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Cheque Bounce कानून की पूरी गाइड: एक साइन, एक चेक… और क्या सच में हो सकती है जेल? 2026

Cheque Bounce

रात के करीब साढ़े नौ बजे हैं। फोन की घंटी बार-बार बज रही है। सामने वाला व्यक्ति शांत नहीं है, उसकी आवाज़ में गुस्सा है, और वह सिर्फ एक बात पूछ रहा है—“आपका दिया हुआ चेक बाउंस क्यों हुआ?” आपके हाथ ठंडे पड़ जाते हैं। दिल की धड़कन तेज हो जाती है। दिमाग में एक ही सवाल घूमता है—क्या सच में सिर्फ एक Cheque Bounce होने से जेल हो सकती है? क्या यह सिर्फ डराने की बात है, या सच में कानून इतना सख्त है? और अगर सामने वाला कोर्ट चला गया तो क्या होगा? यही डर, यही जिज्ञासा, आज की इस कहानी की शुरुआत है।

भारत में Cheque सिर्फ एक कागज़ नहीं है। यह भरोसे का प्रतीक है। जब आप किसी को Cheque देते हैं, तो आप सिर्फ पैसा देने का वादा नहीं करते, बल्कि एक कानूनी जिम्मेदारी भी लेते हैं। और अगर यह वादा टूटता है, तो मामला सिर्फ बैंक चार्ज तक सीमित नहीं रहता। यह सीधे अदालत तक जा सकता है। यही वजह है कि Cheque Bounce को भारत में एक गंभीर कानूनी अपराध माना गया है।

इस पूरे मामले को समझने के लिए हमें जाना होगा साल 1881 में, जब बना था Negotiable Instruments Act, 1881। उस समय शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि एक सदी बाद भी यही कानून लाखों मामलों का आधार बनेगा। इस Act की धारा 138 के तहत Cheque Bounce को अपराध माना गया है। और यह अपराध सिर्फ Civil नहीं, बल्कि Criminal nature का होता है। मतलब मामला सिर्फ पैसे का नहीं, बल्कि सजा का भी है।

अब सवाल यह है कि Cheque Bounce आखिर होता क्यों है? सबसे आम कारण है खाते में पर्याप्त Balance का न होना। जिसे आम भाषा में कहते हैं “Insufficient Funds”। लेकिन इसके अलावा भी कई कारण हो सकते हैं—Signature mismatch, Overwriting, Account closed, Payment stopped by drawer, या Cheque की validity खत्म होना। बैंक जब Cheque reject करता है, तो वह एक Return Memo जारी करता है। यही Return Memo पूरे कानूनी केस की पहली सीढ़ी होता है।

अब यहां से शुरू होती है असली कानूनी प्रक्रिया। जैसे ही Cheque Bounce होता है, Payee यानी जिसे पैसा मिलना था, उसके पास 30 दिनों का समय होता है कि वह Drawer यानी जिसने Cheque दिया है, उसे एक Legal Notice भेजे। यह Notice Registered post या Courier से भेजा जाता है। इसमें साफ लिखा होता है कि आपका Cheque Bounce हो गया है और आपको 15 दिनों के भीतर भुगतान करना है।

यही वो 15 दिन हैं, जो आपकी किस्मत बदल सकते हैं। अगर आपने इन 15 दिनों के भीतर Payment कर दिया, तो मामला यहीं खत्म हो सकता है। लेकिन अगर आपने Notice को नजरअंदाज किया, या Payment नहीं किया, तो Payee अगले 30 दिनों के भीतर Magistrate Court में Complaint file कर सकता है। और फिर शुरू होता है Criminal trial।

यहां बहुत लोग सोचते हैं कि Cheque Bounce तो Civil dispute है, इसमें जेल कैसे हो सकती है? लेकिन कानून साफ कहता है कि अगर यह साबित हो जाए कि आपने जानबूझकर Payment से बचने के इरादे से Cheque जारी किया था, तो आपको 2 साल तक की सजा हो सकती है। साथ ही Court Cheque amount का Double तक Fine लगा सकता है। यानी अगर Cheque 1 लाख रुपये का था, तो आपको 2 लाख रुपये तक जुर्माना देना पड़ सकता है। और कई मामलों में Court Jail और Fine दोनों सजा एक साथ दे सकता है।

National Judicial Data Grid के आंकड़ों के मुताबिक, भारत की अदालतों में Cheque Bounce के लाखों मामले लंबित हैं। कई शहरों में Magistrate Courts का बड़ा हिस्सा सिर्फ Section 138 के मामलों में उलझा रहता है। Supreme Court ने भी समय-समय पर यह टिप्पणी की है कि, Cheque Bounce cases न्याय व्यवस्था पर भारी बोझ बन चुके हैं। इसलिए 2018 में सरकार ने Negotiable Instruments Act में Amendment किया, जिसमें Interim Compensation का प्रावधान जोड़ा गया। अब Court आरोपी से Trial के दौरान ही Cheque amount का 20% तक Compensation देने का आदेश दे सकती है।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। Cheque Bounce का असर सिर्फ कोर्ट तक सीमित नहीं रहता। इसका सीधा असर आपके Credit profile पर पड़ता है। जब आपका Cheque Bounce होता है, तो बैंक इसे Record करता है। बार-बार ऐसा होने पर बैंक आपके Account को Risk category में डाल सकता है। आपका CIBIL Score गिर सकता है। और एक बार Credit Score खराब हो जाए, तो Home Loan, Car Loan, या Personal Loan लेना लगभग नामुमकिन हो सकता है।

कई बैंक बार-बार Cheque Bounce होने पर Account close कर देते हैं। कुछ मामलों में Blacklisting तक हो सकती है। और आज के Digital banking युग में, जहां हर Transaction record होता है, Financial credibility सबसे बड़ी संपत्ति है। एक Cheque Bounce आपकी Financial image को गहरा नुकसान पहुंचा सकता है।

अब इस कानून की गंभीरता को समझने के लिए एक असली कहानी देखते हैं। Bollywood के मशहूर अभिनेता राजपाल यादव का मामला हाल ही में सुर्खियों में रहा। साल 2010 में उन्होंने अपनी फिल्म “अता पता लापता” बनाने के लिए करीब 5 करोड़ रुपये का Loan लिया था। समय के साथ Interest और Penalty जुड़ते-जुड़ते यह रकम लगभग 9 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। जब Payment के लिए Cheque दिए गए, तो वे Bounce हो गए। मामला अदालत तक पहुंचा, और हाल ही में उन्हें 6 महीने की सजा सुनाई गई। उन्हें दिल्ली की तिहाड़ जेल में surrender करना पड़ा।

यह मामला इसलिए चौंकाने वाला है क्योंकि रिपोर्ट्स के मुताबिक उनकी Net Worth 50 से 85 करोड़ रुपये के बीच बताई जाती है। वे एक फिल्म के लिए 1 से 2 करोड़ रुपये तक फीस लेते हैं। उनके पास Audi और BMW जैसी गाड़ियां हैं। फिर भी Cheque Bounce का मामला उन्हें जेल तक ले गया। यह दिखाता है कि कानून के सामने Status, Fame या Net Worth मायने नहीं रखते। Cheque Bounce एक Technical गलती नहीं, बल्कि कानूनी जिम्मेदारी है।

अब एक और महत्वपूर्ण सवाल—क्या हर Cheque Bounce में जेल तय है? जवाब है, नहीं। Court हर मामले में Intent देखती है। अगर यह साबित हो जाए कि Cheque गलती से Bounce हुआ, और आपने Notice मिलने के बाद Payment कर दिया, तो जेल की संभावना कम हो जाती है। कई मामलों में Compromise भी हो जाता है।

Section 147 के तहत यह Compoundable offence है, यानी दोनों पक्ष आपसी सहमति से समझौता कर सकते हैं। Supreme Court ने भी कई फैसलों में कहा है कि Cheque Bounce मामलों में Settlement को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, ताकि अदालतों का बोझ कम हो। कई High Courts ने Mediation की सलाह दी है। Digital Payment के बढ़ते चलन के बावजूद, Business transactions में Cheque का उपयोग अभी भी बड़े पैमाने पर होता है। खासकर Real estate, Construction, और Wholesale trade में।

लेकिन खतरा सिर्फ Criminal case का नहीं है। Imagine कीजिए, आप एक Government employee हैं या Private sector में काम करते हैं। आपके खिलाफ Criminal case चल रहा है। Police Verification में यह बात सामने आ सकती है। Promotion, Job change, या Visa application पर इसका असर पड़ सकता है। विदेश यात्रा में भी Criminal record एक बड़ी बाधा बन सकता है।

तो बचाव क्या है? सबसे पहला नियम—Cheque देने से पहले Balance check करें। दूसरा—Signature वही करें जो Bank record में है। तीसरा—अगर गलती से Cheque Bounce हो गया है, तो तुरंत Payee से संपर्क करें और Notice मिलने से पहले ही Payment clear कर दें। चौथा—Blank Cheque कभी किसी को न दें। कई मामलों में Blank Cheque misuse हुए हैं, और आरोपी को यह साबित करने में मुश्किल हुई है कि Cheque गलत तरीके से भरा गया था।

Government employee

आज UPI और Online transfer के दौर में Cheque का उपयोग कम हो रहा है, लेकिन Business world में इसकी विश्वसनीयता अब भी कायम है। और इसी वजह से कानून इसे गंभीरता से लेता है। एक Cheque सिर्फ कागज नहीं, बल्कि Trust document है। और Trust टूटने पर कानून सख्त हो जाता है।

कल्पना कीजिए, अगर किसी छोटे व्यापारी का 2 लाख रुपये का Cheque Bounce हो जाए, तो उसके Business पर कितना असर पड़ेगा। उसका Cash flow रुक सकता है। Supplier Payment अटक सकता है। Employees की Salary लेट हो सकती है। इसलिए Section 138 का मकसद सिर्फ सजा देना नहीं, बल्कि Financial discipline बनाए रखना है।

अंत में, सवाल वही है जिससे हमने शुरुआत की थी—क्या Cheque Bounce पर जेल हो सकती है? हां, हो सकती है। लेकिन हर मामले में नहीं। यह Intent, Evidence, और Legal process पर निर्भर करता है। कानून सख्त है, लेकिन न्यायसंगत भी है। अगर आप समय पर Payment कर दें, Notice का जवाब दें, और समझौते की कोशिश करें, तो स्थिति संभाली जा सकती है। लेकिन अगर लापरवाही की, Notice को नजरअंदाज किया, या जानबूझकर Payment से बचने की कोशिश की, तो एक छोटा सा साइन, एक छोटा सा Cheque, आपको कोर्ट के दरवाजे तक ले जा सकता है। और कभी-कभी… जेल तक भी।

Conclusion

आपने भरोसे में एक चेक दिया। कुछ दिनों बाद खबर मिलती है—चेक बाउंस। सामने वाला नोटिस भेज देता है। डर ये कि क्या अब जेल भी हो सकती है? और जिज्ञासा ये कि आखिर कानून इतनी सख्ती क्यों करता है? Negotiable Instrument Act की धारा 138 के तहत चेक बाउंस होना आपराधिक मामला है। बैंक ‘रिटर्न मेमो’ देता है, फिर 30 दिन के भीतर लीगल नोटिस। 15 दिन में भुगतान न हुआ, तो मामला अदालत तक जाता है।

दोष साबित हुआ तो 2 साल तक की जेल, और चेक राशि का दोगुना जुर्माना भी। सिर्फ सजा ही नहीं—CIBIL Score गिरता है, बैंक अकाउंट बंद हो सकता है। यही मामला अभिनेता राजपाल यादव के साथ हुआ। 5 करोड़ का लोन, बढ़ते-बढ़ते 9 करोड़… चेक बाउंस, केस, और 6 महीने की सजा। पूरी कहानी, पूरी सच्चाई जानने के लिए देखिए हमारी फुल वीडियो—हमारे यूट्यूब चैनल पर!

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