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Ayushman Bharat का पूरा सच: ये बीमारियाँ नहीं होतीं कवर — जानिए अभी, वरना बाद में पछताना पड़ेगा I 2026

Ayushman

सोचिए… अचानक रात को सीने में दर्द उठता है, परिवार घबराकर आपको अस्पताल लेकर जाता है, और आप निश्चिंत हैं कि “मेरे पास Ayushman Card है, सब कवर होगा।” लेकिन बिल बनते समय काउंटर पर आपको बताया जाए कि यह खर्च योजना में शामिल नहीं है। डर यहीं से शुरू होता है। जिज्ञासा यह है कि दुनिया की सबसे बड़ी सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजना आखिर किन बीमारियों को कवर नहीं करती। और यह कहानी इसलिए अहम है, क्योंकि यह सिर्फ इलाज की नहीं, बल्कि जागरूकता की कहानी है। आज हम बात कर रहे हैं Ayushman Bharat Yojana, जिसे PM-JAY के नाम से भी जाना जाता है।

2018 में शुरू हुई इस योजना का उद्देश्य था गरीब और कमजोर परिवारों को, 5 लाख रुपये तक का cashless इलाज उपलब्ध कराना। सरकार के मुताबिक, करोड़ों लाभार्थी इस योजना के दायरे में आते हैं। इसे दुनिया की सबसे बड़ी publicly funded health insurance scheme कहा जाता है। National Health Authority के आंकड़ों के अनुसार, लाखों hospital admissions इस योजना के तहत हो चुके हैं। लेकिन अक्सर एक भ्रम फैल जाता है कि Ayushman Card होने का मतलब है हर बीमारी का मुफ्त इलाज। सच इससे थोड़ा अलग है।

सबसे पहले समझना जरूरी है कि यह योजना primarily hospitalization based coverage देती है। यानी जब मरीज अस्पताल में भर्ती होता है, तभी पैकेज लागू होता है। इसका मतलब यह है कि OPD यानी Out Patient Department का खर्च आमतौर पर कवर नहीं होता। अगर आपको सामान्य सर्दी-खांसी, बुखार या हल्की बीमारी के लिए डॉक्टर को दिखाना है और भर्ती नहीं होना है, तो consultation fee और दवाइयों का खर्च आपको खुद उठाना पड़ेगा। यही वह जगह है जहां लोग सबसे ज्यादा भ्रमित होते हैं।

अब बात करते हैं cosmetic surgery की। Nose job, liposuction, hair transplant या सुंदरता बढ़ाने के लिए की जाने वाली elective plastic surgeries इस योजना के तहत कवर नहीं होतीं। हालांकि, अगर किसी दुर्घटना में चेहरा या शरीर का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो जाए और reconstructive surgery जरूरी हो, तो वह अलग बात है। यानी medical necessity और cosmetic preference के बीच फर्क किया जाता है।

Fertility treatment भी इस योजना से बाहर है। Infertility का इलाज, IVF प्रक्रिया, IUI या अन्य reproductive technologies PM-JAY में शामिल नहीं हैं। यह निर्णय इसलिए लिया गया क्योंकि योजना का मुख्य फोकस life-threatening या गंभीर बीमारियों पर है। IVF जैसी प्रक्रियाएं महंगी और लंबी होती हैं, और इन्हें public health emergency category में नहीं रखा गया।

नशा मुक्ति यानी alcohol या drug de-addiction programs का खर्च भी आमतौर पर इस योजना के तहत शामिल नहीं है। हालांकि mental health treatment के कुछ पैकेज शामिल हो सकते हैं, लेकिन substance abuse rehabilitation का पूर्ण खर्च कवर नहीं होता। यह भी एक ऐसा क्षेत्र है जहां लोग अक्सर गलतफहमी में रहते हैं।

Organ transplant का मुद्दा थोड़ा जटिल है। Kidney transplant, liver transplant जैसी प्रक्रियाएं अत्यंत महंगी होती हैं। कुछ राज्यों में सीमित पैकेज उपलब्ध हैं, लेकिन donor cost, post-transplant medication और लंबे समय की देखभाल पूरी तरह से कवर नहीं होती। यह काफी हद तक state-specific guidelines पर निर्भर करता है। इसलिए लाभार्थियों को अपने राज्य की सूची देखना जरूरी है।

चश्मा बनवाना, routine eye checkup या hearing aid जैसी सुविधाएं भी इस योजना के दायरे से बाहर हैं। यानी अगर आपको नंबर का चश्मा चाहिए या hearing machine की जरूरत है, तो यह खर्च आपको स्वयं वहन करना होगा। योजना का लक्ष्य life-saving interventions है, न कि routine corrective aids।

Hospital discharge के बाद की दवाइयों को लेकर भी नियम स्पष्ट हैं। Admission से तीन दिन पहले और discharge के लगभग पंद्रह दिन बाद तक की दवाइयां और जांचें पैकेज में शामिल हो सकती हैं। लेकिन उसके बाद की लंबी अवधि की दवा—जैसे chronic diabetes या hypertension की ongoing medicines—आपको खुद खरीदनी पड़ती हैं। इसलिए Ayushman Card को complete health cover समझ लेना जोखिम भरा हो सकता है।

अब यह भी समझना जरूरी है कि आखिर इसमें कवर क्या होता है। Cancer treatment, heart surgery, angioplasty, bypass surgery, kidney failure management, knee replacement, neurosurgery जैसी गंभीर बीमारियां इसमें शामिल हैं। पैकेज rates predefined होते हैं। Private insurance के विपरीत, pre-existing diseases भी पहले दिन से कवर होती हैं। यह योजना का एक बड़ा लाभ है।

हाल के नियमों के अनुसार, 70 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों को अलग से 5 लाख रुपये तक का कवर देने का प्रावधान किया गया है, चाहे उनकी income कुछ भी हो। यह कदम elderly population को financial protection देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना गया है। भारत में healthcare cost तेजी से बढ़ रही है, और elderly population अधिक vulnerable होती है।

National Sample Survey के आंकड़े बताते हैं कि, भारत में out-of-pocket health expenditure अब भी उच्च है। बहुत से परिवार इलाज के खर्च से गरीबी रेखा के नीचे चले जाते हैं। इसी पृष्ठभूमि में Ayushman Bharat जैसी योजना लाई गई थी। लेकिन awareness की कमी के कारण लोग गलत अपेक्षाएं बना लेते हैं।

यह योजना package-based system पर चलती है। हर बीमारी या procedure का एक predefined package rate होता है, जिसमें surgery, medicines, diagnostics और hospitalization शामिल होते हैं। Hospital सीधे National Health Authority से reimbursement claim करता है। Beneficiary को cashless treatment मिलता है। लेकिन अगर कोई सेवा package list में नहीं है, तो उसका खर्च कवर नहीं होगा।

यहां एक और महत्वपूर्ण तथ्य है—हर hospital इस योजना से empanelled नहीं होता। सिर्फ वही hospital cashless treatment दे सकते हैं, जो scheme के तहत पंजीकृत हैं। इसलिए emergency में किसी भी hospital जाने से पहले empanelment status जानना जरूरी है।

Digital verification भी इस योजना का हिस्सा है। Beneficiary identification Aadhaar या ration card आधारित हो सकता है। Fraud रोकने के लिए e-card generation और claim audit की प्रक्रिया रखी गई है। फिर भी कुछ मामलों में misuse या overbilling की शिकायतें सामने आती रही हैं, जिन्हें address करने के लिए monitoring system मजबूत किया जा रहा है।

Ayushman Bharat का broader vision सिर्फ insurance नहीं, बल्कि primary healthcare strengthening भी है। इसके साथ Health and Wellness Centres की स्थापना की गई है, ताकि preventive care और screening सेवाएं उपलब्ध हों। लेकिन hospitalization coverage और preventive care के बीच का gap अभी भी awareness के स्तर पर है।

आम नागरिक के लिए यह समझना जरूरी है कि Ayushman Card emergency shield है, daily health wallet नहीं। इसे comprehensive insurance समझना भ्रम हो सकता है। OPD, routine medicines, cosmetic procedures, fertility treatment, de-addiction services और कई elective interventions इसमें शामिल नहीं हैं।

लेकिन इसके बावजूद, यह योजना लाखों परिवारों के लिए life-saving साबित हुई है। Heart surgery या cancer treatment का लाखों रुपये का खर्च जब cashless होता है, तो परिवार financial catastrophe से बच जाता है। यही इस योजना का मूल उद्देश्य है—catastrophic health expenditure को कम करना।

जागरूकता ही असली सुरक्षा है। अगर आप जानते हैं कि क्या कवर है और क्या नहीं, तो आप बेहतर financial planning कर सकते हैं। Ayushman Bharat एक मजबूत foundation है, लेकिन complete protection के लिए supplementary planning की जरूरत हो सकती है।

जब अगली बार आप Ayushman Card को देखें, तो उसे एक powerful tool समझें, लेकिन उसकी सीमाओं को भी पहचानें। क्योंकि सही जानकारी ही असली बीमा है। और यही इस कहानी का सबसे अहम संदेश है—इलाज से पहले जागरूकता जरूरी है, वरना emergency के वक्त confusion ही सबसे बड़ा खतरा बन सकता है।

Conclusion

आपके घर में कोई अचानक बीमार पड़ जाए। हाथ में आयुष्मान कार्ड हो, और आपको भरोसा हो कि सब कुछ कवर है। लेकिन अस्पताल पहुंचकर पता चले कि इलाज इस योजना में शामिल ही नहीं है। डर ये कि कहीं गलतफहमी भारी न पड़ जाए… और जिज्ञासा ये कि आखिर Ayushman Bharat Yojana में क्या-क्या कवर नहीं होता? PM-JAY 5 लाख रुपये तक का इलाज देता है, लेकिन हर खर्च नहीं।

OPD का खर्च, सामान्य सर्दी-खांसी, बाहर की दवाइयां इसमें शामिल नहीं हैं। कॉस्मेटिक सर्जरी, IVF और Infertility ट्रीटमेंट, नशा मुक्ति इलाज, चश्मा या Hearing Aid का खर्च भी कवर नहीं होता। कुछ महंगे Organ Transplant राज्य के नियमों पर निर्भर करते हैं। भर्ती से 3 दिन पहले और डिस्चार्ज के 15 दिन बाद तक की दवाइयां ही मुफ्त मिलती हैं। फिर सवाल उठता है… अगर ये सब नहीं, तो असल में योजना किन हालात में सहारा बनती है?

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