दिन हालात इतने कठोर हो जाते हैं कि उसी घर को बेचना पड़ता है।
घर बेचना सिर्फ एक property transaction नहीं होता, वो दिल का एक हिस्सा बेचने जैसा होता है। उस वक्त Irfan के दिल में सिर्फ दो चीज़ें थीं—दर्द… और एक सपना। दर्द इस बात का कि जड़ें कट रही थीं, और सपना इस बात का कि अगर जीवन में कुछ बड़ा करना है, तो risk लेना ही पड़ेगा। यही वो पल था जिसने उनकी जिंदगी की कहानी बदल दी।
1956 के Bangalore के बारे में सोचिए, जब ये शहर आज की तरह glass towers और neon lights से नहीं चमकता था। तब ये शांत, सरल और साधारण शहर था। यहीं से शुरू हुई Razack family की पहली बिजनेस journey। उनके पिता Sattar Razack ने एक छोटी सी men’s clothing shop शुरू की। दुकान छोटी थी, resources सीमित थे, लेकिन जज़्बा बहुत बड़ा था।
Irfan बचपन से दुकान पर बैठते थे, ग्राहकों को आते जाते देखते थे, सीखते थे कि business सिर्फ product से नहीं चलता… trust से चलता है। कॉलेज खत्म हुआ, जिम्मेदारी आई और Irfan अपने दोनों भाइयों के साथ family business में उतर गए। लेकिन उनके अंदर कहीं न कहीं एक बेचैनी थी—क्या जिंदगी सिर्फ कपड़े बेचने तक सीमित है? या ये journey किसी बहुत बड़ी मंज़िल के लिए बनी है?
फिर आया 1980 का दशक। India बदल रहा था, शहर फैल रहे थे, aspirations बढ़ रही थीं और real estate quietly power बन रहा था। Irfan ने फैसला किया कि अब ordinary नहीं, extraordinary बनने का समय है। उन्होंने वो कदम उठाया जिसकी कल्पना भी बहुत लोग नहीं करते—उन्होंने परिवार का पुश्तैनी घर बेच दिया। लोग चौंक गए, कुछ हंसे, कुछ बोले “पागल हो गया है”, कुछ बोले “ये गलत फैसला है”, लेकिन Irfan के अंदर की आवाज़ साफ थी—अगर आज risk नहीं लिया, तो जिंदगी भर regrets रह जाएंगे। घर बिक गया, नींव हिल गई, लेकिन foundation वहीं से मजबूत होनी शुरू हो गई।
यहीं से Irfan ने real estate की दुनिया में कदम रखा। शुरुआत छोटी थी, बस जमीन खरीदना और बेचना। वो market को observe करते, लोगों की जरूरतें समझते, जमीन की कीमत नहीं, उसकी future potential देखते। फिर उन्होंने अपने ससुर के साथ एक commercial project किया। वही project उनकी जिंदगी का turning point बन गया। वही जगह थी, जहां से एक छोटे व्यवसायी के भीतर छुपा visionary जाग गया।
फिर आया साल 1986। सिर्फ 40,000 की capital। तीन भाई। एक पिता का आशीर्वाद। और दिल में आग कि कुछ ऐसा करना है, जो इतिहास में लिखा जाए। इसी vision से जन्म हुआ Prestige Estates and Constructions का। पहला project था बस 10000 square feet का एक office building। कोई media highlight नहीं, कोई glamour नहीं, कोई dramatic launch नहीं। सिर्फ मेहनत, honesty और commitment। यह project successful हुआ और फिर लोगों ने Prestige नाम को पहचाना। Slowly, Bangalore के skyline में Prestige का नाम चमकने लगा।
इसी बीच Bangalore भी बदल रहा था। यह सिर्फ शहर नहीं रह गया था, ये India की I T capital बन रहा था। Infosys, Wipro, tech giants, multinational offices… सब Bangalore में अपनी जगह बना रहे थे। और जैसे जैसे Bangalore बढ़ रहा था, Prestige Group भी उसी speed से उभर रहा था।
Prestige ने सिर्फ इमारतें नहीं बनाईं, उन्होंने lifestyle बनाया। उन्होंने dreams को shapes दी। residential projects, commercial towers, luxury homes, corporate spaces… और फिर आया वो प्रोजेक्ट जिसने सब बदल दिया—Kingfisher Towers। इस प्रोजेक्ट ने Prestige को सिर्फ South India नहीं, पूरे देश में एक अलग league में खड़ा कर दिया। लोग अब Prestige को सिर्फ builder नहीं, brand के रूप में देखने लगे।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। असली test अभी बाकी था। South India जीतने के बाद Irfan के सामने सवाल था—क्या अब Mumbai को challenge किया जाए? Mumbai, जहां हर इंच जमीन की कीमत आसमान छूती है। Mumbai, जहां business ruthless competition की dictionary से लिखा जाता है। जहां पहले से giants बैठे थे—Lodha, Oberoi, Godrej। लोग कहने लगे, “Bangalore का builder Mumbai में क्या करेगा?” “यहां सर्वाइव करना आसान नहीं।” लेकिन Irfan उन लोगों में नहीं थे जो डर जाएं। उन्होंने सोचा—अगर असली champion बनना है, तो toughest battlefield पर उतरना पड़ेगा। और उन्होंने वही किया।
करीब पांच साल पहले Prestige ने Mumbai में entry ली। लोग skeptical थे, market stiff था, projects risky थे। लेकिन Irfan Razack gamble नहीं खेलते, वो calculated strategy बनाते हैं। उन्होंने शहर को समझा, जरूरत को पहचाना, सही location चुने और projects launch किए।
आज Mumbai में Prestige के 11 बड़े प्रोजेक्ट्स हैं। South Mumbai से लेकर suburban areas तक Prestige की पहचान फैल चुकी है। इनके पास 3.2 करोड़ square feet का development pipeline है। Imagine कीजिए, एक आदमी जिसने कभी survival के लिए घर बेचा था, आज वही लाखों लोगों के घर बना रहा है। वही millions square feet dreams का architect बना हुआ है।
और फिर आता है वो हिस्सा, जो इस कहानी को और मजबूत बनाता है। आज Forbes के अनुसार Irfan Razack और उनके brothers की कुल संपत्ति 6 billion dollars यानी करीब 54000 करोड़ रुपए आंकी जाती है। लेकिन असली greatness उनके पैसे से नहीं, उनके काम के ethics से झलकती है।
आज 70 साल की उम्र में भी Irfan सिर्फ A C office में बैठकर orders नहीं देते। वो आज भी हफ्ते में दो दिन personally construction sites पर जाते हैं। workers से बात करते हैं, ground reality समझते हैं, हर detail पर खुद नजर रखते हैं। वो कहते हैं—इस business में ground पर उतरना पड़ता है, सिर्फ cabin में बैठकर empire नहीं बनते। यही difference है leader और boss में। Irfan leader हैं।
Prestige का logo यानी उड़ता हुआ बाज भी उनके vision का reflection है। बाज दूर तक देखता है, fast react करता है, ऊंचा उड़ता है और कभी पीछे नहीं हटता। यही philosophy Prestige के हर project में दिखती है। शायद इसी वजह से उनके headquarters का नाम भी Prestige Falcon Towers रखा गया। ये सिर्फ इमारत नहीं, सोच का प्रतीक है।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल—इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है? सीख ये कि जिंदगी में biggest decisions comfort zone में बैठकर नहीं लिए जाते। कभी कभी सबसे बड़ी उड़ान के लिए सबसे बड़ा त्याग करना पड़ता है। सीख ये कि background छोटा हो सकता है, लेकिन सोच कभी छोटी नहीं होनी चाहिए। सीख ये कि दुनिया शुरू में आपका मजाक उड़ाएगी, doubt करेगी, criticize करेगी, लेकिन consistency हर आवाज़ को silence कर देती है। सीख ये कि business का दिल सिर्फ पैसा नहीं, trust है। लोग property नहीं, भरोसा खरीदते हैं।
एक वक्त था जब Irfan के पास अपना घर नहीं था। आज उनके projects की वजह से लाखों लोग dream homes में रहते हैं। एक वक्त था जब उनके पास बस 40000 थे। आज उनका नाम दुनिया के top real estate leaders में लिया जाता है। एक वक्त था जब लोग उन्हें underestimate करते थे, आज वही दुनिया उन्हें salute करती है। यह सिर्फ success story नहीं, यह inspiration है। Irfan Razack की कहानी हमें सिखाती है कि हालात कभी इंसान को तोड़ते नहीं, shape करते हैं। अगर इंसान में faith, hard work और courage है, तो कोई भी मेहनत बेकार नहीं जाती। जिंदगी उन्हीं की होती है जो risk लेने की हिम्मत रखते हैं।
Conclusion
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