# भाग 1: एक अधूरी शुरुआत और बड़ा जोखिम
10वीं की ठोकर से ₹13,000 करोड़ तक
10वीं की ठोकर से ₹13,000 करोड़ तक। Rakesh Chopdar की Azad Engineering कहानी। रात के सन्नाटे में Hyderabad की एक factory के अंदर CNC machine की हल्की आवाज चल रही थी। बाहर दुनिया सो रही थी, लेकिन अंदर एक आदमी metal के छोटे हिस्से में अपना पूरा future देख रहा था।
पढ़ाई की रुकावट और भविष्य का डर
कभी इसी आदमी के सामने 10वीं की ठोकर खड़ी थी। लोग मान चुके थे कि पढ़ाई रुक गई, तो रास्ते भी रुक जाएंगे। डर यह था कि जिंदगी अब बस छोटी नौकरी तक सीमित रह जाएगी।
माइक्रोन्स की गलती का बड़ा खतरा
लेकिन असली डर marksheet में नहीं था। असली डर उस industry में था, जहां एक micron की गलती भी करोड़ों के engine, aircraft और defence system को risk में डाल सकती थी। Curiosity यहीं से शुरू होती है। एक school dropout लड़का कैसे उस level की engineering company बनाता है, जिसके parts दुनिया की बड़ी aerospace और energy supply chains तक पहुंचते हैं? यह कहानी किसी overnight miracle की नहीं है। यह कहानी है Rakesh Chopdar की, जिन्होंने degree की कमी को excuse नहीं बनाया, बल्कि machine, मेहनत और market को अपना असली classroom बना लिया।
# भाग 2: वर्कशॉप की पाठशाला और स्किल की ताकत
पिता की वर्कशॉप में हाथों-हाथ सीख
Azad Engineering की official founder profile के अनुसार Rakesh Chopdar high school dropout हैं, और 16 साल की उम्र में अपने पिता की workshop में काम शुरू किया था। वहीं hands-on learning ने उनकी manufacturing समझ बनाई। उनके पिता की छोटी workshop में fasteners, nuts और bolts जैसे parts बनते थे। बाहर से यह काम सामान्य लगता था, लेकिन अंदर हर thread, हर cut और हर finish discipline मांगता था। Azad Engineering
मशीनों को पढ़ना और तानों का सामना
Rakesh ने किताबों की जगह machines को पढ़ना शुरू किया। कौन-सा tool कैसे चलता है, metal heat में कैसा behave करता है, और छोटी गलती final product को कैसे खराब करती है। लोगों के ताने आसान नहीं थे। जब कोई बच्चा exam में पीछे रह जाता है, तो समाज उसके future पर stamp लगा देता है। Rakesh के साथ भी यही हुआ। Azad Engineering
मार्क्स के बजाय स्किल से पहचान
लेकिन उन्होंने एक अलग फैसला लिया। उन्होंने खुद को marks से define करने की बजाय skill से define करना शुरू किया। यही फैसला आगे चलकर उनकी पूरी कहानी बदलने वाला था। लगभग कई सालों तक उन्होंने family business में ground level पर काम किया। वहां उन्होंने सीखा कि manufacturing में सिर्फ product बनाना काफी नहीं, customer का भरोसा बनाना ज्यादा मुश्किल है। एक छोटा part भी अगर बार-बार same quality में नहीं बनता, तो बड़ा client वापस नहीं आता। यही repeatability किसी भी precision company की असली परीक्षा होती है। Azad Engineering
# भाग 3: टर्निंग पॉइंट और आज़ाद की नींव
एयरोफॉइल का वो जटिल चैलेंज
कहानी का बड़ा मोड़ तब आया, जब एक विदेशी buyer ने ऐसा complex part दिखाया, जिसे बनाना आसान नहीं था। यह aerofoil जैसा component था, जहां shape और surface दोनों बेहद critical होते हैं। Aerofoil कोई सामान्य लोहे का टुकड़ा नहीं होता। ऐसे parts turbine और engine systems in में काम करते हैं, जहां airflow, strength और balance मिलकर performance तय करते हैं। Azad Engineering
ग्लोबल स्टैंडर्ड की पहली सफलता
Rakesh ने उस challenge को डर की तरह नहीं, opportunity की तरह देखा। उन्हें पता था कि अगर यह part successfully बन गया, तो दुनिया उन्हें सिर्फ छोटा supplier नहीं समझेगी। कई attempts हुए, कई corrections हुए, और कई बार machine के पास खड़े होकर dimensions फिर से check किए गए। यह वह phase था, जहां patience ही capital था। जब sample customer तक पहुंचा और quality expectation के करीब निकला, तो Rakesh को समझ आया कि India से भी high-precision global parts बन सकते हैं। बस standard global होना चाहिए। Azad Engineering
आज़ाद इंजीनियरिंग की नई दिशा
साल 2008 में उन्होंने Azad Engineering को नई दिशा देने की शुरुआत की। Hyderabad में छोटा setup था, resources सीमित थे, लेकिन सोच local market से बहुत आगे की थी। Azad नाम भी symbolic था। यह सिर्फ company का नाम नहीं था, यह limitation से आजादी का idea था। पढ़ाई रुक सकती है, लेकिन सीखना नहीं रुकना चाहिए। शुरुआत में CNC machine, छोटा shop floor और limited orders थे। लेकिन Rakesh का focus था कि company सस्ता काम करके नहीं, difficult काम करके पहचानी जाए। Azad Engineering
# भाग 4: क्राइसिस में मौका और मार्केट में दबदबा
2008 की मंदी और नया रास्ता
2008 का समय आसान नहीं था। Global financial crisis का असर दुनियाभर में था। लेकिन crisis में कई बड़े players cautious हो गए, और छोटे मगर hungry manufacturers के लिए gap खुला। Rakesh ने इसी gap को समझा। उन्होंने उन parts पर focus किया, जिन्हें बनाना मुश्किल था, जहां supplier बदलना आसान नहीं था, और जहां qualification process लंबा होता था। Azad Engineering
मिशन-क्रिटिकल कंपोनेंट्स का क्षेत्र
Azad Engineering आज Aerospace, Defence, Energy और Oil & Gas sectors के लिए mission-critical components बनाती है। Company खुद को global OEMs के लिए trusted precision manufacturer बताती है। इन industries में speed से ज्यादा accuracy important होती है। एक blade, एक ring, एक actuator part या एक hydraulic component final machine की safety से जुड़ा हो सकता है। Azad Engineering
भरोसा जीतने की लंबी प्रक्रिया
यहीं Rakesh की सोच अलग दिखी। उन्होंने commodity parts की भीड़ में जाने की बजाय complex geometries, special materials और tight tolerances वाली manufacturing पर दांव लगाया। ऐसे clients सिर्फ price देखकर order नहीं देते। वे supplier की machines, process control, documentation, testing, certifications और delivery history देखते हैं। भरोसा महीनों नहीं, सालों में बनता है। 2025 Annual Report के अनुसार Azad के पास 1,700 से ज्यादा qualified parts और 45 specialised manufacturing processes का portfolio था। यही entry barrier company की बड़ी ताकत बना। Azad Engineering
# भाग 5: ग्लोबल रीच, शेयर मार्केट और बड़े कॉन्ट्रैक्ट्स
इंटरनेशनल मार्केट और पब्लिक लिस्टिंग
कंपनी की reach भी धीरे-धीरे India से बाहर गई। Annual Report में international markets 17 countries तक बताए गए और exports का contribution बहुत बड़ा दिखता है। Market cap रोज बदलता है, लेकिन recent public market data में Azad Engineering करीब 16,000 करोड़ रुपये के आसपास दिखाई गई। December 2023 में company stock market पर list हुई। एक छोटे machine shop की कहानी अचानक investors, analysts and media की नजरों में आ गई। Azad Engineering
सचिन तेंदुलकर और इनविजिबल मेहनत
यहां तक कि Sachin Tendulkar जैसे बड़े नाम की investment story भी चर्चा में आई, जहां public listing के बाद stake value कई गुना बढ़ने की बात reported हुई। लेकिन इस कहानी को सिर्फ valuation तक सीमित कर देना गलत होगा। असली कहानी share price की नहीं, उस invisible मेहनत की है, जो factory floor पर सालों तक होती रही। Precision manufacturing में glamour कम और grind ज्यादा होता है। यहां product launch से ज्यादा important होता है inspection report, machine calibration और customer audit का pass होना। Azad Engineering
डिफेंस और एनर्जी सेक्टर के बड़े माइलस्टोन
Rakesh ने समझ लिया था कि India में talent है, लेकिन global trust जीतने के लिए process discipline चाहिए। बिना discipline के कोई भी Make in India story लंबे समय तक नहीं टिकती। इसी discipline ने Azad को defence space में भी जगह दिलाई। Company ने GTRE, DRDO के साथ Advanced Turbo Gas Generator Engine के end-to-end manufacturing, और assembly contract की जानकारी stock exchanges को दी। यह milestone इसलिए बड़ा था, क्योंकि propulsion system किसी भी defence capability का बेहद sensitive हिस्सा होता है। ET Government ने भी इसे GTRE-DRDO defence programs के लिए advanced turbo engine contract बताया। Energy side पर भी Azad ने GE Vernova के steam power services business के साथ, $53.5 million का long-term supply contract sign किया, जिसमें complex airfoils supply करने की बात reported हुई। Azad Engineering
# भाग 6: भविष्य की राह, रिस्क और अंतिम सीख
ऑर्डर बुक और आगे की चुनौतियां
Aerospace में company की global relevance भी बढ़ी। Reuters ने November 2025 में Pratt & Whitney Canada के साथ, long-term aircraft engine components agreement report किया। 2025 Annual Report में company का order book ₹6,080 crore बताया गया, जिसमें long-term contracts शामिल थे। यह future execution visibility की कहानी बताता है, सिर्फ past success की नहीं। फिर भी, market cap को cash समझना गलती होगी। Valuation investors की expectation होती है, लेकिन factory को रोज machines, people, quality और delivery से prove करना पड़ता है। Azad की revenue mix में Energy और Oil & Gas बड़ा हिस्सा रहे, जबकि Aerospace और Defence तेजी से बढ़ते segment के रूप में दिखे। यह diversification company को single sector dependency से बचाता है। Azad Engineering
कड़े नियम और फाउंडर का माइंडसेट
एक समय था जब Rakesh छोटे parts देखकर सीख रहे थे। आज वही सोच global turbines, aircraft platforms और defence engines की supply chain तक पहुंच चुकी है। यह India की manufacturing story का भी एक symbol है। पहले हम अक्सर critical components import करने की मजबूरी सुनते थे, अब Indian companies qualification-based global supply chains में जगह बना रही हैं। लेकिन यह journey आसान नहीं है। Aerospace और defence में approval cycles लंबे होते हैं। कोई client सिर्फ patriotic feeling से order नहीं देता, वह proof, process और performance देखकर भरोसा करता है। Rakesh की कहानी education के खिलाफ नहीं है। Education valuable है, लेकिन यह कहानी बताती है कि classroom के बाहर भी सीखने वाला इंसान अगर disciplined हो, तो वह expert बन सकता है।
मशीनों का सबक और निरंतरता
Machine ने उन्हें patience सिखाया। Metal ने उन्हें resistance सिखाया। Customer ने उन्हें accountability सिखाई। और failure ने उन्हें यह सिखाया कि शुरुआत खराब हो सकती है, अंत नहीं। जब society ने उन्हें कमजोर समझा, उन्होंने अपनी energy शिकायत में waste नहीं की। उन्होंने वही जगह चुनी, जहां रोज काम बोलता है और excuses की कोई जगह नहीं होती। Founder mindset का मतलब सिर्फ बड़ा सपना नहीं होता। इसका मतलब है छोटी गलती देखकर भी सुधार करना, छोटे order को भी respect देना, और बड़े client के सामने भी process से बात करना। Global customers repeatability चाहते हैं। आज अच्छा part बना और कल खराब, तो भरोसा खत्म। इसलिए Azad की असली strength machine से ज्यादा system बनाने में थी।
बैकग्राउंड और भविष्य का असली सवाल
पिता की workshop ने Rakesh को ground reality दी। वहां उन्होंने देखा कि business सिर्फ profit नहीं, reputation भी होता है। एक बार भरोसा टूटा, तो नया customer मिलना मुश्किल होता है। Hyderabad जैसे industrial ecosystem ने भी उन्हें manufacturing base दिया। Skilled workers, suppliers, tool rooms और engineering culture ने इस journey को practical shape देने में मदद की। जैसे company बढ़ी, वैसे यह अकेले Rakesh की कहानी नहीं रही। Engineers, operators, quality teams, finance teams और supply chain लोगों ने मिलकर इस vision को scale दिया। Certification और audit culture ने company को local workshop से global supplier में बदला। यही वह invisible bridge है, जो छोटे manufacturing unit को critical industry partner बनाता है। Capacity expansion भी जरूरी था। जब global clients long-term contracts देते हैं, तो सिर्फ promise काफी नहीं होता। Machines, facilities, working capital और trained manpower साथ-साथ बढ़ाने पड़ते हैं।
स्टॉक मार्केट का प्रेशर और वास्तविक सीख
Stock market ने Azad को visibility दी, लेकिन listing के बाद pressure भी बढ़ा। अब हर quarter में numbers, margins, orders और execution पर public नजर रहती है। Rakesh Chopdar की image इसलिए अलग बनती है, क्योंकि वह polished degree story से नहीं, shop-floor reality से निकले हैं। उनका confidence presentation room से पहले production floor में बना। आगे की राह में challenges भी हैं। High valuation, execution pressure, receivables, global demand cycles और customer concentration जैसे risks किसी भी fast-growing precision company के लिए serious होते हैं। Competition भी बढ़ेगा। जैसे-जैसे India में aerospace and defence manufacturing का scope बढ़ेगा, और companies इस space में आएंगी। लेकिन early qualification advantage बहुत valuable हो सकता है। Azad Engineering
माइक्रोन्स की दुनिया और वीडियो आउट्रो
इस कहानी की सीख यह नहीं कि पढ़ाई छोड़ दो। असली सीख यह है कि failure के बाद सीखना मत छोड़ो, क्योंकि skill की दुनिया में consistency किसी degree से कम नहीं होती। Hook में जो लड़का marksheet के सामने चुप था, वही आज microns की दुनिया में बात करता है। फर्क सिर्फ इतना था कि उसने अपने जीवन की machine बंद नहीं होने दी। अब नजर future पर है। Company ने बताया था कि GTRE के लिए fully integrated turbo engines की first batch delivery early 2026 से शुरू करने की योजना है। अगर यह execution successful रहता है, तो Azad Engineering सिर्फ components company नहीं, बल्कि propulsion systems capability वाली Indian manufacturing story का बड़ा नाम बन सकती है। कहानी यहां खत्म नहीं होती। असली सवाल अब यह है कि क्या एक 10वीं की ठोकर से निकला founder India को global precision manufacturing map पर और ऊंचा ले जा पाएगा? हैदराबाद की एक छोटी फैक्ट्री में एक लड़का मशीनों के बीच खड़ा था। वह 10वीं में फेल हो चुका था, Azad Engineering कॉलेज नहीं गया था, और दुनिया उसे कमजोर समझ रही थी। डर यह था कि क्या बिना degree के उसकी जिंदगी यहीं रुक जाएगी? लेकिन राकेश चोपदार ने किताबों से नहीं, मशीनों से सीखना शुरू किया। पिता की छोटी fastener factory में उन्होंने नट-बोल्ट, production, quality और customer trust की असली कीमत समझी। करीब 12 साल तक काम करने के बाद उनके अंदर एक सपना जन्मा। वह सिर्फ छोटे पुर्जे नहीं बनाना चाहते थे, बल्कि ऐसी engineering company बनाना चाहते थे, जिसपर दुनिया भरोसा करे। 2008 में उन्होंने एक छोटे से shed और एक second-hand CNC machine से Azad Engineering शुरू की। Azad Engineering हर order उनके लिए परीक्षा था, और हर गलती एक नई सीख। फिर एक विदेशी ग्राहक jet engine का aerofoil लेकर आया, और यहीं से कहानी का सबसे बड़ा मोड़ शुरू हुआ। पूरी सच्चाई जानने के लिए discription में दिए लिंकपर क्लिककर अभी पूरी वीडियो देखें।!
अगर हमारे आर्टिकल ने आपको कुछ नया सिखाया हो, तो इसे शेयर करना न भूलें, ताकि यह महत्वपूर्ण जानकारी और लोगों तक पहुँच सके। आपके सुझाव और सवाल हमारे लिए बेहद अहम हैं, इसलिए उन्हें कमेंट सेक्शन में जरूर साझा करें। आपकी प्रतिक्रियाएं हमें बेहतर बनाने में मदद करती हैं। Azad Engineering
GRT Business विभिन्न समाचार एजेंसियों, जनमत और सार्वजनिक स्रोतों से जानकारी लेकर आपके लिए सटीक और सत्यापित कंटेंट प्रस्तुत करने का प्रयास करता है। हालांकि, किसी भी त्रुटि या विवाद के लिए हम जिम्मेदार नहीं हैं। हमारा उद्देश्य आपके ज्ञान को बढ़ाना और आपको सही तथ्यों से अवगत कराना है।
अधिक जानकारी के लिए आप हमारे GRT Business Youtube चैनल पर भी विजिट कर सकते हैं।
धन्यवाद!

