एक महिला, जिसने कभी अपनी पहली कमाई के रूप में सिर्फ 150 रुपये घर लाए थे… वही आज लाखों लोगों की प्रेरणा बन चुकी है। वो महिला आज लाखों में कमाती हैं, उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं, और उनके बनाए डिज़ाइन पहनकर महिलाएं खुद को गर्व से देखती हैं। पर सवाल यह है कि क्या ये सब रातोंरात हुआ? बिल्कुल नहीं। ये कहानी है संघर्ष, हुनर और जिद की—ऐसी जिद, जो कहती है कि मैं कुछ कर दिखाऊंगी। और यह कहानी है Ritu Insan की—हरियाणा की उस साधारण महिला की, जिसने सिलाई की सुई से अपनी किस्मत बुन डाली। आज हम इसी विषय पर गहराई में चर्चा करेंगे।
हरियाणा के रोहतक ज़िले के एक छोटे से गांव भैनी सुरजन में जन्मी Ritu का बचपन बहुत ही साधारण था। परिवार बड़ा था, आमदनी छोटी। घर में हर चीज़ को नाप-तोलकर खर्च किया जाता था। लेकिन उनके पिता एक सपना देखते थे—बेटियों को पढ़ाना है, उन्हें सक्षम बनाना है। Ritu ने भी पढ़ाई की शुरुआत की अपने गांव के ही एक प्राइवेट स्कूल से। पांचवीं के बाद एक साल के लिए नानी के घर चली गईं, और वहीं से उनकी जिंदगी ने पहला मोड़ लिया—जहां उन्होंने सिलाई मशीन को हाथ में पकड़ा।
नानी के घर रहते हुए उन्होंने देखा कि महिलाएं घर बैठे छोटे-छोटे काम करके कुछ पैसे कमा लेती हैं। वहां Ritu ने पहली बार देखा कि एक सुई और धागे से भी आत्मनिर्भरता की शुरुआत हो सकती है। यह सीख उनके दिल में बस गई। जब वो दसवीं कक्षा तक पहुंचीं, तो उन्होंने खुद गांव की महिलाओं के लिए सूट सिलना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे उनका काम भी चल निकला और घर की आर्थिक स्थिति में थोड़ा योगदान होने लगा।
लेकिन कहानी यहां खत्म नहीं होती। दसवीं के बाद Ritu की शादी हो गई। वह एक नई दुनिया में आईं। उम्मीद थी कि पढ़ाई जारी रहेगी, लेकिन हालात ने रास्ता मोड़ दिया। दहेज में बहुत कुछ नहीं दिया गया, लेकिन Ritu ने एक खास मांग रखी—“मुझे सिर्फ एक सिलाई मशीन चाहिए।” उन्होंने अपने माता-पिता से कहा कि उन्हें कोई गहना नहीं चाहिए, कोई सामान नहीं चाहिए, सिर्फ एक साधन चाहिए जिससे वो खुद कुछ कर सकें।
सिलाई मशीन मिल गई। और इसी मशीन के साथ उन्होंने अपने नए घर में सिलाई का काम शुरू किया। शुरू में कुछ ही ग्राहक थे—पड़ोस की महिलाएं, रिश्तेदार, गांव की जान-पहचान। लेकिन धीरे-धीरे उनकी डिज़ाइनिंग की तारीफ फैलने लगी। जो भी उनके हाथ से सिलवाता, वह कहता—”Ritu, तुम तो बहुत टैलेंटेड हो।” यहीं से नाम पड़ा—Talented Ritu Insan।
Ritu का सपना सिर्फ पैसे कमाना नहीं था, वो चाहती थीं कि उनके जैसी और भी महिलाएं इस हुनर से आत्मनिर्भर बनें। यही सोच थी जिसने उन्हें सिखाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अपने घर के एक कमरे में लड़कियों को सिखाना शुरू किया। कोई स्कूल नहीं, कोई डिग्री नहीं, सिर्फ अनुभव और दिल से सिखाई जाने वाली सिलाई। शुरुआती दिनों में कई लड़कियों के परिवार वाले मना करते थे, लेकिन जब वे Ritu से मिलते, तो उनकी नीयत, मेहनत और सम्मान देखकर मान जाते।
कई साल तक Ritu ने सिर्फ मेहनत की। कोई सोशल मीडिया नहीं, कोई प्रचार नहीं, सिर्फ एक-एक ग्राहक जोड़कर, एक-एक स्टूडेंट को सिखाकर वो आगे बढ़ती रहीं। फिर आया साल 2019—जब यूट्यूब ने उनके जीवन की रफ्तार बदल दी। Ritu ने सोचा कि क्यों ना अपने सिखाने के तरीके को वीडियो के जरिए लाखों लोगों तक पहुंचाया जाए। उन्हें तकनीक ज्यादा नहीं आती थी, लेकिन फिर भी उन्होंने कैमरे के सामने खड़े होकर सिखाना शुरू किया।
पहला वीडियो अपलोड किया—थोड़ा डरते हुए, थोड़ा झिझकते हुए। लेकिन वीडियो को अच्छा रिस्पॉन्स मिला। लोग उनके सिंपल और देसी अंदाज़ में सिखाने के तरीके को पसंद करने लगे। देखते ही देखते सब्सक्राइबर बढ़ने लगे, कमेंट्स में महिलाएं लिखने लगीं—”दीदी, आपने मेरी जिंदगी बदल दी।” Ritu ने भी ठान लिया कि अब पीछे नहीं देखना।
यूट्यूब से उनकी पहली कमाई थी—8000 रुपये। उन्होंने ये पैसे अपनी मां और सास को दिए। एक तरफ से यह सिर्फ एक आर्थिक शुरुआत थी, लेकिन भावनात्मक रूप से ये उस सफर की पहली मंज़िल थी जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी। आज उनके यूट्यूब चैनल @talented ritu insan पर 2.14 मिलियन से ज्यादा सब्सक्राइबर हैं। हर वीडियो में वो न सिर्फ डिजाइनिंग सिखाती हैं बल्कि आत्मविश्वास भी देती हैं।
Ritu की सफलता सिर्फ डिजिटल तक सीमित नहीं रही। जैसे-जैसे लोगों ने उन्हें जाना, वैसे-वैसे उनके काम को देशभर से सराहना मिलने लगी। उन्होंने हरियाणा के कई इलाकों में सिलाई ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट शुरू किए, जहां हजारों लड़कियां प्रशिक्षण लेती हैं। इनमें से कई लड़कियां अब अपने शहरों और गांवों में खुद का सिलाई सेंटर चला रही हैं। Ritu को गर्व होता है जब वो देखती हैं कि उनके स्टूडेंट्स अपने पैरों पर खड़े हैं।
2024 में उनकी मेहनत को एक बड़ा राष्ट्रीय मंच मिला—India Book of Records में उनका नाम दर्ज हुआ। उन्हें यह रिकॉर्ड मिला कि किसी भी सिलाई यूट्यूब चैनल पर सबसे ज्यादा सब्सक्राइबर उनके हैं। और फिर 28 सितंबर 2024 को नई दिल्ली में आयोजित National Quality Awards 2024 में उन्हें ‘Innovative Fashion Designers in India’ अवॉर्ड से नवाज़ा गया।
Ritu का मानना है कि हुनर अगर सच्चे मन से सीखा जाए, तो वह सिर्फ एक स्किल नहीं रहता—वह एक ज़रिया बन जाता है बदलाव का। उनका सपना है कि वो और लाखों महिलाओं को खुद के लिए खड़ा होना सिखाएं। खासकर गांवों की उन महिलाओं को, जो सोचती हैं कि उनके पास कोई मौका नहीं है। ऋतु उन्हें बताना चाहती हैं कि अगर उन्होंने कर दिखाया, तो आप भी कर सकती हैं।
आज Ritu की सालाना कमाई 40 लाख रुपये से ज्यादा है। उन्होंने अपने लिए एक सुंदर सा घर बनाया है, अपने बच्चों की पढ़ाई का पूरा ध्यान रखती हैं, और सबसे बड़ी बात—अब वो खुद अपने जैसे हजारों लोगों को आगे बढ़ने की ताकत दे रही हैं। यह सिर्फ एक महिला की सफलता नहीं, बल्कि एक समाज के बदलने की शुरुआत है।
जो लड़कियां कभी अपने सपनों को दबाकर बैठ जाती थीं, आज ऋतु के वीडियो देखकर कहती हैं—“मम्मी, मैं भी ये सीख सकती हूं।” उनके यूट्यूब कमेंट्स आज उम्मीदों से भरे होते हैं। कोई कहता है, “दीदी आपने मेरी शादी में खुद का लहंगा सिलना सिखाया,” तो कोई कहता है, “अब मैं महीने का 10 हजार रुपये घर बैठे कमा रही हूं।”
ऋतु की कहानी हमें ये सिखाती है कि कभी-कभी एक छोटा सा निर्णय—जैसे एक सिलाई मशीन की मांग—आपकी ज़िंदगी की दिशा बदल सकता है। उन्होंने अपने साधारण से सफर को असाधारण बना दिया। आज वो किसी सेलिब्रिटी से कम नहीं हैं, लेकिन फिर भी उनकी जुबान में वही सरलता है, वही गांव की बेटी वाली विनम्रता है।
जब कोई उनसे पूछता है कि आपकी सबसे बड़ी उपलब्धि क्या है, तो वो मुस्कुराकर कहती हैं—”जब मेरी स्टूडेंट पहली बार अपने पैसे से अपने घरवालों के लिए कुछ खरीदती है, वो मेरा असली इनाम होता है।”
ऋतु Insan की ये यात्रा बताती है कि महिला सशक्तिकरण सिर्फ नारों से नहीं, बल्कि काम से होता है। जब एक महिला अपने हुनर के दम पर न केवल अपनी बल्कि दूसरों की ज़िंदगी भी संवारती है, तो समाज में असली बदलाव आता है। सिलाई जैसी पारंपरिक कला को डिजिटल युग से जोड़कर उन्होंने साबित कर दिया कि नई सोच और पुराने हुनर का मेल चमत्कार कर सकता है।
और आज, जब ऋतु अपने स्टूडियो में बैठकर कैमरे के सामने एक नया डिज़ाइन बनाती हैं, तो उनके पीछे खड़े होते हैं वो लाखों चेहरे—जो कभी असहाय थे, लेकिन आज आत्मनिर्भर हैं। उनके साथ है वो सुई, जिसने कपड़े ही नहीं, भविष्य को भी सिल दिया। और उनके साथ है एक नाम—Talented Ritu Insan—जो अब सिर्फ एक नाम नहीं, एक आंदोलन बन चुका है।
Conclusion
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