क्या आपने कभी सोचा है कि सिर्फ एक समझौता करोड़ों लोगों की जिंदगी बदल सकता है? एक ऐसी डील, जो किसानों से लेकर इंजीनियरों तक, मछुआरों से लेकर सॉफ्टवेयर एक्सपर्ट्स तक, और छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े उद्योगपतियों तक सभी के लिए नए अवसरों के दरवाज़े खोल दे? यही हुआ है भारत और ब्रिटेन के बीच जब Free Trade Agreement यानी FTA पर आख़िरकार हस्ताक्षर हुए। तीन साल तक चली बातचीत, सैकड़ों घंटे की कूटनीति और दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं की भविष्य की दिशा तय करता यह समझौता अब लागू हो चुका है। लेकिन सवाल यह है कि इसका असली फायदा किसे मिलेगा? और क्या इसके कुछ खतरे भी हैं? आज हम इसी विषय पर गहराई में चर्चा करेंगे।
यह डील प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ब्रिटेन यात्रा के दौरान साकार हुई, जहां उन्होंने ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीयर स्टारमर से मुलाकात की। यह कोई मामूली व्यापार समझौता नहीं है, बल्कि इसे CETA—Comprehensive Economic and Trade Agreement कहा गया है। इसका अर्थ है कि यह सिर्फ व्यापार ही नहीं, बल्कि इनोवेशन, टेक्नोलॉजी, सेवाओं और मानवीय सहयोग का भी एक पुल बनेगा। इस समझौते के लागू होने के बाद हर साल भारत और ब्रिटेन के बीच करीब 34 अरब डॉलर का अतिरिक्त व्यापार होने की उम्मीद है।
इस समझौते का सबसे बड़ा फायदा भारत के कृषि सेक्टर को मिलेगा। अब भारत से यूके में फल, सब्जियां, हल्दी, काली मिर्च, इलायची, दालें, मैंगो पल्प और अचार जैसे तैयार खाद्य उत्पाद बिना किसी टैक्स के जा सकेंगे। 95% से ज्यादा कृषि और प्रोसेस्ड फूड पर अब 0% ड्यूटी लगेगी। इसका सीधा असर किसानों की आमदनी पर पड़ेगा और आने वाले 3 सालों में भारत का Agricultural exports 20% तक बढ़ सकता है।
2030 तक भारत का एग्रीकल्चर एक्सपोर्ट 100 अरब डॉलर तक पहुँचने की उम्मीद जताई गई है। कटहल, बाजरा, ऑर्गेनिक हर्ब्स जैसी फसलें जो अब तक सीमित मार्केट में बिकती थीं, वे भी यूके के सुपरमार्केट में अपनी जगह बना सकेंगी। इसके अलावा आंध्र प्रदेश, ओडिशा, केरल और तमिलनाडु जैसे समुद्री राज्यों में मछुआरों को भी मरीन उत्पादों की ड्यूटी हटने से बड़ी राहत मिलेगी। हालांकि भारत ने डेयरी, सेब, ओट्स और तेलों पर कोई रियायत नहीं दी है, ताकि देश के घरेलू उत्पादकों को नुकसान न हो।
मरीन प्रोडक्ट्स की बात करें तो भारत के झींगे, टूना मछली, फिशमील आदि पर लगने वाली 4.2% से 8.5% ड्यूटी अब समाप्त हो गई है। इससे न सिर्फ मछुआरों को बेहतर कीमत मिलेगी, बल्कि भारत की हिस्सेदारी यूके के 5.4 अरब डॉलर के मरीन बाजार में तेजी से बढ़ेगी। वर्तमान में भारत की हिस्सेदारी सिर्फ 2.25% है, लेकिन अब इसमें ज़बरदस्त बढ़ोतरी की उम्मीद की जा रही है।
भारत के पारंपरिक उत्पाद जैसे चाय, कॉफी और मसालों को भी इस समझौते से बहुत बड़ा लाभ मिलेगा। यूके पहले ही भारत की चाय (5.6%), कॉफी (1.7%) और मसालों (2.9%) का बड़ा खरीदार है। अब इन प्रोडक्ट्स को ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलने से इनका Export और बढ़ेगा। खासतौर पर इंस्टेंट कॉफी के लिए भारत एक मजबूत खिलाड़ी बनकर उभरेगा और यूरोप के बड़े सप्लायर्स को टक्कर देगा।
तेल बीजों का Export अब पहले से आसान होगा क्योंकि टैक्स कम कर दिया गया है और प्रक्रियाएं सरल कर दी गई हैं। इसका फायदा किसानों के साथ-साथ एक्सपोर्ट कंपनियों को भी मिलेगा। टेक्सटाइल सेक्टर में 0% ड्यूटी के साथ 1,143 प्रोडक्ट कैटेगरी पर Export का मौका मिला है। रेडीमेड गारमेंट्स, होम टेक्सटाइल, कालीन और हस्तशिल्प को सीधा फायदा होगा।
अब बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे देशों के साथ भारत बराबरी पर आ गया है। अगले 1 से 2 साल में भारत की हिस्सेदारी यूके के गारमेंट सेक्टर में 5% तक पहुंच सकती है। यह उन लाखों लोगों के लिए खुशखबरी है जो भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों में सिलाई, कढ़ाई, बुनाई और डिजाइनिंग जैसे कामों में लगे हैं।
इंजीनियरिंग सामान जैसे इलेक्ट्रिक मशीनरी, ऑटो पार्ट्स और इंडस्ट्रियल मशीनरी पर पहले 18% तक ड्यूटी लगती थी, जो अब समाप्त हो चुकी है। इससे अगले 5 सालों में भारत का इंजीनियरिंग Export दोगुना होकर 7.5 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। यह भारत के मेक इन इंडिया मिशन को गति देने वाला एक बड़ा कदम है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सॉफ्टवेयर सेक्टर में भी नए मौके खुले हैं। स्मार्टफोन, ऑप्टिकल फाइबर, इन्वर्टर जैसे प्रोडक्ट्स अब ड्यूटी-फ्री एक्सेस पा सकेंगे। सॉफ्टवेयर और आईटी सेवाओं में हर साल 15 से 20% की ग्रोथ की उम्मीद है। खासकर छोटे और मिड-साइज टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स के लिए ये डील नई संभावनाओं के द्वार खोलेगी।
भारत की जेनरिक दवाइयों को भी इस समझौते से बड़ी राहत मिली है। अब ये दवाइयां यूके में और सस्ती हो गई हैं, जिससे इनका Export तेज़ी से बढ़ेगा। सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट्स, एक्स-रे मशीन, ECG मशीन जैसे मेडिकल डिवाइसेज़ पर भी अब कोई ड्यूटी नहीं लगेगी। यह कदम भारत के हेल्थकेयर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को दुनिया भर में नई पहचान देगा।
केमिकल और प्लास्टिक सेक्टर में भी बूम आने वाला है। केमिकल्स का Export 30 से 40% बढ़ सकता है, जबकि प्लास्टिक उत्पाद जैसे पाइप, पैकेजिंग मटेरियल, किचनवेयर आदि पर टैक्स खत्म हो चुका है। यह प्लास्टिक उद्योग में काम कर रहे लाखों लोगों के लिए एक नई सुबह जैसा है।
स्पोर्ट्स गुड्स और खिलौनों पर भी टैक्स हटा दिया गया है। भारत के फुटबॉल, क्रिकेट का सामान, रग्बी बॉल और टॉय इंडस्ट्री को अब चीन और वियतनाम पर बढ़त मिलेगी। आगरा, मेरठ जैसे स्पोर्ट्स मैन्युफैक्चरिंग हब को इसका सीधा फायदा होगा।
जेम्स और ज्वेलरी का Export अभी यूके को 941 मिलियन डॉलर का होता है, जो अगले 2 से 3 साल में दोगुना हो सकता है। भारत के लिए यह हाई वैल्यू एक्सपोर्ट सेगमेंट है, जिसमें अब ग्लोबल ब्रांड्स के साथ प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिलेगा।
लेदर और फुटवियर पर लगने वाली 16% ड्यूटी खत्म हो गई है। भारत के जूते और चमड़े के उत्पाद अब यूके में पहले से सस्ते मिलेंगे, जिससे आगरा, कानपुर, कोल्हापुर, चेन्नई जैसे हब को बड़ा फायदा मिलेगा।
FTA का असर सर्विस सेक्टर में भी दिखेगा। अब भारतीय प्रोफेशनल्स जैसे प्रोजेक्ट मैनेजमेंट एक्सपर्ट्स, योगा ट्रेनर, शेफ, म्यूज़ीशियन और कई अन्य क्षेत्रों के लोग यूके में आसानी से काम कर सकेंगे। 35 सेक्टर्स में भारतीय प्रोफेशनल्स बिना किसी ऑफिस के यूके में 2 साल तक काम कर सकते हैं।
इससे हर साल 60,000 से ज़्यादा आईटी पेशेवरों को फायदा मिलेगा। भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम, रिसर्च लैब्स, और इनोवेशन कंपनियां ब्रिटेन की टेक्नोलॉजी से सीधे जुड़ सकेंगी, जिससे दोनों देशों के बीच तकनीकी और व्यावसायिक गठजोड़ मजबूत होगा।
दूसरी तरफ, भारत में ब्रिटेन से आने वाले कई प्रोडक्ट अब सस्ते हो जाएंगे। भारत ने ब्रिटेन से Import होने वाले 90% प्रोडक्ट्स पर टैक्स कम करने का फैसला किया है। इसका सीधा फायदा भारतीय ग्राहकों को मिलेगा।
ब्रिटिश स्कॉच व्हिस्की पर अब 150% इम्पोर्ट ड्यूटी नहीं लगेगी, बल्कि इसे घटाकर पहले 75% और अगले 10 साल में 40% तक लाया जाएगा। इलेक्ट्रिक व्हीकल्स पर लगने वाला टैक्स 110% से घटकर सिर्फ 10% रह जाएगा—हालांकि यह एक तय कोटा के भीतर होगा।
कॉस्मेटिक्स, चॉकलेट, बिस्किट, लैम्ब मीट, सैल्मन मछली, सॉफ्ट ड्रिंक्स और मेडिकल डिवाइसेज जैसी वस्तुएं भी अब भारतीय बाजार में पहले से सस्ती मिलेंगी। कुल मिलाकर ब्रिटिश प्रोडक्ट्स पर औसतन लगने वाला टैक्स 15% से घटकर 3% रह जाएगा।
इस समझौते से भारत और ब्रिटेन के बीच सिर्फ व्यापार नहीं बढ़ेगा, बल्कि भरोसा भी बढ़ेगा। यह डील हमें बताती है कि जब दो देश पारस्परिक सम्मान और दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ साझेदारी करते हैं, तो उसमें दोनों की जीत होती है। यह सिर्फ एक व्यापार समझौता नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है—एक ऐसे भारत की, जो आत्मनिर्भर है, लेकिन वैश्विक बाजार में पूरी ताकत से मौजूद भी।
Conclusion
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